नर बाघ ने तोड़ा दम

कमजोर हो चुका था बाघ

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। पेंच टाईगर रिजर्व के कर्माझिरी कोर क्षेत्र में 03 अप्रैल को एक जलाशय के पास एक लगभग दस वर्षीय बाघ निस्तेज अवस्था में पाया गया। बाघ की पहचान टी 21 के रूप में की गई है।

पेंच टाईगर रिजर्व के द्वारा बताया कि इसकी सूचना तत्काल संबंधित स्टॉफ के द्वारा परिक्षेत्र अधिकारी, कर्माझिरी के माध्यम से क्षेत्र संचालक, उप संचालक एवं वन्यप्राणी चिकित्सक को दी गयी। दूरभाष पर ही इस संबंध में परिक्षेत्र अधिकारी कर्माझिरी को लगातार निगरानी करने के निर्देश क्षेत्र संचालक द्वारा दे दिये गये।

मौके पर क्षेत्र संचालक विक्रम सिंह परिहार, उप संचालक एम.बी. सिरसैया एवं वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा ने रेस्क्यू टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर हाथियों से एवं पैदल भी उसे देखा गया। बाघ अत्यधिक कमजोर एवं बीमार दिखा। अधिकाशंतः वह पानी के अंदर ही रहा, बहुत प्रयास करने के बाद ही पानी से बाहर निकला।

उस दौरान दिख रहे लक्षणों के अनुसार बाघ को डार्ट द्वारा दवाई देकर इलाज किया गया। इस कार्यवाही के पूर्ण होने में लगभग 06 घंटे का समय लगा। शाम को एवं रात्रि में भी बाघ की निगरानी की गयी। वह जलाशय के पास ही रहा। अगले दिन 04 अप्रेल को प्रातः सुबह 05 बजे से स्टाफ के द्वारा निगरानी की गयी, किन्तु इन सब प्रयासों के बावजूद बाघ टी 21 ने 04 अप्रेल को सुबह लगभग 8.55 मिनट पर अपने प्राण त्याग दिये।

इसके उपरांत तत्काल ही एन.टी.सी.ए. के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यप्राणी एवं अन्य को सूचना दी गयी तथा एन.टी.सी.ए. के क्षेत्रीय कार्यालय नागपुर के अधिकारी हेमंत कामड़ी की उपस्थिति में एवं क्षेत्र संचालक तथा उप संचालक के समक्ष वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा एवं पशु चिकित्सक डॉ. मृणालनी के द्वारा शव परीक्षण किया गया एवं प्रयोगशाला में अन्वेषण हेतु सेम्पल संरक्षित किये गये। मृत बाघ के सभी अवयव पंजे, नाखुन एवं दांत पूरी तरह से सुरक्षित थे। मृत बाघ के शरीर पर किसी भी तरह के घाव, गोली के निशान, फंदे के निशान आदि नहीं थे। शव परीक्षण उपरांत सभी के समक्ष बाघ को पूरे अवयवों के साथ (संरक्षित सेम्पलों को छोड़कर) दाह संस्कार किया गया।