मील के पत्थरों से यात्री हो रहे भ्रमित!

 

 

सिवनी में लगे उन बोर्डों से मुझे शिकायत है जो विभिन्न शहरों की दूरी को अभी भी पुराने रूप में ही दर्शा रहे हैं। इनमें अंतर भी कई स्थानों पर देखा जा रहा है।

सिवनी शहर के कुछ स्थानों पर जो बोर्ड दूसरे स्थानों की दूरियों को दर्शा रहे हैं वे बोर्ड शहर के बाहर निकलने के बाद मील के पत्थरों से कतई मेल खाते नहीं दिखते हैं। इन बोर्डों पर कुछ किलोमीटर का अंतर होता है तो कई बोर्ड जो दूरी दिखा रहे हैं उन्हें देखकर स्वतः ही संशय होता है कि यह दूरी किस आधार पर दर्शायी गयी है।

मील (वर्तमान में प्रत्येक किलोमीटर की दूरी पर पत्थर लगे हुए हैं) के दो पत्थरों के बीच की दूरी को ही कई स्थानों पर नाप लिया जाये तो इनमें कई बार 100 मीटर तक का अंतर आ जाता है जो कि आश्चर्यजनक ही कहा जायेगा। कई स्थानों पर किलोमीटर को निश्चित हिस्सों में विभाजित करने वाले पत्थर ही गायब हो गये हैं या वे उसी स्थानों पर उखड़े पड़े हैं जिसके कारण वे वाहन के चालकों को दिखायी नहीं देते हैं।

सिवनी में सर्किट हाउस जैसे स्थानों पर भी विभिन्न शहरों की सिवनी से दूरी को दर्शाने वाले बोर्ड लगे हैं जो वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से सही नहीं माने जा सकते हैं। विभिन्न स्थानों पर बायपास का निर्माण कर दिया गया है जिनसे होकर जाना दूरी में स्पष्ट परिवर्तन दर्शाता है। इसलिये आवश्यकता इस बात की है कि विभिन्न स्थानों पर शहरों की दूरियों को किलोमीटर में दर्शाने वाले पुराने बोर्डों पर परिवर्तन करके वर्तमान दूरियों को दर्ज किया जाये ताकि भ्रम की स्थिति न बने।

आशुतोष निगम

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