घंसौर के कृषक हैं परेशान!

 

 

घंसौर में स्थित खरीदी केन्द्रों में व्याप्त अनियमितताओं से मुझे शिकायत है जहाँ किसानों को होने वाली परेशानियों से किसी को कोई लेना-देना नहीं दिख रहा है और उन्हें अनावश्यक रूप से हमेशा ही परेशान किया जाता है।

यहाँ के खरीदी केन्द्रों में किसानों को अपनी बारी आने के लिये लंबा इंतजार करना होता है। कई बार तो ये इंतजार एक-एक हफ्ते का हो जाता है उसके बाद भी इस बात की कोई गारंटी नहीं रहती है कि नंबर कब आयेगा। देखने वाली बात यह है कि ज्यादातर किसानों की पहुँच यहाँ पदस्थ लोगों तक नहीं होती है ऐसे में उन्हें कम से कम तीन दिन तो इंतजार करना ही होता है। उसके बाद भी यह निश्चित नहीं रहता है कि अभी कितने दिन और लग जायेंगे उनका नंबर आने में।

अनिश्चितता की इस स्थिति के चलते किसानों को रात भी यहीं रहकर गुजारना होती है। ऐसे में खाने-पीने से लेकर तमाम दैनिक आवश्यकताओं से किसानों को अनावश्यक रूप से दो-चार होना पड़ता है। ठण्ड के इन दिनों में, परेशान किसान को कड़ाके की ठण्ड में ठिठुरते हुए ही अपनी फसल बिकने का इंतजार करना पड़ता है जिससे किसानों में रोष उत्पन्न हो रहा है। स्थिति यहाँ तक है कि किसानों को मजदूर भी उपलब्ध नहीं कराये जाते हैं।

यदि कोई किसान अपने साथ मजदूर लेकर आता भी है तो उसकी फसल की तुलाई में जान बूझकर विलंब किया जाता है। खरीदी केन्द्रों में यह बताने की जहमत तक नहीं उठायी जाती कि किसी किसान को फसल बेचने के लिये और कितना विलंब सहन करना होगा। खरीदी केन्द्र के प्रभारियों की जानकारी में जब यह बात है कि किसान को रात रूकना पड़ सकता है, उसके बाद भी पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं की जाती है। कड़ाके की सर्दी वाली रातें, किसानों को भूखे रहकर गुजारने के बाद दिन भी परेशानियों के बीच ही गुजारना होता है।

जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि उसके द्वारा खरीदी केन्द्रों के प्रभारियों को इस बात के लिये निर्देशित किया जाये कि वहाँ अव्यवस्था न फैले। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिये कि यदि किसी किसान की फसल की खरीदी में विलंब हो रहा है तो उसे कम से कम ये बताया जाये कि आखिर उसे कितना इंतजार करना होगा ताकि इस बीच वह स्वयं के अन्य काम जो रूक जाते हैं उन्हें उस बीच निपटा सके। यदि किसानों को होने वाली परेशानियों की ओर गंभीरता से ध्यान दिया जायेगा तो इससे अव्यवस्था फैलने से रोकने में ही मदद मिलेगी।

अयोध्या प्रसाद