22 दिन बाद नैनपुर से बालाघाट आरंभ हो जाएगी सवारी गाड़ी!

भोमा से सिवनी होकर चौरई में लगा दिख रहा ग्रहण!
(लिमटी खरे)
सिवनी (साई)। सिवनी में अमान परिवर्तन के लिए लगाए गए मेगा ब्लाक को पांच साल से ज्यादा समय बीत चुका है, फिर भी जिला मुख्यालय में ब्राडगेज की हलचल तेज नहीं दिख रही है। कटंगी नाके पर बनाए गए अंडर पास भी सवालिया निशान ही लगते दिख रहे हैं, क्योंकि बारिश में यहां पानी भर रहा है।
ज्ञातव्य है कि वर्ष 2015 में 31 अक्टूबर से मेगा ब्लॉक की घोषणा रेल मंत्रालय के द्वारा की गयी थी। इसी साल दीपावली के त्यौहार के चलते इस मेगा ब्लॉक की अवधि 30 नवंबर तक बढ़ा दी गयी थी। वर्ष 2015 में एक दिसंबर के बाद जिला मुख्यालय सहित जिले में रेल का परिचालन बंद कर दिया गया था।

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यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि जिले के घंसौर क्षेत्र में ब्रॉडगेज़ का काम बहुत ही तेजी से किया गया। इसके बाद यह काम घंसौर से नैनपुर तक पूरा हो गया है एवं नैनपुर से बालाघाट के बीच भी काम पूरा होने के उपरांत रेल सेफ्टी कमिश्नर के निरीक्षण के उपरांत यहां रेल के परिचालन की अनुमति प्रदान कर दी गई है।
रेल विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि नैनपुर से सिवनी होकर चौरई तक के रेल खण्ड में नैनपुर से भोमा तक (मण्डला संसदीय क्षेत्र) का काम तो बहुत ही तेज गति से किया जा रहा है किन्तु भोमा से सिवनी (बालाघाट संसदीय क्षेत्र) होकर चौरई तक का काम बहुत ही धीमि गति से किया जा रहा है। वहीं छिंदवाड़ा से चौरई के बीच काम पूरी रफ्तार से चल रहा है।
नैनपुर से बालाघाट के बीच के रेलखण्ड में रेल संचालन की अनुमति मिलने के उपरांत यहां पूर्व प्रधानमत्रंी अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस 25 दिसंबर को यहां नवनिर्मित ब्राडगेज पर मेमू ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। अब जबलपुर से रायपुर, दुर्ग, एवं नागपुर पहुंचने में समय, ईंधन आदि की बचत होगी।
रेल मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला यह सबसे छोड़ा रेलखण्ड होगा। जबलपुर से गोंदिया के जुड़ जाने के बाद अब जबलपुर, नैनपुर, गोंदिया, वल्लारशाह का मार्ग जो अब तक जबलपुर, ईटारसी, नागपुर, वल्लारशाह होकर जाता था, बहुत ही कम दूरी का हो जाएगा और समय तथा ईंधन की भारी बचत होगी।
सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में जबलपुर से ईटासी, नागपुर होकर वल्लारशाह की दूरी 752 किलो मीटर है, जो अब जबलपुर नैनपुर, बालाघाट, गोंदिया होकर वल्लारशाह जाने पर महज 250 किलोमीटर रह जाएगी। इसके बाद उत्तर भारत से दक्षिण भारत में अनेक शहरों की दूरी 250 से 500 किलोमीटर तक कम हो जाएगी।
सूत्रों ने यह भी बताया कि वर्तमान में जबलपुर से इटारसी, बैतूल होकर नागपुर रेलखण्ड की दूरी 543 किलोमीटर है एवं यहां इटारसी से नागपुर तक बहुत ही व्यस्त रेलमार्ग है के बजाए अब जबलपुर से नैनपुर, गोंदिया, भण्डारा नागपुर की दूरी महज 364 किलोमीटर हो जाएगी और इटारसी नागपुर रेखण्ड पर यातायात का दबाव भी कम किया जा सकेगा। इस तरह जबलपुर से नागपुर की दूरी 175 किलोमीटर कम हो जाएगी।
इसके साथ ही साथ जबलपुर से कटनी, शहडोल, बिलासपुर होकर दुर्ग की दूरी 555 किलोमीटर है जो जबलपुर, नैनपुर, गोंदिया, डोंगरगढ़ होकर दुर्ग की दूरी महज 369 अर्थात 186 किलोमीटर कम हो जाएगी। इतना ही नहीं जबलपुर से कटनी, शहडोल, बिलासपुर होकर रायपुर की दूरी 518 किलोमीटर है जो जबलपुर से नैनपुर, गोंदिया, डोंगरगढ़, दुर्ग होकर रायपुर तक 406 अर्थात 112 किलोमीटर कम हो जाएगी।
(क्रमशः जारी)