प्राईमरी स्कूल के बरामदे में संचालित हो रहीं हायर सेकेण्डरी की कक्षाएं!

 

 

एक हाई स्कूल जब प्राईमरी स्कूल के बरामदे में संचालित हो रहा हो तो ऐसी शाला में शिक्षा के स्तर का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। यह स्थिति कहीं और नहीं बल्कि छपारा ब्लॉक के ग्राम जोगीवाड़ा में देखी जा सकती है। शिक्षा के मंदिर में व्याप्त इस तरह की अव्यवस्थाओं को लेकर ही मेरी शिकायत है।

यहाँ लगभग दो वर्ष पूर्व मिडिल स्कूल का उन्नयन करके उसे हाई स्कूल बनाया गया था लेकिन एक हाई स्कूल में जो बुनियादी सुविधाएं होना चाहिये वे तमाम सुविधाएं यहाँ से नदारद हैं। प्राईमरी स्कूल के बरामदे में ही हायर सेकेण्डरी की कक्षाएं संचालित की जा रहीं हैं जहाँ विद्यार्थियों के लिये फर्नीचर तक उपलब्ध नहीं करवाये गये हैं।

इस शाला में विधायक निधि से एक भवन अवश्य तैयार करवाया जा चुका है लेकिन उस भवन को किस उद्देश्य से बनवाया गया है इसके बारे मेें कोई नहीं जानता है। इसका कारण यही है कि उक्त भवन में हमेशा ही ताला जड़ा हुआ देखा जाता है। यदि इस भवन को ही विद्यार्थियों के लिये खुलवा दिया जाये तो उन्हें काफी हद तक राहत मिल सकती है और उनका ध्यान भी एकाग्र होकर पढ़ायी में लग सकेगा।

ठण्ड के इन दिनों में बरामदे में संचालित होने वाली कक्षाओं के विद्यार्थियों को ठण्डी हवाओं से दो-चार होना पड़ता है। यह तो गनीमत है कि अभी कड़ाके की ठण्ड का दौर आरंभ नहीं हुआ है लेकिन शीघ्र ही इसके आरंभ होने की उम्मीद है तब विद्यार्थियों की परेशानियां बेतहाशा बढ़ जायेंगी लेकिन इस ओर किसी भी जिम्मेदार का ध्यान नहीं जा रहा है।

शाला के शौचालय भी इस स्थिति को प्राप्त हो चुके हैं कि उनका उपयोग करने में विद्यार्थी हिचकते ही हैं। गंदगी से अटे पड़े शौचालय यह साबित करने के लिये पर्याप्त माने जा सकते हैं कि यहाँ विद्यार्थियों का कितना ध्यान रखा जाता है। छात्राओं के समक्ष सबसे ज्यादा परेशानी है जिन्हें प्रसाधन के लिये बाहर की ओर रूख करना पड़ता है। ऐसा भी नहीं है कि इस स्थिति की जानकारी अधिकारियों को नहीं है लेकिन उनके द्वारा विद्यार्थियों के हित में अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

शिक्षकों का टोटा भी इस शाला में बना हुआ है। अतिथि शिक्षकों के भरोसे ही यह स्कूल चल रहा है। शिक्षा विभाग के साथ ही साथ जिला प्रशासन से भी अपेक्षा है कि उनके द्वारा शीघ्र ही जोगीवाड़ा के इस हाई स्कूल की तरफ ध्यान दिया जाकर, यहाँ की व्यवस्थाओं को सुधारा जायेगा ताकि विद्यार्थी एकाग्रचित होकर अध्ययन कर सकें।

एक ग्रामीण अभिभावक

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