बारिश की अनिश्चितता से किसानों की पेशानी पर चिंता की लकीरें उभरीं

 

अतिवृष्टि ने बिगाड़ी धान की रंगत, 20 फीसदी तक उत्पादन पर असर

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। इस वर्ष मॉनसून के शुरूआती दिनों में कम बारिश के बाद, अक्टूबर तक अतिवृष्टि ने धान की फसल की रंगत बिगाड़ के रख दी है।

हालात ये हैं कि धान की फसल में बालें तो आयी हैं लेकिन उनके अंदर दानें नहीं बन पाये हैं। यही नहीं बल्कि जिन किसानों की फसल में दाने बने भी हैं तो ज्यादा बारिश के कारण वे काले पड़ गये हैं। इससे इस साल धान की फसल का उत्पादन 20 फीसदी तक कम होने का अनुमान किसान लगा रहे हैं।

कर्ज में डूबे किसानों की बढ़ी चिंता :  इस वर्ष सितंबर माह तक किसानों को धान की फसल अच्छी होने की उम्मीद थी। इन उम्मीदों पर अक्टूबर के अंत तक हुई तेज बारिश ने पानी फेर दिया है। अरी के किसान भागचंद पारधी, मनसुख, सुरेश, पोहूलाल आदि ने बताया है कि उन्होंने सोसायटी व बाज़ार से कर्ज लेकर महंगे दामों पर खाद-बीज खरीदा था। कड़ी मेहनत करके, फसल लगायी थी लेकिन ज्यादा बारिश के कारण फसल नुकसानी से लग रहा है कि लागत भी नहीं निकल पायेगी। ऐसे में कर्ज और अधिक बढ़ सकता है।

किसानों ने बताया है कि बारिश से फसल तो बर्बाद हुई ही है, जो फसल शेष बची है उसे काटने के लिये मजदूर नहीं मिल रहे हैं। महानगरों में ज्यादा मजदूरी मिलने के कारण गाँव के अधिकांश मजदूर चले गये हैं। इस स्थिति में गाँव में कुछ ही बचे मजदूर महंगी दर पर फसल काटने के लिये तैयार हो रहे हैं। इससे अनावश्यक आर्थिक भार बढ़ रहा है। कुछ किसानों ने बताया कि जिन किसानों ने फसल कटवाकर खलिहान में रखी है उन्हें बेमौसम बारिश से धान गीली होने का भय सता रहा है।

किसानों ने बताया कि बारिश की मार से धान काली पड़ने के साथ दाना भी छोटा हो गया है। समर्थन मूल्य में खरीदी केंद्रों में इस तरह की धान को रिजेक्ट किया जा सकता है, इसके कारण उन्हें और अधिक नुकसानी का सामना करना पड़ सकता है। किसानों ने प्रशासन से अतिवृष्टि से धान की फसल में हुए नुकसान का सर्वे कराकर मुआवज़ा दिलाये जाने की माँग की है।