वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बिना धुल रहे वाहन!

 

जल स्त्रोतों को प्रदूषित कर रहा कीट ऑईल!

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। शहर भर में चल रहे ऑटो मोबाईल सर्विस स्टेशन एवं वर्कशॉप बिना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के ही संचालित हो रहे हैं।

शहर में शायद ही किसी के पास इन्फ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) हो, इसके चलते रोज़ाना वाहनों की सर्विसिंग व धुलायी के बाद निकलने वाला हज़ारों लीटर पेट्रोल, डीज़ल व ऑईल युक्त जहरीला पानी सीधे नालों के जरिये या तो बैनगंगा नदी के जल में मिल रहा है या फिर तालाबों अथवा अन्य जल स्त्रोतों में इसके कारण भू जल दूषित होने का खतरा बढ़ा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित नगर पालिका का ध्यान इस ओर नहीं दिख रहा है।

प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि शहर में चल रहे इन सेंटर्स के पास ईटीपी होना चाहिये ताकि वाहनों की सर्विंसिंग व धुलायी से निकलने वाले पानी को प्रोसिस करने के बाद नालों में छोड़ा जाये। सेंटर मालिक ऐसा न कर, जहरीले पानी को सीधे नालों में छोड़ रहे हैं। पानी नालों के जरिये यह जहरीला पानी या तो तालाबों में जा रहा है या फिर बैनगंगा के जल में जाकर मिल रहा है।

इस तरह का जहरीला पानी अन्य प्राकृतिक जल स्त्रोतों में मिलकर उन्हें नुकसान पहुँचा रहे हैं। भू-गर्भ विशेषज्ञों की मानें तो पेट्रोल, डीज़ल व ऑईल युक्त पानी में कई हानिकारक तत्व होते हैं। इसके अलावा वाहनों की धुलायी में भी कई तरह के रसायनों का उपयोग किया जाता है। इस कारण यह पानी स्वास्थ्य के लिये जहरीला हो जाता है। जहरीले पानी के सीधे प्राकृतिक जल स्त्रोतों के संपर्क में आने के कारण कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बढ़ा है।