अक्षय तृतीया पर बन रहे 6 राजयोग

कुंडली में दोष पर भी कर सकते हैं विवाह

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। विवाह के लिए जरूरी गुरु और शुक्र तो अपनी कृपा बरसा रहे हैं लेकिन इन सबके बीच कोरोना राहु-केतु की तरह आक्रमण करने बैठा है।

ऐसे में अक्षय तृतीया जैसे मुहूर्त पर भी लोग विवाह नहीं कर पाएंगे। हालांकि कुछ ऐसे भी हैं जो इसी तिथि में विवाह करना चाहते हैं इसके लिए उन्होंने प्रशासन से अनुमति लेने इस शर्त पर आवेदन कर दिया है कि बिना ताम-झाम के वे 10 स्वजनों की उपस्थिति में ही विवाह करने तैयार हैं।

ज्ञातव्य है कि तृतीया तिथि 25 अप्रैल को सुबह 10.11 बजे से शुरू होकर 26 अप्रैल को सुबह 11.06 बजे रहेगी। ऐसे में रविवार को उदयाकाल से तृतीया तिथि मानी जाएगी। इस दिन रोहिणी नक्षत्र रात 8.40 बजे तक रहेगा। जो विवाह के लिए उत्तम रहेगा।

इसलिए विशेष है यह तिथि : हिंदू पंचांग के मुताबिक वैशाख के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि अक्षय तृतीया कहलाती है। इस तिथि पर किए गए दान-धर्म का अक्षय यानी कभी नाश न होने वाला फल व पुण्य मिलता है। इसलिए यह सनातन धर्म में दान-धर्म का अचूक काल माना गया है। इसे चिरंजीवी तिथि भी कहते हैं, क्योंकि यह तिथि 08 चिरंजीवियों में एक भगवान परशुराम की जन्मतिथि भी है। त्रेतायुग की शुरुआत भी इसी शुभ तिथि से मानी जाती है।

यह संयोग बन रहा : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस अक्षय तृतीया पर सूर्य, चंद्रमा और मंगल अपनी उच्च राशि में रहेंगे। वहीं शुक्र और शनि के स्वराशि में होने से विशेष शुभ संयोग बन रहा है। इसके साथ ही इस बार 6 राजयोग भी बन रहे हैं। विवाह के लिए जिन लोगों के ग्रह-नक्षत्रों का मिलान नहीं होता या मुहूर्त नहीं निकल पाता, सूर्य पूजन (लाल दान), गुरु पूजन (पीला दान) का भी इस शुभ तिथि पर दोष नहीं लगता व निर्विघ्न विवाह होते हैं। साल में यह एक मौका ही होता है जब दोषों का निवारण कर विवाह किया जा सकता है।

टेंट, डेकोरेटर्स और होटल का व्यवसाय ठप्प : शादी-विवाह का मौसम मार्च-अप्रैल से ही शुरू होते है। इससे संबंधित जितने भी व्यवसाय हैं उन्हें साल भर इन्हीं चार महीनों का इंतजार रहता है क्योंकि बाकी समय उनका व्यवसाय लगभग ठप्प रहता है। लेकिन इस बार कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन ने इन व्यवसायियों का व्यापार पूरी तरह ठप्प कर दिया है। टेंट, डेकोरेटर्स, होटल, ब्यूटी पार्लर, आभूषण सहित शादी से जुड़े अन्य कारोबारियों की हालत खराब है क्योंकि अब व्यापार-व्यवसाय के लिए उन्हें फिर एक साल इंतजार करना पड़ सकता है।

ये रहे विवाह महूर्त : अप्रैल माह में अब 25 से 27, मई में 01 से 8, 10, 12, 17, 18, 19, 23, 24, 29, जून में 13 से 15 25 से 30, इसके अलावा जुलाई से अक्टूबर तक मुहूर्त नहीं है। फिर देव सो जाएंगे, देव उठनी ग्यारस के उपरंात नवंबर माह में 26 और 30 एवं दिसंबर में 1, 2, 6, 7, 8, 9, 11 से 15 तक विवाह महूर्त हैं।

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