जानिये होली दहन के मुहूर्त

 

कब से लगेंगे होलाष्टक

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। भारतीय मुहूर्त विज्ञान एवं ज्योतिष शास्त्र प्रत्येक कार्य के लिये शुभ मुहूर्तों का शोधन कर उसे करने की अनुमति देता है। कोई भी कार्य यदि शुभ मुहूर्त में किया जाता है तो वह उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है।

मुहूर्त विज्ञान में प्रत्येक कार्य की दृष्टि से उसके शुभ समय का निर्धारण किया गया है। गर्भाधान, विवाह, पुंसवन, नामकरण, चूड़ाकरन, विद्यारम्भ, गृह प्रवेश व निर्माण, गृह शान्ति, हवन यज्ञ कर्म, स्नान, तेल मर्दन आदि कार्यों का सही और उपयुक्त समय निश्चित किया गया है। इस प्रकार होलाष्टक को ज्योतिष की दृष्टि में एक होलाष्टक दोष माना जाता है जिसमें विवाह, गर्भाधान, गृह प्रवेश, निर्माण, आदि शुभ कार्य वर्जित हैं।

इस दिन से आरंभ होंगे होलाष्टक : मराही माता स्थित कपीश्वर हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी उपेंद्र महाराज ने बताया कि इस वर्ष विक्रम संवत 2076 और शक संवत 1941 तथा इस वर्ष 2020 का होलाष्टक 03 मार्च फाल्गुन शुक्ल पक्ष, अष्टमी तिथि, मंगलवार को प्रारंभ हो रहा है जो 09 मार्च होलिका दहन के साथ ही समाप्त हो जायेगा अर्थात आठ दिनों का यह होलाष्टक दोष रहेगा जिसमें सभी शुभ कार्य वर्जित हैं। नौ मार्च को गोधूलि वेला में होली दहन होगा। 10 मार्च को ही होला मेला, वसन्तोत्सव, ध्वजारोहण, धूलिवन्दन, धुलण्डी, होलिका विभूति धारण होगा।

उन्होंने बताया कि होलाष्टक के प्रथम दिन अर्थात फाल्गुन शुक्लपक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमीं को सूर्य, दशमीं को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु का उग्र रूप रहता है। इस वजह से इन आठों दिन में मानव मस्तिष्क तमाम विकारों, शंकाओं और दुविधाओं आदि से घिरा रहता है, जिसकी वजह से आरंभ किये गये कार्य के बनने की बजाय बिगड़ने की संभावना ज्यादा रहती है।

विशेष रूप से इस समय विवाह, नये निर्माण एवं नये कार्यों को आरंभ नहीं करना चाहिये, ऐसा ज्योतिष शास्त्र का कथन है। इन दिनों में किये गये कार्यों से कष्ट, अनेक पीड़ाओं की आशंका रहती है तथा विवाह आदि संबंध विच्छेद और कलह का शिकार हो जाते हैं या फिर अकाल मृत्यु का खतरा या बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है।

इस बार होलिका दहन की तारीख नौ मार्च है और रंग 10 मार्च को खेला जायेगा। होलिका दहन को छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। होली का पर्व दो दिन मनाया जाता है। एक दिन होलिका दहन किया जाता है तो दूसरे दिन रंग वाली होली खेली जाती है। इस बार होलिका दहन की तारीख नौ मार्च है और रंग वाली होली 10 मार्च को है। होलिका दहन को छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र अग्नि जलाकर उसमें सभी तरह की बुराई, अहंकार और नकारात्मकता को जलाया जाता है।

होलिका दहन मुहूर्त : होलिका दहन सोमवार नौ मार्च को, गोधूलि बेला में होली दहन करना श्रेष्ठ माना गया है। वैसे होलिका दहन का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 06ः26 से 08ः52 तक रहेगा, जिसकी अवधि 02 घण्टे 26 मिनिट रहेगी।

होलिका दहन प्रदोष के दौरान उदय व्यापिनी पूर्णिमा के साथ रहेगा। पूर्णिमा तिथि 09 मार्च को सुबह 03ः03 बजे प्रारंभ होगी और पूर्णिमा तिथि रात 11ः17 बजे समाप्त होगी। होलिका दहन वाली रात को आध्यात्मिक दृष्टि से भी खास माना जाता है। मान्यता है कि होलिका दहन की रात जप, ध्यान और साधना के लिये अत्यंत शुभ है।

 

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