कीचड़ के बीच कैसे लगेगी आस्था की डुबकी!

 

पुण्य सलिला बैनगंगा के तट बुरी तरह पटे हुए हैं कीचड़ से

(फैयाज खान)

छपारा (साई)। मकर संक्रांति के पर्व पर भी ग्राम पंचायत छपारा के उदासीनात्मक रवैये के चलते पुण्य सलिला बैनगंगा तटों पर उचित प्रबंध न किये जाने से बैनगंगा नदी के तट कीचड़ से अटे पड़े हैं। मकर संक्रांति पर 14 एवं 15 जनवरी को स्नान करने आने वाले श्रृद्धालुओं को इससे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ज्ञातव्य है कि इस बार बेहतर बारिश होने के चलते बैनगंगा नदी में पानी लबालब भरा हुआ है। इसके कारण छपारा शहर में बैनगंगा नदी के सभी पाट पानी में डूबे रहे। हाल ही में रवि की फसल के लिये पानी छोड़े जाने के बाद जल स्तर कम होना आरंभ हुआ है।

बारिश के दौरान पानी के साथ बहकर आयी मिट्टी के कारण बैनगंगा के तटों पर मिट्टी और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इस गंदगी को मकर संक्रांति के पूर्व साफ करने की दिशा में भी ग्राम पंचायत के द्वारा किसी तरह की पहल न किया जाना आश्चर्य जनक ही माना जा रहा है।

ग्राम पंचायत की उदासीनता के चलते बैनगंगा के घाटों पर फिसलन की स्थिति बनी हुई है। छपारा शहर के जागरूक नागरिकों के द्वारा इस समस्या को लेकर अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास भी किया गया किन्तु किसी भी अधिकारी से उनका संपर्क नहीं हो पाया।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि मकर संक्रांति पर नदियों में स्नान करने डुबकी लगाने का विशेष महत्व माना जाता है। हर साल हजारों की तादाद में श्रृद्धालु छपारा में बैनगंगा के घाट पर पहुँचकर स्नान, पूजन अर्चन करते हैं। इस बार इन घाटों की साफ सफाई में बरती गयी लापरवाही या यूँ कहा जाये कि सफाई करवायी ही नहीं गयी है के चलते श्रृद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

जागरूक नागरिकों ने बताया कि छपारा में बैनगंगा के घाटों पर कीचड़ और दुर्गंध से लोग परेशान हैं। घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह कीचड़ से अटी पड़ी हैं। घाटों पर मिट्टी के कारण फिसलन भी बहुतायत में है। यहाँ आने वाले अनेक लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं।

नागरिकों ने इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया है कि मकर संक्रांति जैसे पर्व के पहले भी ग्राम पंचायत के द्वारा इस संवेदनशील मामले में किसी तरह के कदम समय रहते क्यों नहीं उठाये गये हैं। लोगों ने जिला प्रशासन के ध्यानाकर्षण की अपेक्षा व्यक्त की है।

 

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