फेसबुक पर छलका अस्पताल का दर्द!

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा अस्पताल की दशा और दिशा को सुधारने के लिये लगातार ही पहल की जा रही है किन्तु अस्पताल प्रशासन की ओर से, इस संबंध में वांछित सहयोग न मिल पाने के कारण मरीज़ों और उनके परिजनों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर रोष और असंतोष की स्थिति निर्मित हो रही है।

सोशल मीडिया फेसबुक पर रफीक खान नामक व्यक्ति की आईडी से शुक्रवार को लगभग दस बजे एक पोस्ट डाली गयी। यह पोस्ट बहुत ही मार्मिक प्रतीत हो रही थी। इस पोस्ट में वे लिखते हैं कि सुबह 10 बजे जिला चिकित्सालय सिवनी का हाल, सिर्फ बिल्डिंग का रंग रोगन हो रहा है, मरीज़ डॉक्टर के इंतेज़ार में सुबह 08 बजे से खड़े है, ओपीडी में डॉक्टर साहब का 10 बजे तक तो पता नही है, आगे जाने कब आयेंगे। और जो आ गये है वो धूप सेंक रहे है। शायद कोई नयी टेक्नालॉजी आयी हो कि, अस्पताल का रंग रोगन करने से मरीज़ ठीक होते हों।

इस पोस्ट के डलते ही यह जमकर वायरल हुई। इस पोस्ट पर मोहसिन शेख ने लिखा कि जहाँ सुधार करना चाहिये, वहाँ सुधार नहीं हो पा रहा है, यही अफसोस की बात है। विपिन सिंह ने इस चित्र को सराहते हुए बहुत शानदार लिखा तो मोहम्मद जैद खान लिखते हैं कि इस पोस्ट को सबको टेग करो, सक्षम अधिकारी, मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश को। इसके जवाब में रफीक खान ने लिखा कि कतार का आलम यह है कि मरीज़ वैसे ही दर्द से बेजार हैं, फिर पर्ची की लाईन, ओपीडी में लाईन, बीपी, शुगर चेक करवाने के लिये लाईन, फिर दवा काउंटर पर लाईन . . .! डॉ.महेंद्र डेहरवाल लिखते हैं कि ऊपरी चमक दमक पर सभी का ध्यान होता है, असल समस्या का पता नहीं . . .!

इस पोस्ट को देखकर लोगों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्मा गया है। लोगों का कहना है कि राज्य शासन के द्वारा सुबह 09 बजे से शाम 04 बजे तक चिकित्सकों को अस्पताल में मुस्तैद रहने के निर्देश दिये जाने के बाद भी अस्पताल प्रशासन को चिकित्सकों पर नियंत्रण नहीं रह गया है।

इधर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि न तो सीएमएचओ और न ही सीएस के द्वारा अस्पताल की व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे इस समय अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं न्यूनतम स्तर पर जा पहुँची हैं।

सूत्रों का कहना था कि जिला अस्पताल सीसीटीवी कैमरों की जद में है। अधिकारी अगर चाहें तो किसी भी दिन सुबह 09 बजे से शाम 04 बजे तक चिकित्सकों की उपस्थिति, एक-एक चिकित्सक के द्वारा कितने कितने मरीज़ों का परीक्षण किया गया! कितने मरीज़ों की जाँच अस्पताल में करवायीं गयीं, कितनों की जाँच बाहर से करवाने के लिये भेजा गया! इन सारी बातों पर ही अगर गौर कर लिया जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है।