जीएसटी को लागू करने के तरीके पर नाराज़गी जतायी सर्वोच्च न्यायालय ने!

नमस्कार, आप सुन रहे हैं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज की समाचार श्रंखला में बुधवार 07 अप्रैल का राष्ट्रीय ऑडियो बुलेटिन.
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड उचित व्यवहार के पालन में कमी, संवेदनशील आबादी और कोरोना वायरस के नये स्वरूपों का प्रसार देश में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के लिये जिम्मेदार हैं।
भारत में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के रिकॉर्ड 1.15 लाख से अधिक मामले सामने आये और इसके साथ ही महामारी के कुल मामलों की संख्या बढ़कर बुधवार को 01 करोड़ 28 लाख 01 हजार 785 हो गयी।
लाइफकोर्स एपिडेमियोलॉजी, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रोफेसर एवं प्रमुख, चिकित्सक गिरिधर आर.बाबू ने कहा कि संक्रमण के मामलों में वृद्धि के लिये तीन महत्वपूर्ण कारकों को जिम्मेदार माना जा सकता है।
बाबू ने कहा, यद्यपि सरकार ने इसे नहीं माना है क्योंकि कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं है, लेकिन वायरस के नये चिंताजनक स्वरूपों की निश्चित ही भूमिका है जो अधिक संक्रामक हैं और संभवतः इनमें से रोग प्रतिरोधक क्षमता से बच निकलने में कामयाब रहने वाले कुछ स्वरूप हैं और वे पूर्व के स्वरूपों की तुलना में अधिक तेज गति से फैल रहे हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देने वाले इन स्वरूपों को व्यक्ति के शरीर की एंटीबॉडीज पकड़ नहीं पातीं। वायरस का ब्राजीलियाई स्वरूप सामान्यतः ऐसा ही स्वरूप है जो इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देने में सफल रहता है। दक्षिण अफ्रीकी स्वरूप का एक उप-समूह भी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से बच निकलने में सफल रहता है।
उन्होंने कहा, भारत में टीकाकरण की गति अपेक्षा के अनुरूप तेज नहीं है। संवेदनशील श्रेणी के लोगों के टीकाकरण की गति संतोषजनक नहीं है। बाबू ने कहा कि विशेष तौर पर यह कहना काफी कठिन है कि भारत में संक्रमण के मामलों में वृद्धि के लिये वायरस के नये स्वरूप जिम्मेदार हैं या नहीं क्योंकि जीनोम सीक्वेंसिंग अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुई है।
पुर्नसंक्रमण की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि एंटीबॉडीज के दुर्बल होने की वजह से ऐसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि पुर्नसंक्रमण की संभावना को लेकर विस्तृत अध्ययन नहीं हुआ है और परिणामस्वरूप ऐसे लोगों की संख्या काफी अधिक है जो, संवेदनशील हैं।
बाबू ने कहा कि पर्यावरण कारक और सामुदायिक व्यवहार की भी इसमें भूमिका है। उन्होंने कहा, हमारे द्वारा की जानेवाली प्रत्येक चीज, चाहे ये रैलियां हों, मेला आयोजन हो, शादियां हों, इन सबसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैल रहा है।
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उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से एक अनूठा वीडियो सामने आया, जिसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से विधायक धीरज ओझा अपना फटा कुरता खोलकर सड़क पर लोटने लगे। विधायक रोते-चिल्लाते बता रहे हैं कि यहाँ का पुलिस अधीक्षक उनको मरवा देगा। फिलहाल वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वीडियो में विधायक एक तरफ से आते हैं और सड़क पर लेट जाते हैं। उनके हाथ में फटा कुरता होता है। वे इसमें कहते देखे जा रहे हैं कि प्रतापगढ़ एस.पी. ने उनको बहुत मारा है। उन्होंने कोई गलती नहीं की है, लेकिन फिर भी उन्हें बहुत मारा है। ये बहुत खतरनाक आदमी है। ये उनको मार डालेगा। इस दौरान कई लोग एम.एल.ए. के आस-पास खड़े दिख रहे हैं।
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देश में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जी.एस.टी.) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है।
हिमाचल प्रदेश जी.एस.टी. के एक प्रावधान को चुनौती वाली याचिका पर सुनवायी के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उक्त टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि संसद की मंशा थी कि जी.एस.टी. सिटिजन फ्रेंडली टैक्स स्ट्रक्चर बने लेकिन जिस तरह से इसे देश भर में लागू कराया जा रहा है, इसका उद्देश्य समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जी.एस.टी. को लागू करने के तरीके पर नाराजगी जतायी और कहा कि टैक्समैन प्रत्येक बिजनेसमैन को धोखेबाज नहीं कह सकता।
हिमाचल प्रदेश जी.एस.टी. एक्ट 2017 के उस प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है जिसमें कहा गया है कि मामले की कार्यवाही पेंडिंग रहने के दौरान अधिकारी चाहे तो बैंक एकाउंट सहित अन्य प्रॉपर्टी जप्त कर सकता है। जी.एस.टी. एक्ट की धारा-83 में प्रावधान है कि यदि कोई मामला पेंडिंग है और कमिश्नर ये समझता है कि सरकार के राजस्व के हित को प्रोटेक्ट करने के लिये आवश्यक है तो वह संबंधित पक्षकार (जिनके टैक्स का मामला है) की संपत्ति और बैंक एकाउंट आदि अटैच कर सकता है।
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एक तरफ तो देश में कोरोना टीकाकरण की रफ्तार अभी बढ़ाने की आवश्यकता है, दूसरी तरफ कुछ राज्यों का आरोप है कि उनके पास पर्याप्त वैक्सीन ही नहीं है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने तो वैक्सीन के निर्यात के विरूद्ध प्रदर्शन भी किया। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बुधवार को कहा कि वैक्सीन की कमी की वजह से सूबे में कई वैक्सीनेशन सेंटर्स को बंद करना पड़ा है। वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन ने वैक्सीन की कमी की बात को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को वैक्सीन की पर्याप्त खुराक मुहैया करायी गयी है, केंद्र इसकी कमी नहीं होने देगा। सरकार 11 अप्रैल से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उन सरकारी एवं निज़ि कार्यस्थलों पर कोविड-19 टीकाकरण की अनुमति देगी जहाँ लगभग 100 पात्र लाभार्थी होंगे।
स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मुख्य सचिवों को लिखे एक पत्र में कहा कि अर्थव्यवस्था के संगठित क्षेत्र में 45 वर्ष से अधिक आयु की काफी आबादी है और कार्यालयों (सरकारी एवं निज़ि) या निर्माण एवं सेवा में औपचारिक व्यवसाय में शामिल है।
भूषण ने पत्र में कहा, इस आबादी तक टीकों की पहुँच बढ़ाने के क्रम में, कोविड-19 टीकाकरण सत्रों को मौजूदा कोविड टीकाकरण केंद्र के साथ जोड़ कर उन कार्यस्थलों (सरकारी एवं निज़ि दोनों) में आयोजित किया जा सकता है जहाँ लगभग 100 पात्र एवं इच्छुक लाभार्थी हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य कार्यस्थलों पर टीकाकरण आरंभ करने की तैयारी के लिये निज़ि/ सरकारी क्षेत्र के नियोक्ताओं एवं प्रबंधन से उचित विचार-विमर्श कर सकते हैं। स्वास्थ्य सचिव ने कहा, ऐसे कार्यस्थल टीकाकरण केंद्र 11 अप्रैल, से सभी राज्यों – केंद्र शासित प्रदेशों में आरंभ किये जा सकते हैं।
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समाचारों के बीच में हम आपको यह जानकारी भी दे दें कि मौसम के अपडेट जानने के लिये समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के चैनल पर प्रतिदिन अपलोड होने वाले वीडियो अवश्य देखें। मौसम से संबंधित अपडेट मूलतः किसानों, निर्माण कार्य, यात्रा या समारोह आदि के लिये फायदेमंद साबित हो सकते हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के द्वारा अब तक मौसम के जो पूर्वानुमान जारी किये गये हैं, वे 95 से 99 प्रतिशत तक सही साबित हुए हैं।
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बिहार कोर्ट के एक फैसले की काफी तारीफ हो रही है। अपराध की प्रकृति, आरोपी की आयु और उसमें सुधार की संभावना को देखते हुए नालंदा के किशोर न्याय परिषद के जज मानवेंद्र मिश्र ने अपने फैसले में आरोपी को बर्थडे गिफ्ट दिया है। उनके इस फैसले को किशोर न्याय परिषद के सदस्य धर्मेंद्र कुमार और ऊषा कुमारी ने सहमति दी है।
आरोपी ने कोर्ट को बताया कि आज उसका जन्मदिन है और वह 18 वर्ष का हो गया है। जज मानवेंद्र कुमार मिश्र ने पहले भी मानवीय आधार पर कई फैसले दिये हैं। ताजा मामला नालंदा के किशोर न्याय परिषद का है। नालंदा के बिहार थाने के एक मोहल्ले का निवासी किशोर पड़ोसी के साथ माँ के झगड़े में कूद गया था। मामला बढ़ने पर कोर्ट पहुँच गया।
कोर्ट ने इसके बाद आरोपी की माँ से पूछताछ की। माँ ने बेटे की बातों को सही बताया। उन्होंने कहा कि अब बेटा ठीक से रहता है। कागजात देखने के बाद कोर्ट ने पाया कि साधारण प्रकृति का यह अपराध सात महीने से लंबित है। पुलिस ने आरोप पत्र भी दाखिल नहीं किया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश का हवाला देते हुए आरोपी को मुक्त करने का फैसला सुनाया।
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आप सुन रहे थे समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की साई न्यूज में शरद खरे से बुधवार 07 अप्रैल का राष्ट्रीय ऑडियो बुलेटिन। बृहस्पतिवार 08 अप्रैल को एक बार फिर हम ऑडियो बुलेटिन लेकर उपस्थित होंगे, आपको ये ऑडियो बुलेटिन यदि पसंद आ रहे हों तो आप इन्हें लाईक, शेयर और सब्सक्राईब अवश्य करें, सब्सक्राईब कैसे करना है यह प्रत्येक वीडियो के अंत में हम आपको बताते ही हैं। अभी आपसे अनुमति लेते हैं, नमस्कार।
(साई फीचर्स)