बसंत और गुलाब का रिश्ता है मजबूत

(के एल बानी)

सभी ऋतुओं में बसंत सबसे सुहावनी ऋतु जानी जाती है। न बहुत ज्यादा गर्मी न ज्यादा ठंड। फूल खिलते हैं गुलाब खिलते हैं। यूं तो बारहों महीने फूल खिलते मुरझाते रहते हैं पर बसंत और गुलाब का मानो चोली-दामन का साथ है। कभी चंडीगढ़ के गुलाब उद्यान में जाइये देखिये गुलाब की किस्में और उनके खिले हुए सौन्दर्य को देख कर ऐसा लगेगा मानो आप अपने अन्दर अपनी आंखों से उसे पी जायें।

सभी ऋतुओं में बसंत सबसे सुहावनी ऋतु जानी जाती है। न बहुत ज्यादा गर्मी न ज्यादा ठंड। फूल खिलते हैं गुलाब खिलते हैं। यूं तो बारहों महीने फूल खिलते मुरझाते रहते हैं पर बसंत और गुलाब का मानो चोली-दामन का साथ है। कभी चंडीगढ़ के गुलाब उद्यान में जाइये देखिये गुलाब की किस्में और उनके खिले हुए सौन्दर्य को देख कर ऐसा लगेगा मानो आप अपने अन्दर अपनी आंखों से उसे पी जायें। प्राकृतिक सौन्दर्य है ही ऐसी चीज। पंडित नेहरू को गुलाब बहुत पसंद थे। रोज उनकी शेरवानी में ताजा गुलाब लगाया जाता था। फूलों का राजा कहा जाता है गुलाब को। प्रकृति में एक से एक खूबसूरत चीजें भगवान ने बनाई है पर गुलाब का तो कहना ही क्या। गुलाब में औषधि के गुण भी है। एक विशेष प्रकार के गुलाब का गुलकन्द बनाया जाता है जो एक दवा भी है और स्वाद भी अनोखा होता है। ग्रीष्मकाल में इसका सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाता है। कहते हैं गुलाब के साथ-साथ कांटे भी रहते हैं इसलिए इसे तोड़ते वक्त कांटों का ख्याल रखना चाहिए। कांटों से बचना चाहिए अपने आपको। यह एक रूप कभी हो सकता है जिसमें एक संदेश भी है कि जहां इच्छा है, सुन्दरता है, सुगन्ध है वहां कुछ बुराई भी है, कुरूपता भी है। हमें उससे अपने आप को बचाना है। मनुष्य जीवन ही ऐसा है पग-पग पर कांटे हैं फूल भी हैं सौन्दर्य भी है। हमें सार को ग्रहण करना है। बाकी सबको बस उससे बचते हुए सौंदर्य का रसपान करें, आनन्द ले पर महक के बहके नहीं। गुलाब को तोड़े नहीं उसका सौन्दर्य पौधों पर ही अच्छा लगता है पर आदमी स्वार्थी होता है। अपनी इच्छा पूर्ति के लिए फूलों को तोड़ता है मसलता है। प्रकृति की इस नायाब चीज पर अत्याचार करता है। पेड़ पौधों में भी जान होती है प्राण होते हैं ऐसा महान वैज्ञानिक जगदीशचन्द्र वसु ने सिद्ध किया है तो फिर उनको तोड?ा-मरोड?, मसलना हिंसा ही हुई न। हम हिंसक न बनें। कोशिश करें कि अहिंसक बने रहें। जियें और सद्भावना बनाये रखेंगे तो प्रतिफल अवश्य मिलेगा। यहां इस हाथ ले उस हाथ दे चलता है। जो करें सोच समझ करें। अपने स्वार्थ के लिए नहीं पर आदमी सब भूल जाता है और भावनाओं में बह जाता है। बाद में सोचता है कि मैंने वह गलत किया पर बाद में सोचने से क्या होता है। समय रहते सतर्क रहें। सावधान रहें। सावधनी बरतें तो हम भी सुखी रहेंगे दूसरों को भी रखेंगे। बस यही गुलाब का संदेश है। बसंत ऋतुओं की रानी और गुलाब फूलों का राजा दोनों का भरपूर उपयोग करें। उपभोग करें पर दुरुपयोग न करें, बस यही मेरा संदेश है।

(साई फीचर्स)

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