18 मार्च को हो सकती है सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण मामले की सुनवाई

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। पदोन्नति में आरक्षण मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब 18 मार्च को हो सकती है। पहले 28 जनवरी को सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन दैनिक कार्यसूची में यह विषय शामिल नहीं हो पाया था। उधर, सरकार अब इस मामले का पटाक्षेप चाहती है, इसलिए लगातार सुनवाई करवाकर पदोन्नति का रास्ता निकालने की गुजारिश कर रही है। वहीं, दो साल सेवा अवधि बढ़ाने से रुकी सेवानिवृत्ति का सिलसिला मार्च से शुरू हो जाएगा। पदोन्नति नहीं दे पाने से शिवराज सरकार ने सेवा अवधि दो साल बढ़ाई थी।

सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति मामले की जल्द सुनवाई करवाने और यथास्थिति को स्थगन में तब्दील करने का आवेदन सुप्रीम कोर्ट में लगाया जा रहा है। इसके लिए प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा गया है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में आवेदन लगाया जाएगा। बताया जा रहा है कि सरकार पदोन्नति के नए नियम भी जल्द ला सकती है।

इसमें सभी वर्गों को अपने-अपने पदों पर पदोन्न्ति देने की व्यवस्था बनाई जा रही है। हालांकि, इसको लेकर अभी कर्मचारी संगठनों से चर्चा होना बाकी है। अनौपचारिक चर्चा में कुछ संगठन इससे सहमत नहीं हैं। आरक्षित वर्ग के संगठनों का कहना है कि मेरिट पर मिलने वाली पदोन्नति को इस दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।

इस मुद्दे पर अनारक्षित वर्ग की असहमति है। उधर, बिना पदोन्नति कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति का सिलसिला मार्च से फिर शुरू हो जाएगा। दो साल पहले इसे ही आधार बनाकर शिवराज सरकार ने सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी थी। उम्मीद थी कि इस दौरान सुप्रीम कोर्ट से मामले का निराकरण हो जाएगा, लेकिन अभी भी यह विचाराधीन ही है।

 

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