प्लास्टिक निष्पादन की मशीन बनी शोभा की सुपारी

 

प्लास्टिक मुक्ति के लिये पालिका नज़र नहीं आ रही संज़ीदा

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। नगर पालिका के पास संसाधन उपलब्ध होने के बाद भी पालिका के द्वारा शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी पहल नहीं की जा रही है। स्थान – स्थान पर पॉलीथिन की पन्नियां और प्लास्टिक की बॉटल्स बिखरी दिखायी दे जाती हैं। लोग इनसे निज़ात पाने के लिये इसे जलाते भी नज़र आते हैं जिससे वातावरण भी प्रदूषित होता है।

शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने और स्वच्छता के दावों के बावजूद लाखों रुपये की लागत से खरीदी गयी बेलिंग फटका मशीन को नगर पालिका अब तक उपयोग में नहीं ला सकी है। पुराने फिल्टर प्लांट में अपशिष्ट प्रबंधन के नाम पर टिंचिंग ग्राउंड बनाकर बेलिंग फटका मशीन को शोभा बढ़ाने लगा दिया गया है।

इस मशीन में न तो शहर से एकत्रित की गयी प्लास्टिक का पृथकीकरण किया जा रहा है और न ही प्लास्टिक के सही निपटारे के लिये बेलिंग मशीन उपयोग में लायी जा रही है। लगभग तीन वर्ष पहले खरीदी गयी बेलिंग मशीन पुराने फिल्टर ग्राउंड में धूल खा रही है।

बंद मशीनों में भरी हैं शराब की खाली बोतलें : जिस जगह पर नगर पालिका ने बेलिंग फटका मशीन लगायी है वह शराबियों का अड्डा बन गया है। फटका मशीन के निचले हिस्से में शराब की खाली कांच की कई बोतलें भरी हुई हैं। नगर पालिका की स्वच्छता शाखा ने पुराने फिल्टर प्लांट में दिखावें के लिये मशीन तो लगा दी है लेकिन इसे देखकर ऐसा लगता है कि मशीन लगने के बाद इसका उपयोग कभी नहीं किया गया है।

स्वच्छता शाखा के अधिकारी यह कहकर अपनी नाकामी को छुपा रहे हैं कि शहर से निकलने वाले कचरे को कंडीपार की बजाय छिड़िया पलारी में मिलने वाले नये टिंचिंग ग्राउंड में एकत्रित किया जायेगा। इसके बाद नगर पालिका की बेलिंग फटका मशीन को उपयोग में लाया जायेगा।

शहर को स्वच्छ बनाने के लिये नगर पालिका में लगभग 300 स्वच्छता कर्मचारियों की फौज तैनात है। शहर के 24 वार्डों में घूम-घूम कर नगर पालिका के टिप्पर वाहन कचरे को एकत्रित कर टिंचिंग ग्राउंड पहुँचाते हैं। इसके अलावा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में एकत्रित कचरे को उठाने के लिये नगर पालिका ने जेसीबी व डंपर वाहन भी लगा रखे हैं। शहर को स्वच्छ बनाने व कचरे के सही निपटारे के लिये लाखों रुपये प्रत्येक माह स्वच्छता शाखा द्वारा खर्च किये जा रहे हैं इसके बावजूद शहर के ज्यादातर हिस्सों में गंदगी का आलम है। शिकायतों के बावजूद नगर पालिका की स्वच्छता शाखा द्वारा कार्यवाही नहीं की जा रही है।

आम लोगों को स्वच्छता का संदेश देने वाली नगर पालिका ही इस पर अमल करती नहीं दिख रही है। घातक प्लास्टिक का उचित प्रबंधन करने के साथ ही इस पर रोक लगाने की जिम्मेदारी नगर पालिका को सौंपी गयी है लेकिन स्वच्छता शाखा द्वारा बाज़ार में बिकने वाली प्लास्टिक की जप्ती बनाकर कार्यवाही की औपचारिकता निभा दी जाती है।

जप्त की गयी प्लास्टिक का प्रबंधन कैसे और कहाँ किया जा रहा है यह शहर वासियों के लिये शोध का विषय है। शहर से प्रत्येक दिन सैकड़ों टन कचरा एकत्रित किया जाता है। सूखे, गीले कचरे का अलावा प्लास्टिक व संक्रमित कचरे को एकत्रित करने टिप्पर वाहनों में व्यवस्था बनायी गयी है लेकिन इस पर अमल नहीं हो रहा है जबकि शहर वासियों से सफाई के नाम पर टैक्स वसूला जा रहा है।

कंडीपार टिंचिंग ग्राउंड में शहर से प्रत्येक दिन निकलने वाला कचरा बड़ी मात्रा फेका जाता है। वर्षों से यह क्रम चल रहा है। कंडीपार ग्राउंड के नजदीक मेडिकल कॉलेज़ के लिये जमीन आरक्षित कर दी गयी है। इसलिये नगर पालिका को अब कचरा डंप करने के लिये छिड़िया पलारी में नयी जगह उपलब्ध करायी जा रही है।

कचरे का सही प्रबंधन नहीं होने के कारण कंडीपार के कई किलोमीटर के दायरे में प्लास्टिक व अन्य सूखा कचरा हवा के साथ उड़कर फैल चुका है। घातक प्लास्टिक जमीनों को बर्बाद करने के साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर डाल रही हैं।