पंजीयक कार्यालय में भ्रष्टाचार का बोलबाला!

 

बिना लिये दिये नहीं होती रजिस्ट्री पास, दलालों के कब्जे में उप पंजीयक कार्यालय!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। मकान, जमीन, दुकान आदि की खरीद फरोख्त में पंजीयक कार्यालय में दबी जुबान से लेन-देन की चर्चाएं चल रहीं हैं। कहा जाता रहा है कि बिना सुविधा शुल्क के किसी भी पक्षकार का काम नहीं होता है। आलम यह है कि शासन की गाइड लाइन के हिसाब से निर्धारित शुल्क दिये जाने के बाद भी पक्षकारों को अतिरिक्त राशि देना पड़ता है तब जाकर ही उनका काम हो पाता है।

उप पंजीयक कार्यालय में अपना काम करवाने आने वाले पक्षकारों के बीच चल रहीं चर्चाओं को अगर सही मान लिया जाये तो जिन पक्षकारों के द्वारा अधिकारियों को दलालों के माध्यम से सुविधा शुल्क नहीं दिया जाता है उन्हें कभी सर्वर का तो कभी नेटवर्क की समस्या का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है।

चर्चाओं के अनुसार जिनके द्वारा सुविधा शुल्क अदा कर दिया जाता है उनकी फाईलें द्रुत गति से दौड़ने लगती हैं। अगर इसके लिये किसी आवेदक के द्वारा शोर शराबा किया जाता है तो उसकी फाइल में न जाने कितनी तरह की आपत्तियां निकाली जाकर दलाल उन्हें भयाक्रांत करने से भी गुरेज नहीं किया जाता है।

इधर, उप पंजीयक कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पंजीयक और मुद्रांक विभाग को दुधारू गाय माना गया है। इस विभाग में बिना चढ़ौत्तरी के शायद ही कभी किसी के काम हुए हों। इसका कारण यह है कि अधिकारी सीधे – सीधे सुविधा शुल्क की माँग नहीं करते हैं। उनके द्वारा निर्धारित दलालों के जरिये सुविधा शुल्क लिया जाता है।

सूत्रों ने बताया कि उप पंजीयक कार्यालय में उप पंजीयक की टेबल पर एक कागज में दलाल के नाम सांकेतिक अक्षरों में लिखे जाकर उसके द्वारा कितनी रजिस्ट्रियां की गयी हैं इसका इंद्राज उप पंजीयक के द्वारा हरे रंग के पेन से किया जाता है। यह सब कुछ संकेतों में ही लिखा जाता है। इससे किसी को इसका पता ही नहीं चल पाता है कि रोज इस कार्यालय में कितने सुविधा शुल्क का लेन-देन होता है।

सूत्रों ने बताया कि शासन के द्वारा निर्धारित की गयी कीमतों पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क की बजाय दलालों के द्वारा कम स्टाम्प शुल्क अदा कर ज्यादा सुविधा शुल्क दिया जाकर रजिस्ट्रियां करवायी जाती हैं। इन रजिस्ट्रियों को उप पंजीयक के द्वारा कैसे पास कर दिया जाता है, यह भी शोध का ही विषय माना जा सकता है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि उप पंजीयक और जिला पंजीयक कार्यालय में दलालों का जमकर बोलबाला है। इन दलालों के द्वारा उन सर्विस प्रोवाइडर्स जिनके द्वारा पक्षकारों से सुविधा शुल्क वसूलने में आनाकानी की जाती है उन्हें जिला पंजीयक के जरिये प्रताड़ित भी किया जाता है।

सूत्रों ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जिला कलेक्टर कार्यालय के प्रांगण में स्थित जिला पंजीयक और उप पंजीयक कार्यालय में बिना सुविधा शुल्क लिये काम नहीं हो रहे हैं और सांसद – विधायकों सहित चुने हुए प्रतिनिधि मौन धारण किये हुए हैं। सूत्रों ने कहा कि सरकार चाहे काँग्रेस की हो या भाजपा की, इन कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर किसी तरह का अंतर नहीं पड़ता है।

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