अमेजन सीईओ बेजोस से क्यों नहीं मिले मोदी?

 

(प्रभुनाथ शुक्ल) 

भारत में ई-बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी वजह से कुटीर और ट्रेडिशनल बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है। अर्थव्यवस्था में बाजार एक अहम कड़ी है, लेकिन इसका विकेंद्रीकरण हो चला है। यूं कहे तो ग्लोबल दुनिया में पूरा बाजार मुट्ठी में हो गया है। अब भोजन से लेकर जीवन की आद्य और मॉडर्न सुविधाएं आपके बेडरूम में फैली हैं। आपके पास पैसा है तो जोमैटो और स्वीगी जैसे सुविधाएं कुछ मिनटों में आपकी डायनिंग टेबल पर होंगी। शहर तो शहर गाँव की झोपड़ी तक अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडिल जैसी कम्पनियां चाहत, पसंद और सुविधा के अनुसार डिलिवरी कर रहीं हैं। ऑनलाइन बाजार ग्राहक को खुला विकल्प दे रहा है। चॉइस की आजादी है और बाजार से कम कीमत पर सामान और सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह दीगर बात है कि उसमें टिकाऊपन कितना है। भारतीय परंपरागत बाजार में छाई मंदी का यह भी एक बड़ा कारण है, लेकिन ग्लोबल होती दुनिया में ई-बाजार की पैठ तेजी से बढ़ रही है जबकि ट्रेडिशनल बजार डूब रहा है। हालात यह है कि चाइना हमारे बजार पर पूरी पकड़ बना चुका है। चीन से भारत का व्यापार घाटा बढ़ता जा रहा है।

अमेजन सीईओ जेफ बेजोस हाल में भारत के दौरे पर थे। भारतीय व्यापारियों ने उनकी भारत यात्रा का पुरजो विरोध भी किया। वह प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकत करना चाहते थे, लेकिन उन्हें पीएमओ से समय नहीं मिला। क्योंकि सरकार देशी व्यापार संगठनों की नाराजगी नहीं लेना चाहती थीं, क्योंकि अभी दिल्ली में चुनाव हैं, जिसकी वजह से सरकार ने फूंक-फूंक कर कदम रखा है। पीएम से उनकी मुलाकात का मुख्य उद्देश्य था कि वह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाना चाहते थे। वह सात हजार करोड़ के निवेश के साथ 70 हजार करोड़ के भारतीय उत्पादों के निर्यात की घोषणा की थीं। बेजोस ने भारत की खूब प्रसंशा भी की लेकिन बात नहीं बन पाई, क्योंकि छोटे और मझोले कारोबारी ई-बाजार से बेहद खफा हैं। हालांकि, बेजोस की भारत प्रसंशा के पीछे उनका बाजारवाद का फंडा छुपा था। अपनी भारत यात्रा में इसे सफल नहीं कर पाए। इसका उन्हें बेहद मलाल रहेगा।

भारत क्या बेजोस की नीतियों से खफा है, अगर नहीं तो पीएम मोदी से उनकी मुलाकात क्यों नहीं हुई, जबकि भारत अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विदेशी विनिवेश पर अधिक जोर दिया जा रहा है। जब अमेजन भारतीय उत्पादों को दुनिया तक पहुंचना चाहती है तो उसे मौका क्यों नहीं दिया गया। इसकी वजह मानी जा रहीं है कि बेजोस दक्षिणपंथी विचारधारा के खिलाफ हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की नीतियों की अपने अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट में तीखी आलोचना की थी। कश्मीर से धारा – 370 हटाए जाने पर एक शृंखला का भी प्रकाशन किया था। वहीं अमेरिका में पीएम मोदी को गोल कीपर अवॉर्ड दिए जाने पर सवाल भी खड़े किए थे, जिसकी वजह से उन्हें पीएमओ ने मुलाकात का मौका नहीं दिया गया। हालांकि इसकी दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, लेकिन मीडिया में यही कयास लगाए गए हैं। फिलहाल यह सरकार का नीतिगत फौसला है उस कोई सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं। दूसरी वजह यह भी मानी जा रहीं है कि जेफ बेजोस की भारत यात्रा का छोटे व्यापारी विरोध कर रहे थे। दिल्ली में चुनाव हैं उस हालात में मोदी और बेजोस की मुलाकात का यह अनुकूल मौसम नहीं था। सम्भवत इसी वजह से यह मुलाकत नहीं हो पाई।

(साई फीचर्स)

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