बिसार दिया शहीद अंकित कोष्टा का शहीद दिवस

 

(फैयाज खान)

सिवनी (साई)। देश के लिये अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद अंकित कोष्टा को याद करने की फुर्सत न तो प्रशासन को ही मिल पायी, न ही गैर सरकारी संगठनों और सियासी दलों के द्वारा ही इसकी सुध ली गयी।

ज्ञातव्य है कि छपारा नगर के गौरव, देश की सरहद पर अपने प्राण न्यौछावर करने वाले सैनिक अंकित कुमार कोष्टा जिन्होंने 27 फरवरी 2012 को देश की सुरक्षा के लिये ड्यूटी पर तैनात रहते हुए अचानक आये बर्फीले तूफान में दबने से प्राण गंवा दिये थे, की शहादत के आठ साल बीतने के बाद भी उनके नाम पर एक भी चौक चौराहे का नामकरण करने की जहमत अब तक किसी के द्वारा भी नहीं उठायी गयी है।

शहीद अंकित कोष्टा के नगर में रहने वाले चाचा मदन कुमार कोष्टा ने मायूसी और निराशा महसूस करते हुए बताया कि आठ वर्ष पूर्व तकिया मोहल्ला के तिराहा क्षेत्र में चमारी मार्ग पर शहीद के नाम से प्रवेश द्वार बनवाने की घोषणा सिर्फ रस्म अदायगी बनकर रह गयी, इसके बाद इसे किसी ने भी मूर्त रूप देने की कोशिश नहीं की।

उन्होंने कहा कि न तो स्थानीय प्रशासन के द्वारा कोई पूछ परख ली गयी और न ही जिला प्रशासन के द्वारा कोई प्रयास किये गये। ज्ञातव्य है कि 24 वर्ष की अल्प आयु में शहीद हुए अंकित कोष्टा का परिवार 2012 में ही जबलपुर जाकर बस गया था। परिजनों के अनुसार वर्तमान में भी शहीद के परिजनों को सरकारी मदद नहीं मिली है। वहीं परिजनों का कहना है कि शासन प्रशासन से आज तक किसी प्रकार का लाभ नहीं मिलने के कारण खासी नाराज़गी बनी हुई है।

शहीद अंकित कोष्टा के शहीद दिवस पर किसी भी प्रशासनिक अधिकारी, नेता अथवा गैर सरकारी संगठन के द्वारा उन्हें याद न किये जाने की तरह – तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रहीं हैं।