मानव अधिकार के नाम पर चल रहीं आधा दर्जन अड़ीबाज संस्थाएं

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग अपने मिलते-जुलते नाम की फर्जी संस्थाओं के कारण खुद परेशान है। राज्य के अनेक जिलों में अब तक आधा दर्जन से अधिक ऐसी संस्थाओं का खुलासा हो चुका है। इन संस्थाओं को चला रहे लोग सरेआम सरकारी एवं निजि संस्थाओं में जाकर लोगों को डरा-धमका कर लूट-खसोट में लिप्त मिले हैं।

ऐसी संस्थाओं पर नकेल कसने के लिए आयोग स्वयं भी रास्ते तलाश रहा है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो पा रही। शासन की ओर से प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजे गए हैं। इसके बावजूद कई शहरों में लोग बड़े-बड़े अक्षरों में वाहनों की नंबर प्लेट पर विभिन्न फर्जी श्मानवाधिकार संगठनों के नाम लिखवाकर घूमते पाए गए हैं।

राज्य के कई शहरों में सक्रिय : राजधानी भोपाल सहित इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, मंडला, छिंदवाड़ा और देवास जैसे शहरों के अलावा मैहर जैसे कस्बे में भी लोग मानव अधिकार नाम वाली संस्था की धौंस दिखाकर अड़ीबाजी कर चुके हैं। हाल ही पकड़ में आई स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन नामक फर्जी संस्था ने तो आयोग का मोनो भी अपने लेटर हेड पर लगाकर जिलों में इंवेस्टीगेटिंग ऑफिसर की नियुक्तियां कर परिचय पत्र बना दिए। छानबीन के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया।

कई संस्थाओं का पंजीयन सही : मिलते-जुलते नाम की इन संस्थाओं की आड़ में कुछ लोगों ने वसूली का धंधा फैला लिया, लेकिन छानबीन के बाद कतिपय मामलों में तकनीकी तौर पर संस्था का पंजीयन सही पाया गया, जिससे उन पर वैधानिक कार्रवाई नहीं हो पाई।

कुछ दिलचस्प घटनाएं : मैहर में भागा गाड़ी वाला-माता शारदा देवी के दर्शन को गए मानव अधिकार आयोग के एक अधिकारी ने वहां जब एक कार की नंबर प्लेट पर श्मानव अधिकार लिखा देखा तो चौंक पड़े। उन्होंने गाड़ी वाले से पूछताछ की तो वह भाग खड़ा हुआ।

इंदौर के जज ने भेजा फोटो : कुछ समय पहले एक न्यायाधीश ने इंदौर के बाजार में एक कार की नंबर प्लेट पर श्जनरल सेक्रेटरी मानव अधिकारश् लिखा देखा तो उन्हे संदेह हुआ। उन्होंने अपने मोबाइल से कार की नंबर प्लेट की फोटो खींचकर मानव अधिकार आयोग के रजिस्ट्रार को भेज दी। जांच के बाद गाड़ी जब्त कर पूछताछ हुई। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का मामला बना और साढ़े चार हजार रुपए चालान वसूलकर गाड़ी छोड़ना पड़ी।

इंदौर में ही एक अन्य वाहन की नंबर प्लेट पर जिलाध्यक्ष मानव अधिकार आयोग लिखा था। जांच के बाद वाहन मालिक शुभम पुत्र चंद्रमणि तिवारी पर ट्रैफिक पुलिस ने केस दर्ज कर साढ़े चार हजार रुपए का चालान बनाया।

छतरपुर जिले स्कूल संचालक से वसूली : एक निजि स्कूल की मान्यता समाप्ति के नाम पर कुछ लोग मानव अधिकार जैसे नाम की संस्था की धौंस दिखाकर वसूली करके चले गए।

छिंदवाड़ा : पैसे लेकर फर्जी मानव अधिकार संस्था की सदयस्ता के परिचय पत्र बनाकर बांट दिए गए। एक व्यक्ति को कार्ड नहीं मिला तो वह पता पूछते हुए वह भोपाल में आयोग के पर्यावास स्थित कार्यालय में पहुंच गया। तब जाकर आयोग को इस फर्जीवाड़े का पता चला। छिंदवाड़ा पुलिस ने धारा 420, 468 और 467 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

फर्जी संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई के निर्देश : मानव अधिकार आयोग से मिलते-जुलते नाम की संस्थाओं और नाम के दुरुपयोग, अड़ीबाजी की शिकायतें मिली हैं। ऐसी संस्थाओं के बारे में शासन को कार्रवाई के लिए लिखा गया है। शासन ने सभी जिला कले्क्टरों और पुलिस अधीक्षकों को सख्त कार्रवाई के निर्देश भेजे हैं। आयोग की ओर से भी अपील की गई है कि ऐसी फर्जी संस्थाओं की सूचनाएं आयोग तक पहुंचाएं। जस्टिस एनके जैन, अध्यक्ष, मानव अधिकार आयोग मप्र

ये हैं मिलते-जुलते नाम की संस्थाएं : स्टेट ह्यूमन राइट कमीशन, मानव अधिकार संगठन, मानव अधिकार संरक्षण, राष्ट्रीय मानव अधिकार संस्था, मानव अधिकार परिषद, मानव अधिकार काउंसिल, मानव अधिकार संरक्षण संस्थान आदि।

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