लिटिल मास्टर्स के बाद अब धोनी रहेंगे लोगों के जेहन में . . .

लिमटी की लालटेन 111

(लिमटी खरे)

भारतीय क्रिकेट टीम में एक से बढ़कर एक खिलाड़ी हुए हैं। हरफनमौला खिलाड़ियों की भरमार रही है। लिटिल मास्टर के नाम से पहचाने जाने वाले सुनील गावस्कर के बाद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेदुलकर को भी कम हाईट के कारण लिटिल मास्टर भी कहा जाता था। भारतीय क्रिकेट टीम में वैसे तो केप्टिन बहुत हुए हैं, पर महेंद्र सिंह धोनी का अब तक का सबसे सफलतम और जुदा हाव भाव, रूप स्वरूप के लिए याद किया जाएगा। जिस धमाकेदार तरीके से उन्होंने भारतीय क्रिकेट में पदार्पण किया था, उसी यादगार तरीके से उनकी बिदाई को भी लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

इसके पहले अधिकांश खिलाड़ी जब अपने कैरियर के चरम पर रहते थे, तब वे खेल को अलविदा कहने में बहुत मुश्किल महसूस करते थे। माही अर्थात महेंद्र सिंह धोनी ने जिस सहजता के साथ क्रिकेट को अलविदा कहा है उस संबंध में यही कहा जा सकता है कि जिस दबंगता के साथ वे क्रीज पर जमे थे, उसी सहजता के साथ उन्होंने बिदाई भी ले ली है। इंस्टाग्राम पर उन्होंने अपने सन्यास की घोषणा की, तो पार्श्व में मैं पल दो पल का शायर हूं गीत बज रहा था, जो कई मायनों में महत्वपूर्ण भी माना जा सकता है।

आज प्रौढ हो रही पीढ़ी को याद होगा जब लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर के लाखों प्रशंसक हुआ करते थे, उसके बाद गावस्कर जैसा नेम और फेम लंबे समय तक किसी को नहीं मिल पाया। इसके उपरांत सचिन तेंदुलकर का पदार्पण हुआ और सचिन तेंदुलकर ने जो मुकाम हासिल किए वहां अब तक कोई नहीं पहुंच पाया है। देश भर में धोनी को सचिन तेंदुलकर जैसी लोकप्रियता मिलना इस बात को रेखांकित करता है कि धोनी का अपना कितना महत्व है। सचिन तेंदुलकर का विश्व कप जीतने का सपना भी महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में ही साकार हो पाया था। महेंद्र सिंह धोनी के द्वारा खेल के दौरान जिस तरह की रणनीतियां अपनाई जाती रहीं हैं, वे लोगों के दिलो दिमाग पर लंबे समय तक जीवित रहेंगी। धोनी का भारतीय क्रिकेट की दिशा और दशा बदलने के लिए भी पहचाना जाएगा।

धोनी ने जब क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा तब भारत में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले, सौरभ गांगुली जैसे दिग्गजों की तूती बोला करती थी। इनके बीच जगह बनाना आसान काम नहीं था। ये चारों भारतीय क्रिकेट की धुरी माने जाते थे और इन्हीं की रणनीति पर ही सब कुछ होता था। इनके अलावा अन्य किसी की बोलने या सलाह देने की हिम्मत तक नहीं हुआ करती थी। धोनी ने यह मिथक भी तोडा है।

माही ने यह भी साबित कर दिया कि छोटे शहरों से भी निकलकर कोई अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर छा सकता है। देश में अनेक युवाओ के लिए वे प्रेरणा से कम नहीं है। धोनी के पहले भारत की क्रिकेट टीम में महज चार पांच शहरों के ही खिलाड़ियों का शुमार होता था। मुंबई, दिल्ली, चेन्नई जैसे महानगरों के अलावा कर्नाटक के खिलाड़ी ही टीम में स्थान पाते थे। धोनी का कैरियर छोटे मंझोले शहरों के खिलाड़ियों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। देखा जाए तो धोनी छोटे शहरों के क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए रोल माडल साबित हुए हैं, जिसके फलस्वरूप भारतीय क्रिकेट अब मेट्रो से निकलकर छोटे शहरों और ग्रामीण परिवेश में भी जा पहुंचा है।

देखा जाए तो धानी ने देश में क्रिकेट की दशा और दिशा दोनों बदली है। इतिहास में यह भी दर्ज हो गया है कि जब धोनी के नेतृतव में भारत ने टी 20 क्रिकेट में फतह हासिल की उसके बाद भी देश में आईपीएल क्रिकेट के लिए उपजाऊ माहौल बना और देश दुनिया के अनेक उभरते खिलाड़ियों को अपना फन दिखाने का अवसर मिला।

सोशल मीडिया पर धोनी के सन्यास लेने को लेकर जमकर हलचल मची हुई है। एक कमेंट यह भी पढ़ने को मिला कि अब अगर आखिरी ओवर में मैच फंसा तो लोग यही कहते नजर आएंगे कि काश धोनी होते तो मैच को निकलकर ले जाते . . .। अब मैदान में लोगों की नजरें महेंद्र सिंह धोनी को खोजती रहेंगी! आने वाले समय में उनकी जगह कौन लेगा यह तो भविष्य के गर्भ में ही है, पर वे जो जगह छोड़ गए हैं, उस रिक्तता को भरने में सालों लग जाएंगे।

आप अपने घरों में रहें, घरों से बाहर न निकलें, घर से निकलते समय मास्क का उपयोग जरूर करें, सोशल डिस्टेंसिंग अर्थात सामाजिक दूरी को बरकरार रखें, शासन, प्रशासन के द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। हम लिमटी की लालटेन का 111वां एपीसोड लेकर जल्द हाजिर होंगे, तब तक के लिए इजाजत दीजिए . . .

(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)

(साई फीचर्स)