निर्जीव जिला क्रिकेट संघ पर आश्रित हो गये खिलाड़ी!

 

पिछले कई वर्षों से, जिला क्रिकेट संघ सिवनी की ओर से किसी भी बैठक और उसमें लिये गये निर्णय के संबंध में मीडिया में कोई जानकारी नहीं आयी है। इसलिये इस स्तंभ के माध्यम से मैं जिला क्रिकेट संघ सिवनी के समक्ष कुछ बातें रखना चाहता हूँ, कृपया इस लोकप्रिय समाचार पत्र में इन बातों को अवश्य स्थान दें।

सबसे पहले तो जिला क्रिकेट संघ सिवनी के जिम्मेदार पदाधिकारियों से मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या उनकी जानकारी में यह है कि सिवनी में क्रिकेट की बेहतरी के लिये उसके द्वारा क्या किया जाना चाहिये और कौन-कौन से कदम उठाये जाना चाहिये। दरअसल ऐसा लगता है जैसे इस संगठन में खिलाड़ियों की कमी है जिसके कारण वे किसी भी नतीजे पर नहीं पहुँच पा रहे हैं।

ऊपर, ऐसा इसलिये लिखा गया है क्योंकि बीते कई वर्षों में सिवनी का क्रिकेट पतन की ओर ही गया है। इस दौरान कुछ खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा के बलबूते राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनायी है लेकिन इसमें कहीं भी जिला क्रिकेट संघ सिवनी की कोई भूमिका नज़र नहीं आयी है। यह अलग बात है कि जैसे किसी विद्यार्थी के सफल होने पर उन कोचिंग इंस्टीट्यूट के द्वारा भी इसका श्रेय लेने की कोशिश की जाती है जो उन इंस्टीट्यूट में पढ़े ही नहीं होते हैं ठीक वैसे ही शायद जिला क्रिकेट संघ सिवनी भी उन खिलाड़ियों की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश कर सकता होगा जबकि हकीकत वे लोग या खिलाड़ी जानते ही हैं जो इस खेल से जुड़े हुए हैं।

एक समय जब डीसीए (जिला क्रिकेट संघ) का गठन सिवनी में नहीं हुआ करता था तब सिवनी की क्रिकेट, आला दर्जे की हुआ करती थी लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि सिवनी में भी डीसीए का गठन हुआ और खिलाड़ियों ने अपने आप को शायद इसी निर्जीव डीसीए पर आश्रित कर लिया, इसके बाद का दृश्य आज सबके सामने है। स्थिति यह है कि सिवनी के खिलाड़ी, कोई प्रतियोगिता तो दूर की बात है, अभ्यास के लिये तक मैदान नहीं प्राप्त कर सके हैं। क्या क्रिकेट के लिये मैदान भी डीसीए को उपलब्ध नहीं करवाना चाहिये? कलेक्टर सिवनी के द्वारा पूर्व में आश्वासन दिये जाने के बाद भी यदि सिवनी में इस संगठन को इतने वर्षों में जमीन नहीं मिल पायी है तो इसे क्या कहा जाना चाहिये।

अपेक्षा यही की जा सकती है कि डीसीए के पदों पर चिपके पदाधिकारियों को अन्य खेल संगठनों से प्रेरणा लेना चाहिये कि खेल के हित में काम कैसे किया जाता है। एक युवा पीढ़ी, क्रिकेट के खेल से ही दूर हो चुकी है लेकिन उसे अभ्यास के लिये एक अदद मैदान तक डीसीए उपलब्ध नहीं करवा पाया है। पद से चिपके रहने की लालसा पाले पदाधिकारियों के द्वारा स्वप्रेरणा से हट जाने की अपेक्षा ही शेष रह जाती है।

आशीष भटनागर