मप्र वालों को दिल्ली जाने के पहले कराना होगा कोरोना टेस्ट!

नमस्कार, आप सुन रहे हैं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज की समाचार श्रृंखला में बुधवार 24 फरवरी का प्रादेशिक आडियो बुलेटिन.
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कोरोना के बढ़ते मामलों के बाद अब आप मध्यप्रदेश के किसी भी जिले में रहते हों, आपको दिल्ली जाने के लिये पहले अपना कोरोना टेस्ट कराना होगा, तभी आप दिल्ली के अंदर प्रवेश कर पायेंगे। जी हां देश के 05 राज्यों से दिल्ली आने वाले लोगों को राजधानी में प्रवेश के लिये कोरोना टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी। इसमें मध्यप्रदेश सहित महाराष्ट्र, पंजाब, छत्तीसगढ़ और केरल शामिल हैं। इन राज्यों से आने वाले लोगों के लिये 26 फरवरी से 15 मार्च तक के लिये यह नियम लागू किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार से यह नियम लागू होगा और बुधवार शाम तक इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया जा सकता है। महाराष्ट्र, केरल, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से आने वाले लोगों के लिये 26 फरवरी से 15 मार्च तक आरटी-पीसीआर रिपोर्ट दिखाना अनिवार्य होगा।
वहीं इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने भी कहा कि इंदौर में भी महाराष्ट्र जैसा ट्रेंड दिख रहा है, इसलिये जागरूक रहने और भीड़ वाले बड़े आयोजनों से बचने की आवश्यकता है। हालांकि ऐसे कोई भी आदेश नहीं करेंगे, जिससे बिजनेस प्रभावित हो। इस बार भी रंगपंचमी पर मालवा की परंपरा गेर नहीं होगी। अभी से आयोजकों को इस संबंध में सूचना दे रहे हैं।
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काँग्रेस की कमल नाथ सरकार में स्तीफा देकर बीजेपी में आये मुरैना के एंदल सिंह कंसाना की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रहीं। प्रदेश में बीजेपी में शामिल होने के बाद एंदल सिंह मंत्री तो बन गये पर विधानसभा चुनाव हार गये। अब उनके बेटे बंकू के विरूद्ध राजस्थान पुलिस ने फिर से गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। शिवराज सिंह के पूर्व मंत्री और सिंधिया समर्थक बीजेपी नेता एंदल सिंह कंसाना के बेटे बंकू कंसाना को माफिया घोषित करते हुए 2000 का इनाम और गिरफ़्तारी वारंट जारी किया गया है।
धौलपुर पुलिस अधीक्षक ने इस मामले में चंबल पुलिस महानिरीक्षक और मुरैना पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर कार्यवाही की मांग की है। बंकू कंसाना सहित 06 लोगों पर दो हजार का इनाम घोषित किया गया है। अब इस मामले को लेकर काँग्रेस ने हमलावर रुख अख्तियार कर लिया है। प्रदेश काँग्रेस ने ट्वीटर से तंज कसते हुए मुख्यमंत्री से सवाल किया है। काँग्रेस ने वारंट और इनाम की कॉपी भी सोशल मीडिया पर जारी की है।
काँग्रेस ने पूछा है कि मुख्यमंत्री प्रदेश में माफिया के विरूद्ध अभियान चला रहे हैं और उनकी पार्टी के ही नेता के बेटे को पुलिस ने माफिया घोषित करते हुए दो हजार का इनाम घोषित किया है। अब सीएम को बताना चाहिये कि अब इन्हें गाड़ोगे या ये तो घर की बात है?
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जबलपुर में साइबर अपराधी वारदातों को अंजाम देने के लिये नये-नये तरीके अपना रहे हैं। सोशल नेटवर्किंग एकाउंट्स पर अज्ञात आईडी से चाइल्ड पोर्नाेग्राफी का यूआरएल भेजते हैं। यूजर इसे ओपन करते ही अन्जाने में अपराध कर बैठता है। इसकी शिकायत फेसबुक की ओर से स्टेट साइबर सेल को की जाती है। पिछले दो महीने में ऐसी 150 से अधिक शिकायतें स्टेट साइबर सेल पहुँचीं। जांच में खुलासा हुआ कि अज्ञात नंबरों से उन्हें यूआरएल भेजे गये थे।
हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आये, जिनमें साइबर अपराधियों ने वीडियो कॉल कर स्क्रीन रेकॉर्डर के जरिये यूजर का स्क्रीन रेकॉर्ड कर पैसों की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर सोशल नेटवर्किंग एकाउंट पर चाइल्ड पोर्नाेग्राफी के यूआरएल भेजे जाते हैं।
चाइल्ड पोर्नाेग्राफी संज्ञेय और गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यह प्रतिबंधित है। इसमें दस वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। यदि इंस्ट्राग्राम, फेसबुक, मैसेंजर और वॉट्सऐप यूजर ऐसे किसी यूआरएल को ओपन करते हैं, तो एफबी यूजर के नाम, आइपी एड्रेस, उसके मोबाइल नंबर और जीमेल एड्रेस के साथ स्टेट साइबर सेल को शिकायत भेजता है। शिकायत पर यूआरएल खोलने वाले पर एफ.आई.आर. दर्ज की जा सकती है।
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कोरोना की वजह से प्रदेश में लगातार नगर निकाय का चुनाव टल रहा है। सभी नगर निकायों का कार्यकाल एक वर्ष पहले ही समाप्त हो गया है। वहीं, राजनीतिक दल इसकी तैयारी में जुट गये हैं। काँग्रेस और बीजेपी लगातार अपने लोगों को एकजुट करने में लगी हैं। इस बीच संकेत मिले हैं कि मई के बाद एमपी में नगर निकाय का चुनाव संभव है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बुधवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त से इसे लेकर भेंट की है। भेंट के दौरान उन्होंने मांग की है कि मध्यप्रदेश में नगर निकाय चुनाव में वोटिंग ईवीएम नहीं, बैलेट पेपर के जरिये हो। दिग्विजय सिंह के साथ काँग्रेस के कई और नेता उपस्थित थे।
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चौथी बार शिवराज सरकार के कार्यकाल के 10 महीने बीते हैं। इस दौरान सरकार ने अपने मंत्रियों के बंग्ले की सजावट पर खूब खर्च किये हैं। बीते 10 महीने में साढ़े चार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास के बाद सबसे ज्यादा खर्च मंत्री गोपाल भार्गव के बंग्ले पर किया गया है। लोक निर्माण विभाग मंत्री गोपाल भार्गव ने यह जानकारी विधानसभा में दी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार शिवराज सिंह चौहान के आवास पर 81 लाख 52 हजार 790 रुपये बिजली के काम पर खर्च हुए हैं। वहीं, पी.डब्ल्यू.डी. मंत्री गोपाल भार्गव के आवास पर सिविल वर्क किया गया है, इसमें कुल 56 लाख 12 हजार 176 रुपये खर्च हुए हैं। मंत्रियों के बंग्ले पर यह राशि 01 अप्रैल 2020 से 31 जनवरी 2021 के बीच खर्च हुई है। इसके साथ ही सीएम हाउस में सिविल काम पर भी 18 लाख रुपये खर्च हुए हैं।
गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बंग्ले पर 44 लाख 84 हजार 455 रुपये का सिविल वर्क हुआ है। भूपेंद्र सिंह के बंग्ले पर 31 लाख 29 हजार 269 रुपये, प्रभुराम चौधरी के बंग्ले पर 27 लाख 94 हजार 541 रुपये, अरविंद भदौरिया 19 लाख 41 हजार 810 रुपये, गोविंद सिंह राजपूत 18 लाख 75 हजार 175 रुपये और मोहन यादव के आवास पर 14 लाख 36 हजार 538 रुपये का सिविल वर्क हुआ है।
वहीं, मुख्यमंत्री के बाद मंत्री इंदर सिंह परमार के आवास पर 07 लाख 29 हजार 482 रुपये, महेंद्र सिंह सिसोदिया के आवास पर 06 लाख 24 हजार 145 रुपये, प्रद्युमन सिंह तोमर के आवास पर 03 लाख 82 हजार 758 रुपये, ब्रजेंद्र प्रताप सिंह के आवास पर 03 लाख 61 हजार 275 रुपये, हरदीप सिंह डंग के आवास पर 03 लाख 42 हजार 223 रुपये और भूपेंद्र सिंह के आवास पर 03 लाख 31 हजार 482 रुपये बिजली के काम पर खर्च किये गये हैं।
गौरतलब है कि इस दौरान सबसे कम मात्र 1495 रुपये का व्यय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया और पूर्व मंत्री इमरती देवी के बंगलों पर हुआ है।
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समाचारों के बीच में हम आपको यह जानकारी भी दे दें कि मौसम के अपडेट जानने के लिये समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के चैनल पर प्रतिदिन अपलोड होने वाले वीडियो अवश्य देखें। मौसम से संबंधित अपडेट मूलतः किसानों, निर्माण कार्य, यात्रा या समारोह आदि के लिये फायदेमंद साबित हो सकते हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के द्वारा अब तक मौसम के जो पूर्वानुमान जारी किये गये हैं, वे 95 से 99 प्रतिशत तक सही साबित हुए हैं।
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राज्य शासन द्वारा जन सामान्य की सुरक्षा के लिये भूमि विकास नियम, 2012 के प्रावधानों में 28 सितंबर 2020 को संशोधन किया गया। लिफ्ट के संचालन, रख-रखाव और सुरक्षा के संबंध में आवश्यक प्रावधान किये गये हैं। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने इन प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिये हैं।
लिफ्ट की स्थापना के लिये भवन स्वामी को स्थानीय नगरीय निकाय में निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना आवश्यक होगा। इसमें लिफ्ट की क्षमता, माप तथा लिफ्ट की संख्या का स्पष्ट विवरण देना होगा। भवन स्वामी को लिफ्ट का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के साथ लिफ्ट का बीमा मान्यता प्राप्त संस्था से कराना होगा। भवन स्वामी को लिफ्ट इंजीनियर द्वारा स्थापना के पश्चात् दिये गये रख-रखाव के निर्देशों का पालन करना होगा।
भवन स्वामी द्वारा ऐसी लिफ्ट का उपयोग नहीं किया जायेगा, जो सुरक्षित नहीं है। इसके लिये भवन स्वामी पूर्ण रूप से उत्तरदायी होगा। यदि लिफ्ट का उपयोग नहीं किया जा रहा हो, तो भवन स्वामी पूरी तरह से बिजली की आपूर्ति से लिफ्ट को डिस्कनेक्ट करेगा एवं सभी दरवाजों को सुरक्षित रूप से बंद करेगा, जिससे आकस्मिक प्रवेश को रोका जा सके। भवन स्वामी द्वारा राष्ट्रीय भवन संहिता में किये गये प्रावधानों के अनुसार संचालन और रख-रखाव किया जायेगा।
भवन स्वामी लिफ्ट इंजीनियर से विधिवत हस्ताक्षरित एक छः मासिक आवधिक सुरक्षा और लेखा परीक्षा रिपोर्ट संबंधित प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा। केवल व्यक्तिगत भवन स्वामी को इससे छूट होगी। भवन स्वामी उल्लेखित प्रावधानों का पालन करने में यदि विफल रहता है, तो लिफ्ट के संचालन को सक्षम प्राधिकारी द्वारा रोक दिया जायेगा। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में 24 घंटे के अंदर दुर्घटना का पूर्ण विवरण भवन स्वामी, संबंधित प्राधिकारी को देगा।
लिफ्ट प्राधिकारी संबंधित नगरीय निकायों के आयुक्त अथवा मुख्य नगरपालिका अधिकारी होंगे। प्रत्येक लिफ्ट प्राधिकारी सभी लिफ्ट की भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक सूची निर्धारित प्रपत्र में संधारित करेगा। ऐसे स्थल, जिनमें पूर्व से लिफ्ट स्थापित है, उनके भवन स्वामी को भी इसकी सूचना निर्धारित प्रपत्र में निर्धारित शुल्क के साथ प्राधिकारी को देनी होगी। इसे प्राधिकारी उपरोक्त सूची में संधारित करेगा। सक्षम प्राधिकारी लिफ्ट के व्यक्तिगत रूप से परिचालन में लापरवाही एवं त्रुटि पाये जाने पर लिफ्ट के संचालन को रोक सकेगा।
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प्रदेश में स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना के टीके का दूसरा डोज लगाने का काम छः मार्च तक पूरा हो जायेगा। छः मार्च को बचे हुए कर्मचारियों के लिये मॉपअप राउंड किया जायेगा। प्रदेश भर में प्रत्येक दिन 300 से 500 टीकाकरण केंद्रों पर टीका लगाया जायेगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसका कार्यक्रम तैयार कर लिया है। इसके बाद 50 वर्ष के ऊपर के लोगों को टीका लगाया जायेगा। 50 से ऊपर के लोगों को टीका लगाने की रूप-रेखा एक-दो दिन में भारत सरकार से जारी होने की आशा है।
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बताया कि प्रदेश भर में 03 लाख 40 हजार 821 स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना के टीके का दूसरा डोज लगाया जाना है। 20 फरवरी से टीका लगाने की प्रक्रिया आरंभ हो गयी है। छः मार्च तक टीकाकरण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। आखिरी दिन नियमित टीकाकरण के अलावा बचे हुए स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाने के लिये मॉपअप राउंड भी किया जायेगा।
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आप सुन रहे थे समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज में शरद खरे से बुधवार 24 फरवरी का प्रादेशिक आडियो बुलेटिन। बृहस्पतिवार 25 फरवरी को एक बार फिर हम आडियो बुलेटिन लेकर उपस्थित होंगे, आपको ये ऑडियो बुलेटिन यदि पसंद आ रहे हों तो आप इन्हें लाईक, शेयर और सब्सक्राईब अवश्य करें, सब्सक्राईब कैसे करना है यह प्रत्येक वीडियो के अंत में हम आपको बताते ही हैं। अभी आपसे अनुमति लेते हैं, नमस्कार।
(साई फीचर्स)