विदेशी निवेश से स्कूल कॉलेज़ों में बढ़ेगा दुराचार : अहरवाल

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। केन्द्र सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी पूंजीपतियों को धन लगाने के लिये आमंत्रित किया गया है, जो भारतीय संस्कृति के लिये घातक सिद्ध होगा। जिस प्रकार विदेशों के शैक्षणिक संस्थानों में सरेआम छात्र – छात्राओं के बीच में यौनाचार होता है, उसी प्रकार अब भारत में भी शैक्षणिक संस्थान बर्बाद हो जायेंगे।

इस आशय की बात रविदास शिक्षा मिशन के अध्यक्ष रघुवीर अहरवाल ने व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह विदेशी निवेश से देश के स्कूल कॉलेज़ों में दुराचार बढ़ेगा। इसके साथ ही शिक्षा प्राप्त करना और महंगा हो जायेगा। सरकारी स्कूल कॉलेज़ों के साथ – साथ छोटे प्राइवेट स्कूल कॉलेज़ भी बंद हो जायेंगे।

श्री अहरवाल ने आगे बताया कि विदेशी पूंजीपतियों को भारत में शिक्षा क्षेत्र में निवेश करने के लिये भारत सरकार ने आमंत्रित किया है। ये विदेशी पूंजीपति जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के संचालक हैं, जिनका एक मात्र उद्देश्य धन लगाकर बड़ी मात्रा में शोषण करना होता है, विदेशों में जो शैक्षणिक संस्थान बहुराष्ट्रीय कंपनियां संचालित करती हैं उनमें नैतिकता और चरित्र निर्माण की कोई प्रतिबद्धता नहीं होती, इनमें धन कमाने के लिये पंूजीपति लोग कई प्रकार के आकर्षक यौनाचार को परोसते हैं।

उन्होंने कहा कि देखा तो यहाँ तक गया है कि विदेशों के स्कूल कॉलेज़ों में क्वारी युवतियां गर्भवती होने पर भी कक्षाओं में बेशर्मी के साथ अध्ययन करती हैं। अब भारत में भी इन विदेशी पूंजीपतियों को शिक्षा क्षेत्र में निवेश करने के लिये बुलाया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि ये पूंजीपति जिन स्कूल कॉलेज़ों का संचालन करेंगे उनमें मुक्त यौनाचार होगा, जिससे इन पवित्र शैक्षणिक संस्थान भारतीय संस्कृति को कलंकित करने के केन्द्र बन जायेंगे।

रघुवीर अहरवाल ने आगे कहा कि सरकारी स्कूल कॉलेज़ों के साथ – साथ छोटे प्राइवेट स्कूल कॉलेज़ भी बंद होंगे या इनको विदेशी पूंजीपतियों के हवाले कर दिया जायेगा, जिससे देश में बेरोजगारी बढ़ेगी और इन संस्थानों में कार्य करने वाले कर्मचारी अधिकारी और शिक्षकों का जमकर आर्थिक शोषण होगा।

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