कौन है कोरोना के लिये नोडल अफसर!

 

 

डॉ.बांद्रे को नोडल अफसर बनाते ही गये अवकाश पर!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। चीन के वुहान प्रांत से निकलकर दुनिया भर में परेशानी का सबब बनने वाले कोरोना वायरस के संबंध में केंद्र और प्रदेश सरकारों के द्वारा विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिये गये हैं। जिला चिकित्सालय सिवनी में डॉ.टी.के. बांद्रे को नोडल अफसर बनाया गया है, पर वे अवकाश पर चले गये हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिले में पदस्थ चिकित्सकों को शासन प्रशासन का भय नहीं रह गया है। चिकित्सकों के अवकाश निरस्त होने के बाद भी चिकित्सक अवकाश पर जा रहे हैं। यह स्थिति तब है जबकि विदेश यात्रा से हाल ही में लौटे तीन परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य की दृष्टि से, हाउस आइसोलेशन में रखा जाकर, उन पर सतत निगरानी रखी जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि कोरोना की जाँच के लिये चिकित्सक का एमडी मेडिसिन होना अनिवार्य है। जिला प्रशासन के निर्देश पर इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय प्रशासन के द्वारा वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.टी.के. बांद्रे को कोरोना के लिये नोडल ऑफिसर बनाने के आदेश जारी किये गये हैं।

सूत्रों की मानें तो लगभग एक सप्ताह से डॉ.बांद्रे के द्वारा अस्पताल प्रशासन से इस बारे में गुजारिश की जा रही है कि उन्हें कोरोना के नोडल अफसर पद से हटा दिया जाये। ऐसा उनके द्वारा क्यों किया जा रहा है इस बात का कारण उनके द्वारा स्पष्ट नहीं किया गया है।

सूत्रों ने आगे कहा कि जब अस्पताल प्रशासन के द्वारा उनकी अनुनय विनय पर ध्यान नहीं दिया गया तो डॉ.बांद्रे के द्वारा अवकाश पर जाने की अर्जी दे दी गयी है। उनके द्वारा स्वास्थ्य आधार पर अवकाश चाहा गया है। सूत्रों ने इस बात के संकेत भी दिये हैं कि अब मेडिकल बोर्ड के द्वारा उनकी अर्जी पर विचार किया जाकर उनका परीक्षण करने के बाद ही अवकाश की पात्रता निर्धारित की जायेगी।

सूत्रों ने यह भी बताया कि जिला अस्पताल में मेडिसिन प्रभाग में स्नातकोत्तर चिकित्सक महज़ दो ही हैं। इसमें से एक अन्य चिकित्सक डॉ.दीपक अग्निहोत्री को स्वाइन फ्लू सहित अन्य गंभीर बीमारियों के लिये नोडल अफसर बनाया गया है। अगर डॉ.बांद्रे अवकाश पर चले गये हैं, तो निश्चित तौर पर अब अन्य जवाबदेहियों के साथ ही साथ उन्हें कोरोना के नोडल अफसर का प्रभार भी सम्हालना पड़ सकता है।

सूत्रों ने कहा कि जिला प्रशासन का ध्यान अस्पताल के भवन को चाक चौबंद करने की ओर ही ज्यादा दिख रहा है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के साथ ही साथ अस्पताल में परीक्षण के समय में चिकित्सक निज़ि चिकित्सा की ओर ध्यान देते नज़र आते हैं। अस्पताल में व्याप्त अराजकताओं की ओर प्रशासन का ध्यान न जाना अपने आप में आश्चर्य जनक ही माना जायेगा।