न हैं यातायात के सिपाही और न ही यातायात के सिग्नल हैं चालू!

 

 

सिवनी में इन दिनों यातायात भगवान भरोसे ही संचालित हो रहा है। मुझे इसी संबंध में शिकायत है।

सिवनी की सड़कों के प्रमुख चौराहों पर यातायात के सिपाहियों को सीटी बजाकर यातायात नियंत्रित करते हुए देखे, महीनों क्या वर्षों बीत चुके हैं। इसके बाद यहाँ यातायात के सिग्नल्स लगवाये गये लेकिन वे भी पिछले कई महीनों से बंद ही पड़े हुए हैं। ऐसी परिस्थितियों में क्या यातायात विभाग बता सकता है कि उसके द्वारा किस जादुई टेक्नालॉजी से सिवनी शहर के यातायात को नियंत्रित किया जा रहा है?

सिवनी के चौक चौराहों पर जब-तब होमगार्ड के सिपाहियों की तैनाती अवश्य कर दी जाती है लेकिन उनकी कार्यप्रणाली को देखकर ऐसा लगता है कि वे स्वयं यातायात सम्हालने में दक्ष नहीं हैं और चूँकि उनकी ड्यूटी लगायी गयी है इसलिये वे चौराहों पर एक तरफ खड़े-खड़े अव्यवस्थित यातायात को देखते रहते हैं।

ऐसा लगता है जैसे सिवनी में यातायात को लेकर अधिकारी तो अधिकारी बल्कि जन प्रतिनिधि भी गंभीर नहीं हैं वरना क्या कारण है कि इस संबंध में किसी के भी द्वारा आवाज उठाना अब तक मुनासिब नहीं समझा गया है। सिवनी मेें सड़क दुर्घटनाओं का कारण यदि बड़ा है तो उसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि किसी के भी द्वारा यातायात के नियमों का पालन करना आवश्यक नहीं समझा जा रहा है।

आज यह स्थिति है कि जिसका जहाँ से मन हो रहा है उसके द्वारा वहाँ से अपने वाहन को चलाया जा रहा है। जिले में बाईक पर तीन सवारी चलना आम बात जैसी हो गयी है लेकिन किसी को इस बात की परवाह नहीं है कि ऐसी हरकतों को रोका जाये। सिवनी में जगह-जगह कैमरे लगे हुए हैं लेकिन वाहनों का चालान बनाने में इन कैमरों की मदद भी आज तक नहीं ली गयी है जिसके कारण ये कैमरे अनुपयोगी ही होकर रह गये हैं। यातायात को नियंत्रत करने के लिये संबंधित विभागों से अपेक्षा की जा रही है।

चेतन देशपाण्डे

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