खाद की किल्लत से जूझ रहा अन्नदाता

 

सोसायटीज में खाद के लिये चक्कर लगाने पर मजबूर हैं किसान

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। भले ही किसान कल्याण विभाग के अधिकारी जिले में पर्याप्त खाद होने की बात कर रहे हों, पर जमीनी हकीकत इससे उलट ही नज़र आ रही है। जिले भर में किसान खाद के लिये चक्कर लगाते ही दिख रहे हैं। सोसायटीज में खाद न मिलने पर किसानों को खाद बीज व्यापारियों के पास से महंगी दरों पर खाद खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

किसानों की मानें तो जिले भर की सोसायटीज में खाद का संकट बना हुआ है। सोसायटी में खाद न मिल पाने के कारण किसान अपना सारा काम धाम छोड़कर जिला मुख्यालय स्थित विपणन संघ के कार्यालय के चक्कर काटते भी देखे जा रहे हैं। विपणन संघ में भी उन्हें जितनी तादाद में खाद मिल रही है वह ऊँट के मुँह में जीरे के मानिंद ही साबित हो रही है।

किसानों का कहना है कि वर्तमान में फसल जिस हालत में पहुँच गयी है उसके अनुसार अब खाद देने का यह सही समय है, अगर दो चार दिन बाद खेतों में खाद डाली गयी तो तब तक उनकी फसल ही तबाह होने के कगार पर आ जायेगी। खाद के अभाव में फसल की वृद्धि दर पर भी जमकर प्रभाव पड़ सकता है।

इधर, किसान कल्याण विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिले भर की 52 सोसायटीज में से महज़ दो सोसायटी में ही खाद का स्टाक है, शेष 50 स्थानों पर खाद का संकट बना हुआ है। सूत्रों ने यह भी बताया कि आंकड़ों पर अगर गौर किया जाये तो सभी सोसायटीज में पर्याप्त मात्रा में खाद भेजी गयी थी। यक्ष प्रश्न यही बना हुआ है कि अगर खाद भेजी गयी थी तो खाद का संकट कैसे उत्पन्न हो गया!

सूत्रों ने यह भी बताया कि इस बार फसल के हिसाब से 08 हजार मीट्रिक टन खाद की माँग भेजी गयी थी। आंकड़ों के हिसाब से अब तक 14 हजार मीट्रिक टन खाद का वितरण किया जा चुका है और लगभग पाँच हजार मीट्रिक टन खाद की अभी भी आवश्यकता महसूस हो रही है।

सूत्रों ने कहा कि इन आंकड़ों के हिसाब से या तो किसान कल्याण विभाग के द्वारा फसल का आंकलन मौके पर जाने की बजाय कार्यालय मे बैठकर कर दिया गया है या फिर खेती का रकबा देखे बिना ही मनमाने तरीके से खाद की माँग के लिये इंडेंट बनाकर भेज दिया गया होगा।

सूत्रों की मानें तो इस बार हुई बंपर बारिश के बाद सिंचाई की सुविधाओं में इज़ाफा होने के चलते असिंचित रकबों में भी फसल की बुआई की गयी है। इसके साथ ही साथ माचागोरा की नहरों के कारण भी किसानों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल रहा है जिसके चलते फसल शायद ज्यादा रकबे में बो दी गयी होगी।

किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि राजनैतिक दलों के नुमाईंदे चुनाव के आसपास तो किसानों के हिमायती बनने का दावा करते हैं पर जब किसानों को वास्तव में उनकी आवाज हुक्मरानों या नौकरशाहों तक पहुँचाने की आवश्यकता पड़ती है तब सियासतदार मौन हो जाते हैं!

 

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