नाबालिग वाहन चालक

 

(शरद खरे)

सिवनी जिले में कम उम्र के बच्चे दो पहिया वाहन चलाते दिख जाते हैं, यह आम बात है पर अगर पैसेंजर व्हीकल्स को नाबालिगों द्वारा चलाया जाता है तो यह निश्चित तौर पर घोर आपत्ति जनक माना जा सकता है। इसका कारण यह है कि पैसेंजर व्हीकल्स में न जाने कितने लोग सफर करते हैं और उनका जीवन इन नौसिखिये वाहन चालकों के हाथों में होता है। यह वाकई जाँच का विषय है कि अगर ऐसा हो रहा है तो परिवहन विभाग और यातायात पुलिस क्या महज़ चौथ वसूली के काम में ही लगी हुई है।

यह तो सौभाग्य ही माना जायेगा कि अब तक इस तरह के नाबालिगों के द्वारा किसी तरह की गंभीर दुर्घटना को अंजाम नहीं दिया गया है। जाँच का विषय तो यह भी है कि क्या इनके पास परिवहन विभाग के द्वारा दिया जाने वाला वैध लाईसेंस है? अगर नहीं तो ये वाहन कैसे दौड़ा रहे हैं और अगर दौड़ा भी रहे हैं तो लाईसेंस चैक करने वाली एथॉरिटी द्वारा इनके दस्तावेजों का परीक्षण क्यों नहीं किया जा रहा है?

देखा जाये तो परिवहन विभाग हो या यातायात पुलिस, सभी को प्रदेश की ओर से हर साल समन शुल्क जमा करने के लिये निर्धारित लक्ष्य (टारगेट) दिया जाता है। यह लक्ष्य इन्हें एक साल में पूरा करना होता है। दोनों ही विभाग दिसंबर माह के उपरांत ही हरकत में आते हैं और फिर जनवरी, फरवरी एवं मार्च माह में ही अपने लक्ष्य को किसी तरह से पूरा करने पर आमदा हो जाते हैं। जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह स्वयं इस बात की जाँच करवा सकते हैं कि किस माह चालान काटकर कितना राजस्व वसूला गया है तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है, किन्तु जिला कलेक्टर के पास व्यस्तताएं बेहद ज्यादा होती हैं अतः वे इस दिशा में ध्यान शायद न दे पाते हों।

यातायात पुलिस का नज़ला भी शहर के अंदर ही दो पहिया वाहनों पर ही टूटता नज़र आता है। यातायात पुलिस को चार पहिया वाहनों में विसंगतियां शायद दिखायी नहीं देती हैं। वहीं परिवहन विभाग भी इस बारे में सोच नहीं पाता है कि क्या कारण है कि मध्य प्रदेश की मेटेवानी परिवहन जाँच चौकी में वाहनों की लंबी कतारें लगी होती हैं, जबकि महाराष्ट्र के मानेगाँव टेक में परिवहन जाँच चौकी में महज़ एकाध वाहन ही खड़ा दिखता है। जाहिर है जान बूझकर मध्य प्रदेश बॉर्डर पर वाहनों को रोका जाता है (कारण चाहे जो भी हों)।

संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि यातायात पुलिस एवं परिवहन विभाग की संयुक्त बैठक बुलवाकर दोनों ही विभागों को पाबंद किया जाये कि वे सड़कों पर उतरकर भारी वाहनों की चैकिंग करें और अगर नाबालिग वाहन चलाते पाये जायें तो उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करें। इसके साथ ही साथ इस समय ई-उपार्जन के माध्यम से हो रही गेहूँ की ढुलाई में लगे ओव्हरलोड वाहनों पर भी शिकंजा कसा जाये।