बदलते मौसम में ऐसे बढ़ायें अपना इम्युनिटी पॉवर!

 

 

(हेल्थ ब्यूरो)

सिवनी (साई)। इन दिनों नवंबर में भी कभी आसमान में बादल तो कभी बारिश तो कभी उमस हो रही है। ऐसे में बदलता मौसम जहाँ एक ओर बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है, वहीं इस दौरान हमारी इम्युनिटी पॉवर यानि प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर पड़ती जा रही है, जिसके कारण हम आसानी से बीमार हो जाते हैं।

इन दिनों मौसम के इस बदलाव के चलते अधिकतर हॉस्पिटल मरीज़ों से अटे पड़े हैं। इसका कारण भी कई डॉक्टर इनकी कमजोर प्रतिरोधक क्षमता को मानते हैं। वहीं कुछ डॉक्टरों का कहना तो यहाँ तक है कि सिर्फ सर्दी, जुखाम या वायरल ही नहीं अन्य बीमारियों जो आजकल तेजी से फैल रहीं हैं उनके फैलने का कारण भी हमारी प्रतिरोध क्षमता का कमजोर होना ही है।

बदलते मौसम में मौसमी बीमारियां उन लोगों को ज्यादा तंग करती हैं, जिनकी जीवनी शक्ति (इम्युनिटी) कमजोर हो गयी है। ऐसे लोगों को चाहिये कि वे अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनायें। रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी, तो कई बड़ी बीमारियों और इंफेक्शंस से भी शरीर खुद – ब – खुद अपना बचाव कर लेगा।

चिकित्सकों के अनुसार जीवित लोगों में रोग प्रतिरोधक तंत्र (इम्युन सिस्टम) नाम का एक ऐसा मेकेनिज़्म होता है, जो इन बैक्टीरिया, वायरस और माईक्रोब्स को शरीर से दूर रखता है। इंसान के मरते ही उसका इम्युन सिस्टम भी खत्म हो जाता है और शरीर पर हमला करने की ताक में बैठे माईक्रोब्स बॉडी को अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं। यानी हमारे शरीर के भीतर एक प्रोटेक्शन मेकेनिज़म है, जो शरीर की तमाम रोगों से सुरक्षा करता है। इसे ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं।

इसी तरह चिकित्सकों के मुताबिक वातावरण में मौजूद तमाम बैक्टीरिया और वायरस को हम लगातार साँस के जरिये अंदर लेते रहते हैं, लेकिन ये बैक्टीरिया हमें नुकसान इसलिये नहीं पहुँचा पाते क्योंकि हमारा प्रतिरोधक तंत्र इनसे हर समय लड़ते हुए इन्हें हराता है।

कई बार जब इन बाहरी कीटाणुओं की ताकत बढ़ जाती है तो ये शरीर के प्रतिरोधक तंत्र को भेद जाते हैं। नतीज़तन कई मौसमी बीमारियां हमें घेर लेती हैं। सर्दी, जुकाम इस बात का संकेत हैं कि आपका प्रतिरोधक तंत्र कीटाणुओं को रोक पाने में नाकामयाब हो गया। कुछ दिन में आप ठीक हो जाते हैं। इसका मतलब है कि तंत्र ने फिर से जोर लगाया और कीटाणुओं को हरा दिया।

अगर प्रतिरोधक तंत्र ने दोबारा जोर न लगाया होता तो इंसान को जुकाम, सर्दी से कभी राहत ही नहीं मिलती। इसी तरह कुछ लोगों को किसी खास चीज से एलर्जी होती है और कुछ को उस चीज से नहीं होती। इसकी वजह यह है कि जिस शख्स को एलर्जी हो रही है, उसका प्रतिरोधक तंत्र उस चीज पर रिएक्शन कर रहा है, जबकि दूसरों का तंत्र उसी चीज पर सामान्य व्यवहार करता है।

इसी तरह डायबिटीज में भी प्रतिरोधक तंत्र पैनक्रियाज में मौजूद सेल्स को गलत तरीके से मारने लगता है। ज्यादातर लोगों में बीमारियों की मुख्य वजह वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन होता है। इनकी वजह से खाँसी – जुकाम से लेकर खसरा, मलेरिया जैसे रोग हो सकते हैं। इन इंफेक्शन से शरीर की रक्षा करने का काम ही करता है इम्युन सिस्टम।

घट रही है लोगों में इम्युनिटी : चिकित्सकों के मुताबिक अनियमित खानपान, अनिद्रा, देर रात तक कार्य करने की आदत और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों में इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) घट रही है। इसके अलावा डॉक्टरों के मुताबिक मौसम बदलाव के दौरान भी बाहरी बैक्टेरिया व वायरस ज्यादा शक्तिशाली हो जाते है और इस समय शरीर में कई तरह के वायरस अटेक करते हैं जिससे हमारी इम्युन क्षमता प्रभावित होती है।

ऐसे बढ़ायें इम्युनिटी : इम्युनिटी बढ़ाने के लिये कुछ प्रयोग किये जा सकते हैं।

खानपान : रोग प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण शरीर खुद कर लेता है। सभी ऐसी चीजें जो सेहतमंद खाने में आती हैं, उन्हें लेना चाहिये। इनकी मदद से शरीर इस काबिल बन जाता है कि वह खुद अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सके। रोग प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण शरीर खुद कर लेता है।

ऐसा नहीं है कि आपने बाहर से कोई चीज खायी और उसने जाकर सीधे आपकी प्रतिरोधक क्षमता में इज़ाफा कर दिया। इसलिये ऐसी सभी चीजें जो सेहतमंद खाने में आती हैं, उन्हें लेना चाहिये। इनकी मदद से शरीर इस काबिल बन जाता है कि वह खुद अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सके। आयुर्वेद के मुताबिक, कोई भी खाना जो आपके ओज में वृद्धि करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है।

अम्ल जो खाना बढ़ाता है, वह नुकसानदायक है। बाज़ार में मिलने वाले फूड सप्लीमेंट्स का फायदा उन लोगों के लिये है, जो लोग खाने में सलाद नहीं लेते, वक्त पर खाना नहीं खाते, गरिष्ठ और जंक फूड ज्यादा खाते हैं, वे अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिये इन सप्लीमेंट्स की मदद ले सकते हैं। इसके अलावा प्रोसेस्ड और पेकेज्ड फूड से जितना हो सके, बचना चाहिये। ऐसी चीजें जिनमें प्रिजरवेटिव्स मिले हों, उनसे भी बचना चाहिये।

विटामिन सी और बीटा केरोटींस जहाँ भी है, वह इम्युनिटी बढ़ाता है। इसके लिये मौसमी, संतरा, नींबू लें। जिंक का भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में बड़ा हाथ है। जिंक का सबसे बड़ा स्त्रोत सीफूड है, लेकिन ड्राई फ्रूट्स में भी जिंक भरपूर मात्रा में पाया जाता है। फल और हरी सब्जियां भरपूर मात्रा में खायें।

ऐसे काम करती हैं विभिन्न चिकित्सा पद्धतियां

आयुर्वेद : आयुर्वेद में रसायन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बेहद मददगार होते हैं। रसायन का मतलब केमिकल नहीं है। कोई ऐसा प्रोडक्ट जो एंटी ऑक्सीडेंट हो, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला हो और स्ट्रेस को कम करता हो, रसायन कहलाता है। मसलन त्रिफला, ब्रह्मा रसायन आदि, लेकिन च्यवनप्राश को आयुर्वेद में सबसे बढ़िया रसायन माना गया है।

इसे बनाने में मुख्य रूप से ताजा आँवले का इस्तेमाल होता है। इसमें अश्वगंधा, शतावरी, गिलोय समेत कुल 40 जड़ी बूटियां डाली जाती हैं। अलग – अलग देखें तो आँवला, अश्वगंधा, शतावरी और गिलोय का रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में जबर्दस्त योगदान है।

मेडिकल साईंस कहता है कि शरीर में अगर आईजीई का लेवल कम हो तो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। देखा गया है कि च्यवनप्राश खाने से शरीर में आईजीई का लेवल कम होता है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में यह हैं खास – हल्दी, अश्वगंधा, आँवला, शिलाजीत, मुलहठी, तुलसी, लहसुन, गिलोय।

नैचरोपैथी : नैचरोपैथी के मुताबिक बुखार, खाँसी और जुकाम जैसे रोगों को शरीर से टॉक्सिंस बाहर निकालने का मेकनिज़म माना जाता है। नैचरोपैथी में इम्युनिटी बढ़ाने के लिये अच्छी डाईट और लाईफ स्टाईल को सुधारने के अलावा शरीर को डीटॉक्स भी किया जाता है। शरीर को डीटॉक्स करने के लिये खूब पानी पीयें। हाईड्रेशन के अलावा यह शरीर पर हमला करने वाले माईक्रो ऑर्गेनिज़म को बाहर निकालने का काम भी करता है।

योग और वर्जिश : शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ौत्तरी करने में यौगिक क्रियाएं बेहद फायदेमंद हैं। किसी योगाचार्य से सीखकर इन क्रियाओं को इसी क्रम में करना चाहिये : कपालभाति, अग्निसार क्रिया, सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, उत्तान पादासान, कटि चक्रासन, सेतु बंधासन, पवन मुक्तासन, भुजंगासन, नौकासन, मण्डूकासन, अनुलोम विलोम प्राणायाम, उज्जायी प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम, भ्रामरी और ध्यान।

वर्जिश : एक्सरसाईज करने से शरीर के ब्लड सर्कुलेशन में बढ़ौत्तरी होती है, मसल्स टोन होती हैं, कार्डिएक फंक्शन बेहतर होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ौत्तरी होती है। शरीर से जहरीले पदार्थ निकालने में भी एक्सर्साइज मदद करती है। दरअसल, एक्सर्साइज के दौरान हम गहरी, लंबी और तेज साँसें लेते हैं।

ऐसा करने से जहरीले पदार्थ फेफड़ों से बाहर निकलते हैं। दूसरे, एक्सर्साइज के दौरान हमें पसीना भी आता है। पसीने के जरिये भी शरीर से गंदे पदार्थ बाहर निकलते हैं। एक स्टडी के मुताबिक अगर रोजाना सुबह 45 मिनिट तेज चाल से टहला जाये तो साँस से संबंधित बीमारियां दूर होती हैं और बार – बार बीमारी होने की आशंका को आधा किया जा सकता है।

होम्योपैथी : होम्योपैथी में वाईटल फोर्स का सिद्धांत काम करता है। इम्युनिटी को बढ़ाना ही होम्योपैथी का आधार है। पूरी जिंदगी को वाईटल फोर्स ही कंट्रोल करता है। यही है जो जिंदगी को आगे बढ़ाता है। अगर शरीर की वाईटल फोर्स डिस्टर्ब है तो शरीर में बीमारियां बढ़ने लगेंगी। होम्योपैथी में मरीज़ को ऐसी दवा दी जाती है, जो उसकी वाईटल फोर्स को सही स्थिति में ला दे।

वाईटल फोर्स ही बीमारी को खत्म करता है और इसी में शरीर की इम्युनिटी होती है। दवा देकर वाईटल फोर्स की पॉवर बढ़ा दी जाती है, जिससे वह बीमारी से लड़ती है और उसे खत्म कर देती है। होम्योपैथी में इम्युनिटी बढ़ाने के लिये आमतौर पर इन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *