कब होगी पैथॉलॉजी सेंटर्स की जाँच!

 

मरीज़ से ही पूछकर दे रहे गलत रिपोर्ट!

(सादिक खान)

सिवनी (साई)। जिले भर में चल रहे पैथॉलॉजी सेंटर्स की जाँच न होने से यहाँ मनमानी जाँच रिपोर्ट मरीज़ों को दी जा रही है। इसके आधार पर चिकित्सकों के द्वारा भी गलत दिशा में मरीज़ों का उपचार किया जा रहा है।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि सिवनी जिले के पैथॉलॉजी सेंटर्स में करायी जाने वाली जाँचों को अन्य शहरों के चिकित्सकों के द्वारा सिरे से नकार दिया जाता है। नागपुर सहित अन्य शहरों के चिकित्सकों के द्वारा करवायी जाने वाली पैथॉलॉजी की जाँच और सिवनी में करवायी गयी जाँच में जमीन आसमान का अंतर दिखायी दे जाता है।

अनेक मरीज़ों ने यह भी बताया कि पैथॉलॉजी सेंटर में अगर शुगर की जाँच करवायी जाती है तो वहाँ उपस्थित कर्मचारियों के द्वारा मरीज़ से ही पूछा जाता है कि पिछली बार कितनी शुगर आयी थी! इसी आधार पर आगे पीछे अंक लिखकर जाँच कर दे दी जाती है।

यहाँ गौर करने वाली बात यह भी है कि जैसे शुगर की ही जाँच करवायी जाये तो सिवनी में यह बताया जाता है कि मरीज़ के खाली पेट शुगर की रिपोर्ट यदि 90 से 110 के बीच आती है तो ही उसे सामान्य माना जाता है जबकि बाहर दूसरे शहरों में खाली पेट यदि 130 भी शुगर आती है तो उसे सामान्य की ही श्रेणी में रखा जाता है।

इसी तरह खाना खाने के बाद मरीज़ की शुगर के बारे में सिवनी में बताया जाता है कि यह 110 से 140 के बीच आना चाहिये तभी सामान्य मानी जा सकती है लेकिन नागपुर – जबलपुर जैसे अन्य शहरों में इसके बारे में बताया जाता है कि खाना खाने के बाद यदि शुगर 180 भी आती है तो उसे सामान्य की श्रेणी में ही रखा जाता है।

सवाल यह है कि यदि बाहर के शहरों में जहाँ तमाम तरह की सुविधाएं भी हैं तो क्या वहाँ सलाह गलत दी जा रही है या फिर सिवनी में ही लोगों खासकर मरीज़ों के बीच भ्रम फैलाकर पैसे ऐंठने का इसे जरिया बना लिया गया है। स्थिति स्पष्ट न होने के कारण कई तरह के सवाल उठना स्वाभाविक ही है।

आवश्यकता इस बात की है कि वास्तविकता को सामने लाया जाना चाहिये ताकि सिवनी के मरीज़ों का उपचार सिवनी में ही सही तरीके से हो सके। गलत उपचार के कारण मरीज़ों को कई तरह के साईड इफेक्ट का सामना करना पड़ता है जिसे मरीज़ समझ नहीं पाता है और संभव है कि उसके आंतरिक अंग क्षतिग्रस्त होते जा रहे हों।

वास्तव में देखा जाये तो सिवनी के मरीज़ जब बाहर से उपचार करवाकर आते हैं तो उन्हें अपेक्षित लाभ मिलना तुरंत आरंभ हो जाता है लेकिन सिवनी में मरीज़ों को उतना लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में क्या यह मान लिया जाये कि सिवनी में होने वाली पैथॉलॉजी की जाँच एक औपचारिकता मात्र है और यह मरीज़ की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करने के लिये नाकाफी है। बेहतर होगा कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एक एडवाईज़री जारी की जाये जिससे यह स्पष्ट हो सके कि विभिन्न जाँच कराये जाने पर नॉर्मल रिपोर्ट किसे माना जा सकता है!