बसों से गायब किराया सूची, घूम रहे काले कांच के वाहन

 

परिवहन विभाग आरटीओ ने फेरीं जिम्मेदारियों से आँखें!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। संवेदनशील हो चुके सिवनी जिले में काले शीशे वाले, मूल वाहन को काटकर बनाये गये वाहन, तेज आवाज वाले साईलेंसर युक्त वाहन, बिना नंबर के वाहन बेखौफ दौड़ रहे हैं और कोतवाली पुलिस, यातायात पुलिस, परिवहन विभाग नीरो के मानिंद चौन की बंसी बजाता नज़र आ रहा है।

सिवनी में जो कुछ हो रहा है उसे देखकर लगता है मानो सरकार के नियम कायदों से इन जिम्मेदार विभागों के अधिकारी कर्मचारियों को ज्यादा लेना देना नहीं रह गया है। सरकारी नियमों की दुहाई देने वाले सरकारी नुमाईंदों की नज़रें इस तरह के वाहनों पर इनायत क्यों नहीं होतीं, यह शोध का ही विषय माना जा रहा है।

किराये पर विवाद : सरकारी सड़क परिवहन निगम जबसे बंद हुआ है उसके बाद से बस में यात्रियों और परिचालकों के बीच आये दिन विवाद होना आम बात हो गयी है। इसका कारण बस संचालकों के द्वारा मनमाना किराया वसूलना ही प्रमुख माना जा रहा है। यात्री बसों में किराया सूची नदारद ही है जिसके चलते, यात्री और परिचालक आपस में उलझते ही नज़र आते हैं।

देखा जाये तो यात्री बस में किराया सूची अंकित होने से यात्रियों को यह भी पता चल सकेगा कि जिस बस में वे सवार हैं वह बस किस-किस स्थान पर रूकेगी। अभी सुपर फास्ट के नाम पर चलने वाले वाहनों को भी पैसेंजर वाहनों के मानिंद जहाँ मन आया वहाँ रोक दिया जा रहा है।

काले कांच : इसी तरह माननीय न्यायालय के निदेर्शों के बाद भी शहर में घूमने वाले चार पहिया वाहनों से काले कांच हटवाने की मुहिम भी टांय – टांय फिस्स हो चुकी है। तत्कालीन नगर निरीक्षक हरिओम शर्मा के द्वारा अपने वाहन के कांच से फिल्म हटा ली गयी थी, इसके बाद से किसी भी नगर निरीक्षक या यातायात निरीक्षक के द्वारा काले शीशे वाले वाहनों से फिल्म हटवाने की कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि काले कांच वाले वाहनों में बाहर से अंदर देखना संभव नहीं होता है। इन परिस्थितियों में इस तरह के वाहनों में अनैतिक गतिविधियों का संचालन भी आसानी से किया जा सकता है।

मॉडीफाईड वाहन : इसी तरह वाहनों के आकार को परिवर्तित (मॉडीफाई) कराने का चलन चल पड़ा है। जानकारों का कहना है कि मॉडीफाईड वाहनों को परिवहन अधिकारी कार्यालय की अनुमति आवश्यक होती है किन्तु, किसी के भी द्वारा इसकी अनुमति नहीं ली जा रही है। इस तरह के वाहन भी बेखौफ ही सड़कों पर घूम रहे हैं।

तेज आवाज के साईलेंसर : बताया जाता है कि शहर भर में तेज आवाज वाले साईलेंसर लगाने का फितूर युवाओं पर सवार है। शान की सवारी समझी जाने वाली बुलट मोटर साईकिल में इंदौरी साईलेंसर जिसमें रेस करने पर पटाखे की आवाज निकलती है के अलावा तेज आवाज वाले साईलेंसर भी रात के सन्नाटे में लोगों के चैन में खलल डालते नज़र आ जाते हैं।

 

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