यातायात सिग्नल की पहेली!

 

(शरद खरे)

भाजपा शासित नगर पालिका परिषद का कार्यकाल पूरा होने के बाद अब अधिकारियों पर किसी तरह का सियासी दबाव नहीं है फिर भी पालिका की बेढंगी चाल से शहर के निवासी बुरी तरह आजिज आ चुके हैं। अब तो बतौर प्रशासक जिलाधिकारी प्रवीण सिंह भी पालिका पर काबिज हो चुके हैं।

वर्ष 2014 में राजेश त्रिवेदी के नेत्तृत्व वाली नगर पालिका परिषद के द्वारा सिवनी शहर में छिंदवाड़ा चौराहा, कचहरी चौराहा, सर्किट हाऊस चौराहा एवं बाहूबली चौराहा पर यातायात सिग्नल्स की संस्थापना करवायी गयी थी। इसके बाद से इनमें से अधिकांश ठूंठ के मानिंद ही खड़े दिख रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर इन्हें सुचारू रूप से आरंभ नहीं करना था तो इनकी संस्थापना में लाखों रुपये फूंकने की क्या आवश्यकता थी?

शहर के यातायात के सुचारू संचालन के लिये नगर पालिका के द्वारा शायद ही कभी यातायात को दुरूस्त करने के लिये जिम्मेदार परिवहन विभाग या यातायात पुलिस के साथ बैठकर सुझाव लिये गये हों। पालिका के अधिकारियों का जहाँ मन आया वहाँ, उनके द्वारा सड़क के बीच जितनी चाहे उतनी चौड़ाई के डिवाईडर खड़े कर दिये गये तो जहाँ मन आया वहाँ यातायात के सिग्नल खड़े कर दिये गये।

नगर पालिका आखिर चाहती क्या है, यह बात नागरिकों की समझ से परे है! काँग्रेस और भाजपा के सियासी नुमाईंदों को भी इस बात से सरोकार नहीं है कि पालिका के द्वारा लगभग तीस लाख रुपये खर्च कर लगभग पाँच साल पहले लगाये गये यातायात सिग्नल अभी तक शोभा की सुपारी जैसे ही क्यों बने हुए हैं? सीएम हेल्प लाइन में शिकायत करने पर तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी किशन सिंह ठाकुर के द्वारा भी इस मामले में मनमाने और मनगढ़ंत जवाब भिजवाये जाकर शिकायतो को बंद करवा दिया जाता रहा था। यही आलम वर्तमान में भी जारी है। सीएम हेल्प लाइन पर शिकायत करने पर सुधार कार्य कराया जा रहा है का बहाना गढ़ दिया जाता है। ये सिग्नल जब आरंभ ही नहीं कराये गये तो इनका सुधार कैसा!

एक तरफ यातायात पुलिस के द्वारा लोगों को सड़क पर सही तरीके से चलने का पाठ पढ़ाया जाता है और दूसरी ओर शहर के अंदर लगभग आधा दर्जन स्थानों पर ठूंठ के मानिंद खड़े सिग्नल लोगों को मुँह चिढ़ाते ही नज़र आते हैं। यह आलम तब है जब पिछले साल 04 अक्टूबर को सांसद डॉ.ढाल सिंह बिसेन की अध्यक्षता में संपन्न हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी प्रवीण सिंह ने नगर पालिका को दस दिन के अंदर सिग्नल चालू कराने के स्पष्ट निर्देश दिये थे। लगता है पालिका के अधिकारियों को उनका भय भी नहीं रह गया है, वरना क्या कारण है कि इस बैठक के बाद सड़क सुरक्षा समिति की एक और बैठक केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते की अध्यक्षता में संपन्न होने के बाद भी अब तक यातायात सिग्नल आरंभ नहीं हो पाये हैं। वास्तव में यातायात सिग्नल किसी पहेली से कम नहीं दिख रहे हैं।