फोरलेन पर दुर्घटनाओं में बढ़ौत्तरी!

 

(शरद खरे)

लगभग चार सौ साल पुरानी सड़क को 2010 में फोरलेन में तब्दील किया गया है। कहा जाता है कि मुगल शासक शेरशाह सूरी के जमाने में व्यापार के उद्देश्य से इस सड़क को बनवाया गया था। बीसवीं शताब्दी के अंत तक यह सड़क प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभाग के द्वारा संधारित की जाती थी। इक्कसवीं सदी में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के कार्यकाल में स्वर्णिम चतुर्भुज का निर्माण कराया गया उसके बाद इसके एक अंग उत्तर दक्षिण गलियारे में इस सड़क के कुछ हिस्से का समावेश किया गया। यह सौभाग्य था कि सिवनी जिले से होकर गुज़रने वाला हिस्सा इसका अंग बना।

2010 में इस सड़क के निर्माण के साथ ही इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंप दिया गया। निविदा की शर्तों के हिसाब से जिस ठेकेदार कंपनी के द्वारा इसका निर्माण करवाया गया था उस कंपनी को ही कुछ वर्षाें तक इसका संधारण भी करना था। इस दौरान नरसिंहपुर जिले की सीमा से सिवनी जिला मुख्यालय तक एमपी टू सेक्शन की देखरेख मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन तो सिवनी से खवासा तक एमपी थ्री सेक्शन तक की सड़क का संधारण सद्भाव इंजीनियरिंग कंपनी को करना था। इस मार्ग में चूँकि वन विभाग की कुछ बाधाएं थीं अतः बाधा हटने के बाद बंजारी घाट का निर्माण हुआ और वर्तमान में कुरई घाट वाले हिस्से का निर्माण कार्य जारी है।

जिला मुख्यालय के नये बायपास पर एनएचएआई को एक ट्रामा केयर यूनिट बनाया जाना प्रस्तावित था, जो अब तक आकार नहीं ले सका है। इस संबंध में एनएचएआई के द्वारा भी आधिकारिक तौर पर किसी तरह का वक्तव्य जारी नहीं किया गया है।

फोरलेन पर एक के बाद एक दुर्घटनाएं घट रहीं हैं। ये दुर्घटनाएं निश्चित तौर पर सड़क निर्माण की खामियों की ओर ही इशारा करती नज़र आती हैं। सड़क निर्माण के दौरान और सड़क बनने के उपरांत एनएचएआई के तकनीकि प्रभाग के द्वारा इसका सूक्ष्म निरीक्षण किया जाता है। दुर्घटनाएं अगर घट रहीं हैं इसका सीधा सा मतलब यह निकाला जा सकता है कि एनएचएआई में अब तक पदस्थ रहे अधिकारियों के द्वारा इसका अधीक्षण (सुपरविज़न) उचित तरीके से नहीं किया गया है। जाहिर है अफसरान से कहीं न कहीं चूक अवश्य हुई है।

दुर्घटनाओं की तादाद को देखते हुए जिले के दोनों सांसद फग्गन ंिसंह कुलस्ते एवं डॉ.ढाल सिंह बिसेन सहित जिला प्रशासन की यह जवाबदेही बनती है कि वे इन दुर्घटनाओं के कारण खोजने के लिये एनएचएआई के अधिकारियों को पाबंद करें। इसके लिये कम से कम आधा दर्ज़न तकनीकि कर्मचारियों (जिनमें वर्तमान में इस खण्ड में पदस्थ अधिकारियों को शामिल न किया जाये) की एक समिति बनवायी जाकर समय सीमा में इसकी तकनीकि जाँच करवायी जाये। तकनीकि जाँच में अगर खामियां मिलती हैं तो जिस भी अधिकारी के कार्यकाल में इस सड़क का निर्माण करवाया गया है उन अधिकारियों सहित सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदारों को दोषी ठहराया जाकर उन्हें दण्डित किया जाये। इसके साथ ही साथ तकनीकि खामियों को तत्काल ही दुरूस्त करवाया जाकर सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के मार्ग प्रशस्त किये जायें।

 

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