सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी महाशिवरात्रि

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। देवाधिदेव महादेव की आराधना के पर्व महा शिवरात्रि पर 11 साल बाद शनि और शुक्र मिलकर फिर दुर्लभ संयोग बना रहे हैं। ज्योतिर्विदों के मुताबिक इस दिन शनि अपनी स्व राशि मकर और शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा।

मराही माता स्थित कपीश्वर हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी उपेंद्र महाराज ने बताया शिवरात्रि पर कार्यों में सफलता देने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनेगा। पूजन के लिये और नये कार्यों की शुरुआत करने के लिये ये योग महत्वपूर्ण माना गया है।

उन्होंने बताया कि जब सूर्य कुंभ राशि और चंद्र मकर राशि में होता है, तब फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात शिवरात्रि मनायी जाती है। 21 फरवरी की शाम 0536 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि आरंभ हो जायेगी। शिवरात्रि, रात्रि का पर्व है और 21 फरवरी की रात चतुर्दशी तिथि रहेगी, इसलिये इस साल ये पर्व 21 फरवरी को मनाया जायेगा।

इस दिन सुबह से लेकर दूसरे दिन अलसुबह तक महादेव माता पार्वती का पूजन वंदन श्रद्धलुओं द्वारा किया जायेगा। इस बार महा शिवरात्रि के अवसर पर 59 साल बाद एक विशेष योग बन रहा है जो शिव साधना, सिद्धि समेत शनिदोष शांत करने के लिये श्रेष्ठ रहेगा।

इस योग का नाम शश योग। इस दिन पाँच ग्रहों की राशि पुनरावृत्ति भी होगी। शनि व चंद्र मकर राशि, गुरु धनु राशि, बुध कुंभ राशि तथा शुक्र मीन राशि में रहेंगे। इससे पहले ग्रहों की यह स्थिति और ऐसा योग वर्ष 1961 में रहे थे। इस दौरान दान – पुण्य करने का भी विधान है।

ऐसे करें पूजा : महा शिवरात्रि में कई वर्ष बाद तीन ग्रहों का ऐसा विशेष संयोग आया है। शनि ग्रह अपनी उच्च राशि मकर एवं शुक्र ग्रह भी अपनी उच्च राशि मीन में रहेंगे जबकि, गुरु स्वराशि धनुराशि में हैं। सरसों के तेल से भगवान शिव का अभिषेक करने पर शनि ग्रह की शांति होती है।

इस बार महा शिवरात्रि की शिव आराधना से शनि ग्रह की शांति होगी। वहीं जिनकी कुण्डली में शुक्र कमजोर हैं, ऐसे जातक दूध या दही से भगवान शिव का अभिषेक करेंगे तो शुक्र ग्रह कल्याणकारी होंगे। अलग – अलग प्रकार की मनोकामनाओं के लिये भगवान शिव के अभिषेक के विधान हैं। मिट्टी के बने पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक चाहिये।

हरिद्राभिषेक से आरोग्य लाभ : वर्ष भर में एक दिन महा शिवरात्रि को भगवान शिव का हरिद्राभिषेक का विधान है। इस दिन हल्दी से अभिषेक करने पर भगवान शिव की कृपा से आरोग्य लाभ प्राप्त होता है। महा शिवरात्रि को भोर से ही रुद्राभिषेक एवं पूजन अर्चन प्रारंभ होता है। भक्तजन रात्रि जागरण कर साधना करते हैं।