छिंदवाड़ा नाका का रेल्वे ओवरब्रिज पहले ही विलोपित किया है एनएचएआई ने!

छिंदवाड़ा से सिवनी मार्ग निर्माण के दौरान सिवनी व छिंदवाड़ा जिले में आठ आरओबी थे स्वीकृत, इसमें से 07 बने छिंदवाड़ा जिले में, सिवनी का किया गया विलोपित!
(लिमटी खरे)


सिवनी (साई)। मामला चाहे केंद्र सरकार का हो या राज्य सरकार का, हर मामले में सिवनी जिले के साथ लगातार ही अन्याय जारी है और सिवनी के दो दो सांसद और चार चार विधायक पूरी तरह मौन ही साधे दिखते हैं। छिंदवाड़ा नाके में पांच साल पहले बनने वाला रेल्वे ओवर ब्रिज एनएचएआई के द्वारा नहीं बनाया गया है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के मुख्यालय दिल्ली के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान बताया कि नागपुर से छिंदवाड़ा और मुलताई से छिंदवाड़ा होकर सिवनी तक के मार्ग का निर्माण एनएचआई के द्वारा कराया जाना प्रस्तावित था। इस मार्ग में कुल आठ रेल्वे ओवरब्रिज (आरओबी) पड़ रहे थे।

सात बने छिंदवाड़ा में, सिवनी का किया विलोपित

सूत्रों ने कहा कि इसमें से सात आरओबी छिंदवाड़ा जिले में बना दिए गए हैं। आठवां आरओबी छिंदवाड़ा नाके पर 2016 के पूर्व ही प्रस्तावित था। चूंकि छिंदवाड़ा जिले में अतिरिक्त काम के लिए राशि की आवश्यकता थी, इसलिए सिवनी में छिंदवाड़ा नाके पर बनने वाले आरओबी के लिए आवंटित राशि को वहां खर्च किया जाकर इसे विलोपित कर दिया गया।
मामला चाहे चौरई के आरओबी का हो या सिवनी से छिंदवाड़ा के बीच पड़ने वाली रेल लाईन पर बने रेल्वे ओवर ब्रिज का, इन सभी का निर्माण एनएचएआई के द्वारा कराया गया है, पर सिवनी शहर में बनने वाले आरओबी को बनाने के लिए तत्कालीन संसद सदस्य बोध सिंह भगत के द्वारा भी किसी तरह का प्रयास नहीं किया गया।

बाकी एनएचएआई ने बनाए सिवनी का रेल्वे बनाएगा!

इधर, एनएचएआई के छिंदवाड़ा स्थित कार्यालय के परियोजना निदेशक विपिन मंगला ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि वे अभी ही पीडी छिंदवाड़ा बनकर आए हैं, इसलिए पूर्व में क्या था उसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा जिले में पड़ने वाले समपार रेल्वे क्रासिंग पर रेल्वे ओवर ब्रिज का निर्माण तो एनएचएआई के द्वारा करवा दिया गया है पर सिवनी शहर में छिंदवाड़ा नाके के रेल्वे ओवर ब्रिज का निर्माण रेल्वे करवाएगी। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा नाके पर आरओबी का निर्माण उनके स्कोप में वर्तमान में शामिल नहीं है।

छिंदवाड़ा जिला रहता है प्राथमिकता पर

यहां एक बात उल्लेखनीय होगी कि सरकार चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की मगर केंद्र या राज्य सरकार की कोई भी योजना हो उसमें छिंदवाड़ा जिला सदा ही प्राथमिकता पर रहता है। इसके पीछे एक ही वजह समझ में आती है कि छिंदवाड़ा के सांसद हों या विधायक वे बिना इस बात को ध्यान में रखते हुए कि कौन उनका फालोवर है? इससे किसे लाभ होगा? वो हमारा आदमी नहीं है? वो हमारा साथ नहीं देता? सोशल मीडिया पर अगर पोस्ट डालो तो कोई भी लाईक नहीं करता, कोई कमेंट नहीं करता आदि बातों से उपर उठकर छिंदवाड़ा के विकास को तरजीह देते हैं।

केंद्र और राज्य की समितियों में स्थान

केंद्र हो या राज्य छिंदवाड़ा के अनेक लोगों को विभिन्न समितियों आदि में सदस्य बनाकर भी उनकी सहभागिता बनाने का प्रयास छिंदवाड़ा के सांसद या विधायक करते हैं, जिसका अभाव सिवनी में साफ परिलक्षित होता है। यहां तक कि पेंच नेशनल पार्क के अशासकीय सदस्य के रूप में भी सिवनी जिले का एक भी व्यक्ति अब तक नामित नहीं हो सका है जबकि यह नेशनल पार्क सिवनी जिले में स्थित है।