सटोरियों, जुआरियों का गढ़ बन रहा है छपारा

 

नौ की खाने नहीं देती, बारह की सोने नहीं देती!

(फैयाज खान)

छपारा (साई)। छपारा शहर में बढ़ते अपराधों को देखकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगने आरंभ हो गये हैं। गली मोहल्लों में सट्टे का कारोबार चरम पर है।

सट्टे के ओपन क्लोज के चक्कर में गरीब बुरी तरह पिसता नज़र आ रहा है। नगर में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार सट्टे की जद में अपना परिवार तबाह करने पर तुले हुए हैं। शहर में दो तीन खाईबाज ही जमकर हड़कंप मचाये हुए हैं। पुलिस को आँखें दिखाकर ये सरेआम सट्टा पट्टी लिखवाने का काम करते नज़र आते हैं।

आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि जब भी पुलिस के द्वारा दबिश दी जाती है, इन सटोरियों को पहल से ही खबर मिल जाती है और ये मौके से नौ दो ग्यारह हो जाते हैं। लोगोें का कहना तो यहाँ तक है कि इन सटोरियों का मुखबिर तंत्र पुलिस के मुखबिर तंत्र से कहीं ज्यादा सशक्त है।

बताया जाता है कि छपारा शहर में भीमगढ़ रोड, बस स्टैण्ड परिसर, मुख्य बाज़ार एवं चमारी तिराहा वे स्थल हैं जहाँ सट्टे का कारोबार जमकर चल रहा है। चर्चाएं तो यहाँ तक भी हैं कि इन सटोरियों के द्वारा पुलिस के साथ हाथ मिला लिया गया है। चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाये तो पुलिस को इन सटोरियों के द्वारा हर माह चौथ के रूप में भारी नज़राना भी पेश किया जाता है।

छपारा सहित ग्राम क्षेत्रों मे अपराध बढ़ने का सबसे बड़ा कारण जुआ और सट्टा माना जा रहा है। लोग कर्ज लेकर जुआ सट्टा खेल रहे हैं, कर्ज की चपेट में आने से लोगों का घर बरबाद हो रहा है। कुछ जुआड़ियों व सट्टा खेलने वालों के परिवारों में कलह मची है।

बताया जाता है कि महिलाओं के जेवर बेचने को लेकर भी परिवार की स्थिति नरक बनकर रह गयी है। कुछ लोगों के द्वारा जुआ सट्टा के लिये घर में अपने बच्चों व महिलाओं को प्रताडित किया जा रहा है। इतना ही नहीं युवाओं मे जमकर जुआ के खेल का असर हो रहा है। युवा बेरोजगार कर्ज के तले दब गये हैं जिससे वे शराब आदि का भी सेवन करने लगे हैं। इतना ही नहीं चोरी, लड़ाई – झगडे़ होना आम बात हो गयी है।

गाँव भी चपेट में : छपारा मुख्यालय के साथ ही साथ समीपस्थ ग्राम चमारी खुर्द, झिरी, भीमगढ़, अजनियां जो हाट बाज़ार का केन्द्र बिन्दु हैं यहाँ सट्टे व जुआ का कारोबार जोरों पर चल रहा है। ग्राम के बच्चे बूढे़ व महिलाएं भी सट्टा खेलते हुए सहज ही देखी जा सकतीं हैं। बताया जाता है कि सट्टा खिलाने वाले को कुछ राजनैतिक रसूखदारों व कानून के रक्षकों का संरक्षण प्राप्त है जिन्हें सट्टा लिखने वालों व खाईबाज के द्वारा हर महीने नज़राना पेश कर दिया जाता है।

 

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