ऐसे ही नहीं मिली थी रविवार की छुट्टी

 

करना पड़ा था आंदोलन

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सण्डे मतलब छुट्टी का दिन। सालों से हम यही देखते आ रहे हैं पर पहले ऐसा नहीं था। सण्डे का अवकाश घोषित कराने बड़े पापड़ बेलने पड़े थे। यहाँ तक कि अंग्रेजों को आंदोलन करने तक की धमकी दी गयी तब जाकर यह सुविधा हमें मिल सकी।

सातों दिन करते थे काम : देश में अंग्रेजी राज आया तो कई उद्योग भी आरंभ हुए। फैक्ट्रियों में कर्मचारियों को कोई छुट्टी नहीं दी जाती थी, सातों दिन लगातार काम करना पड़ता था। कर्मचारी असंतुष्ट थे, लगातार शारीरिक श्रम के कारण थक जाते थे पर अंग्रेजों का भय ऐसा था कि इस बारे में आवाज नहीं उठा पाते थे।

ऐसे में ज्योतिराव फुले के सत्यशोधक आन्दोलन के एक कार्यकर्त्ता और कर्मचारी नेता नारायण मेघाजी लोखण्डे आगे आये। लोखण्डे ने सप्ताह में एक दिन की छुट्टी देने की माँग की। उन्होंने इसके लिये सन 1881 में अंग्रेजों के सामने बकायदा प्रस्ताव रखा लेकिन इसे खारिज कर दिया गया।

आठ साल किया आंदोलन : इस पर लोखण्डे के नेत्तृत्व में आन्दोलन आरंभ कर दिया गया। यह आंदोलन लंबा चला। लगभग 08 साल बाद सन 1890 में सण्डे की छुट्टी घोषित कर दी गयी। तब से लेकर आज तक सण्डे हमारे लिये अवकाश का मतलब बना हुआ है।