आवश्यकता है नये सिवनी को बसाने की!

 

(शरद खरे)

सिवनी शहर के अंदर अब विस्तारीकरण की गुजाईश कम ही रह गयी है। दशकों से किसी ने भी इस बारे में विचार नहीं किया है कि सिवनी शहर की बढ़ती आबादी के हिसाब से इसे वर्तमान बसाहट के अलावा और कहाँ बढ़ाया जा सकता है। शहर के अंदर रिक्त पड़े भूखण्डों पर ही कॉलोनियां काट दी गयी हैं। डेढ़ दो दशकों में अस्तित्व में आयीं कॉलोनियों में न तो करीने की सड़कें हैं न ही नालियां। जिसका जहाँ मन हुआ वहाँ निर्माण कर दिया गया है।

शहर के विस्तारीकरण के बारे में सोचने की सुध किसी को नहीं दिख रही है। देखा जाये तो शहर को करीने से विस्तारित करने की आवश्यकता है। शहर में अब दो मुख्य बाज़ार बन चुके हैं। एक है बुधवारी तो दूसरा है बारापत्थर। इसके अलावा बाज़ार की गुंजाईश कई स्थानों पर है किन्तु ठोस पहल के अभाव के कारण बाज़ार भी दो ही स्थानों पर सिमटते जा रहे हैं।

लगभग तीन दशकों पहले तक सिवनी शहर की अघोषित सीमाओं में मिशन स्कूल, बरघाट नाका, कटंगी नाका, छिंदवाड़ा चौराहा और भैरोगंज शामिल थे। कालांतर में बारापत्थर की ओर विकास की किरण प्रस्फुटित हुई। बारापत्थर में भी अब जितनी कॉलोनियां बननी थीं, बन चुकी हैं। इसके अलावा ज्यारत नाका से लूघरवाड़ा के बीच काफी मात्रा में रिक्त भूखण्ड होने से यहाँ बसाहट की उम्मीद कम ही दिखती है। वहीं एसपी बंग्ला के आसपास भी अब बसाहट पर्याप्त मात्रा में हो चुकी है।

इधर, बरघाट नाका से डूण्डा सिवनी के बीच भी बहुत बड़ा रकबा खाली पड़ा है, जिससे बरघाट नाके के आगे बसाहट में अभी समय लग सकता है। कटंगी नाके की ओर श्मशान घाट के बाद बसाहट है तो पर यह बसाहट झुग्गी बस्तियों की है। यहाँ कॉलोनियों के विकसित होने की संभावनाएं ज्यादा नज़र नहीं आती हैं। पॉलीटेक्निक कॉलेज़ के बाद एक और रिक्त पड़ा औद्योगिक क्षेत्र है तो दूसरी ओर बींझावाड़ा तक खाली पड़ी भूमि या खेत ही नज़र आते हैं।

इधर, भैरोगंज से लेकर छिंदवाड़ा रोड और नागपुर रोड के बीच रिक्त पड़े खेतों में अवश्य ही विकास की गुंजाईश प्रतीत होती है। अगर नये बायपास से देखा जाये तो परतापुर रोड से लेकर नागपुर रोड तक काफी बड़ा रकबा रिक्त दिखायी दे जाता है। इस क्षेत्र को अगर पालिका के द्वारा विकसित किया जाये तो सिवनी शहर में नयी बसाहट की उम्मीद की जा सकती है।

राजधानी भोपाल में अगर विधानसभा से खड़े होकर भोपाल का नज़ारा देखा जाये तो राजभवन से दायीं ओर कांक्रीट जंगल ही नज़र आते हैं और राजभवन से बायीं ओर हरियाली साफ दिखायी दे जाती है। जाहिर है नये भोपाल की बसाहट के साथ ही सारी आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया होगा। विशेषकर हरियाली को प्राथमिकता के साथ स्थापित किया गया होगा।

आज संचार क्रांति का युग है। संचार क्रांति में अगर इंटरनेट पर गूगल अर्थ के जरिये सिवनी शहर की सेटेलाईट इमेज को देखा जाये तो नयी बसाहट सिवनी के उत्तर, उत्तर पूर्व में ही अपेक्षाकृत ज्यादा दिखायी पड़ती है। सिवनी में रिक्त पड़ी सरकारी जमीनों पर ही अगर योजनाबद्ध तरीके से प्लांटेशन करवा दिया जाये तो एक दो सालों में सिवनी का नक्शा बदल सकता है।

जिला मुख्यालय में जिसे पुराना बसा हुआ सिवनी कहा जा सकता है उसे अगर देखा जाये तो यह पूरी तरह गसा हुआ (ठसाठस) ही प्रतीत होता है। शहर के अंदर की सड़कें इस तरह की हैं कि अगर कोई दुर्घटना घट जाये तो न तो दमकल ही यहाँ तेजी से पहुँच सकती है न ही 108 एंबुलेंस के बड़े वाहन।

दो दशकों पहले जब स्व.हरवंश सिंह ठाकुर प्रदेश के वन मंत्री थे तब उनके द्वारा सिवनी शहर में पौधों को लगवाया गया था। विडंबना ही कही जायेगी कि देखरेख के अभाव में इनमें से नब्बे फीसदी पौधे दम तोड़ चुके हैं। यहाँ एक बात का जिक्र करना लाज़िमी होगा कि उज्जैन रेलवे स्टेशन पर अगर सुबह या शाम को जाकर देखा जाये तो वहाँ हजारों की तादाद में पक्षी इसलिये कलरव करते दिख जाते हैं क्योंकि रेलवे स्टेशन पर हरियाली सालों से बनी हुई है।

सिवनी में भी मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, स्टेट बैंक कॉलोनी, कंपनी गार्डन, बबरिया तालाब, दल सागर के आसपास, मोती नाला के आसपास, परतापुर आदि क्षेत्रों में सुबह और शाम हजारों की तादाद में पक्षियों की अठखेलियां-कलरव दिखायी और सुनायी दे जाता है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिवनी की आयरन लेडी सुश्री विमला वर्मा के द्वारा सत्तर के दशक के उत्तरार्द्ध में जिला चिकित्सालय को शहर से बाहर स्थापित किये जाने पर उन्हें भी विरोध का सामना करना पड़ा था। आज जिला चिकित्सालय शहर के बाहर नहीं वरन शहर में आसानी से पहुँचने वाला स्थान बन गया है।

शहर की आबादी तेजी से बढ़ रही है। इस लिहाज़ से अब इस बात की अत्यंत आवश्यकता महसूस की जाने लगी है कि शहर के विस्तारीकरण के लिये भी विचार किया जाये। इसके लिये सांसद, विधायक के साथ ही साथ नगर पालिका एवं जिला प्रशासन को भी विचार करना होगा कि जिला मुख्यालय में बसाहट का विस्तारीकरण किस दिशा में किया जाये।

हो सकता है नये स्थानों पर बसाहट से वहाँ जिन लोगों की भूमि हो उन्हें बिना किसी प्रयास के लाभ पहुँचे, पर यह नहीं भूलना चाहिये कि जब रेल की पांतें डालने या सड़क बनाने के लिये ले स्थल का चयन किया जाता है तब भी किसी न किसी को फायदा अवश्य ही होता होगा, इसलिये किसे फायदा होगा, किसे नुकसान होगा, इस बात को ज्यादा तवज्ज़ो न देते हुए इस बात पर विचार किया जाये कि शहर का विस्तारीकरण किस दिशा में किया जाये।

नये सिवनी शहर की कल्पना करना बेमानी नहीं होगा। आने वाले समय में आबादी और बढ़ेगी तब अगर विचार किया गया तो इसके लिये बहुत देर हो जायेगी, इसलिये समय रहते ही यह सोचा जाये कि शहर का विस्तार किस दिशा में किया जाये . . .!