रैगिंग के मामले में मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर

 

 

 

 

यूजीसी ने जताई चिंता

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) समेत देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में रैगिंग की घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है। इसे लेकर चिंतित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission) ने प्रदेश सरकारों से मदद मांगी है।

इसके लिए आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और उच्च शिक्षा सचिवों को पत्र लिखकर रैगिंग मुक्त राज्य बनाने के लिए कहा है। साथ ही नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश की है। आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक रैगिंग की घटनाओं के मामले में मध्य प्रदेश देशभर में तीसरे स्थान (Ragging Case in Madhya Pradesh) पर है। जबकि उत्तर प्रदेश पहले और पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान पर है। अब तक रैगिंग की घटनाओं को लेकर सिर्फ उच्च शिक्षण संस्थानों पर ही जवाबदेही आती थी, ऐसे में अब राज्य सरकार भी इनमें शामिल होंगी। इससे सरकार रैगिंग की घटनाओं को गंभीरता से लेकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगी। इस साल उत्तर प्रदेश के शिक्षण संस्थानों से 1148, पश्चिम बंगाल से 781 और मध्य प्रदेश से 717 रैगिंग की घटनाओं की शिकायत मिली है।

मैनिट में नहीं मिल रहे शिकायतकर्ता : मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(MANIT Bhopal) में पिछले सप्ताह यूजीसी की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन(Anti Ragging Helpline) को मिली शिकायत के मामले में एंटी रैगिंग कमेटी अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर सकी है। इसकी वजह है कमेटी को अब तक शिकायतकर्ता छात्रों के नाम ही नहीं मिले हैं। शिकायत में भी छात्रों ने अपने नाम का खुलासा नहीं किया था। इसके बाद कमेटी ने हॉस्टलों के वार्डन के जरिए छात्रों की तलाश शुरू की थी। इसके बाद सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी छात्रों को तलाशा था लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। गौरतलब है कि हेल्पलाइन पोर्टल को शिकायत मिली थी कि मैनिट में उनके सीनियर छात्र उनसे शराब के पैग बनवाते हैं और अश्लील गाने सुनाने के लिए कहते हैं। ऐसा नहीं करने पर वे मारपीट करते हैं।