एसएनसीयू में चीटियां!

(शरद खरे)
इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय की सूरत बदली – बदली नज़र आने लगी है। इसका सारा श्रेय जिलाधिकारी प्रवीण सिंह को ही जाता है, जिनके व्यक्तिगत प्रयासों से यह संभव हो पाया है। कायाकल्प अभियान के तहत जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा ली गयी व्यक्तिगत दिलचस्पी और सक्रियता का ही नतीज़ा है कि जिला अस्पताल में कायाकल्प हो पाया है।
कायाकल्प अभियान के तहत पहली बार किये गये निरीक्षण में आश्चर्य जनक रूप से जिला अस्पताल को प्रदेश में छटवां स्थान मिला। इसके पहले जिला अस्पताल की रैंकिंग काफी पिछड़ी ही नज़र आती थी। सोमवार को संयुक्त संचालक स्तर का दल निरीक्षण करने जिला अस्पताल पहुँचा।
यह बात लगभग सभी स्वास्थ्य कर्मियों को चूँकि पता थी कि जिला अस्पताल का निरीक्षण होने वाला है अतः इस निरीक्षण को औचक तो नहीं ही माना जा सकता है। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन के द्वारा निरीक्षण दल को दिखाने के लिये ही सही, सारी व्यवस्थाओं को अप टू द मार्क नहीं रखा जाना अपने आप में आश्चर्य के विषय के साथ ही साथ अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाये जाने के लिये पर्याप्त मानी जा सकती हैं।
इस निरीक्षण में नवजात बच्चों के लिये बनाये गये गहन चिकित्सा ईकाई कक्ष (एसएनसीयू) के निरीक्षण में जाँच दल को अनेक कमियां मिलीं। नवजातों को जहाँ रखा जाता है वहां चीटियां रेंगती पायीं गयीं। निरीक्षण दल के द्वारा चीटियां कहाँ से आ रहीं हैं इस बारे में पता करने को कहा गया।
इसके अलावा जाँच दल ने यह भी पाया कि एसएनसीयू वार्ड में उपकरणों का स्टाइलाईजेशन अर्थात कीटाणु रहित करने की प्रक्रिया में भी कोताही बरती गयी है। इतना ही नहीं एसएनसीयू वार्ड के प्रभारी ही जाँच दल को गायब मिले। यह वाकई में गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आने लायक मामला है।
नवजात को अगर एसएनसीयू वार्ड में भर्त्ती कराया गया है इसका मतलब ही है कि वह ज्यादा बीमार है। उसे संक्रमण की आशंका ज्यादा होती है। माना जाता है कि नवजात की प्रतिरोध क्षमता (रजिस्टेंस पॉवर) अन्य लोगों की अपेक्षा कम होती है इसलिये उनकी देखरेख की ज्यादा आवश्यकता होती है। इसके बाद भी अगर एसएनसीयू वार्ड में इस तरह की अनियमितताएं प्रकाश में आयीं तो यह गंभीर बात है।
आश्चर्य तो इस बात पर हो रहा है कि इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के जिला प्रमुख अर्थात मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा अब तक इस मामले में एसएनसीयू वार्ड प्रभारी से किसी तरह का जवाब तक तलब नहीं किया गया है। हो सकता है कि इसको पढ़ने के बाद अधिकारी जवाब-तलब कर रस्म अदायगी करने का प्रयास करें।
संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह की प्राथमिकता में जिला अस्पताल लंबे समय से दिख रहा है, इस नाते उनसे उम्मीद की जा सकती है कि वे ही स्वसंज्ञान से इस मामले में उचित कार्यवाही अवश्य करेंगे।

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