खेत की जीपीएस लोकेशन से दर्ज होगी फसल

 

 

 

 

उत्पादन के सही आंकड़े मिलेंगे

(ब्यूरो कार्यालय)

जबलपुर (साई)। किसान ने खेत में किस फसल की बोवनी की है और कौन सी फसल वह समर्थन मूल्य पर पंजीयन कराने के बाद बेचेगा।

इस बात का सर्वे अभी तक कागजों में होता आया है। लेकिन अब कागजों का फर्जीवाड़ा काम नहीं आएगा। क्योंकि मोबाईल एप को खेत पर ले जाकर फसल व रकबे की जानकारी दर्ज की जाएगी। खेत में पहुंचने के बाद जीपीएस रीडिंग करना होगी। इस रीडिंग के बाद ही आगे की जानकारी को दर्ज किया जा सकता है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने एक बीमा एजेंसी की जगह अब दर्जनों एजेंसियों को तैनात किया है। जिन्हें अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पहले एक एजेंसी होने के कारण सही आंकड़ों का मिलान नहीं हो पाता था।

अमले का जाना जरूरी : हर खेत पर जाकर राजस्व व कृषि विभाग के मैदानी अमले को मोबाईल एप की मदद से फसल, रकबा, किसान का नाम, मोबाइल नंबर आदि जानकारी दर्ज करनी होगी। इस एप में तीन चरणों में जानकारी को दर्ज किया जाएगा। यदि कोई एक जानकारी भी बिना खेत में जाए दर्ज करने की कोशिश होगी तब उस किसान का पंजीयन व सर्वे मान्य नहीं होगा। हालांकि शासन स्तर पर एक साल पहले ही गिरदावरी के लिए भी मोबाईल एप का उपयोग किया गया था। लेकिन इस बार जीपीएस रीडिंग का नया सिस्टम भी इसमें जोड़ दिया गया है।

इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे का मकसद फर्जी तरीके से फसल बेचने वालों को रोकना और वास्तविक किसानों की पहचान करना है। पिछले कुछ साल में प्रदेश के कई जिलों में इस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें व्यापारियों ने किसान बनकर या मैदानी अमले की मिलीभगत से गलत लोगों के नाम पंजीयन कराए थे। करोड़ों रुपए का चूना शासन को लग चुका है।