बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में ठेकेदार काम करने में क्यों कर रहा आनाकानी!

समयसीमा बीतने के बाद पत्राचार का क्या औचित्य! ठेकेदार पर लगाना चाहिए जुर्माना, एक साल तक शायद ही पूरा हो प ाए काम
(अखिलेश दुबे)


सिवनी (साई)। सिवनी जिले में नेरोगेज की पटरी उखाड़ने का काम दिसंबर 2015 से आरंभ हो गया था। दो साल के लिए लगाए गए मेगा ब्लाक की समयावधि कब बढ़ाई गई इस बारे में रेल्वे के अधिकारी भी मौन हैं, और जिले के दोनों सांसदों ने भी इस मामले में कुछ कहने की जहमत नहीं उठाई है।
सिवनी जिले के पास दो सांसदों के रूप में मण्डला के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और बालाघाट के सांसद डॉ.ढाल सिंह बिसेन के अलावा चार विधायक दिनेश राय, अर्जुन सिंह काकोड़िया, राकेश पाल सिंह और योगेंद्र सिंह हैं। जनप्रतिनिधियों के मामले में भरा-पूरा होने के बाद भी सिवनी में विकास मानो अवरूद्ध हो चुका है।


जिले में पिछले दो दशकों में विकास के क्या काम हुए हैं इस बारे में जनप्रतिनिधि पूरी तरह मौन ही हैं। जिले में जो भी हो रहा है वह केंद्र या प्रदेश सरकार के नीतिगत मामलों का ही हिस्सा है जिसका श्रेय अब तक जिले के जनप्रतिनिधि लेते आये हैं। अगर जिले के सांसद या विधायक प्रयास न भी करें तो ये काम होना तय ही हैं।


जिले से होकर गुजरने वाले नैरोगेज़ रेल खण्ड के लगभग सौ साल पुराने सफर को वर्ष 2015 में विराम दे दिया गया था। 01 दिसंबर 2015 के बाद जिले में नैरोगेज़ का परिचालन बंद कर दिया गया था। इस समय दो साल का मेगा ब्लॉक लगाया गया था। इस लिहाज़ से 01 दिसंबर 2017 तक सिवनी में अमान परिवर्तन का काम पूरा कर लिया जाना चाहिये था।


दिसंबर 2018 के बाद अब 2021 का अगस्त माह भी बीतने को है। जिले में मण्डला संसदीय क्षेत्र के हिस्से में तो युद्ध स्तर पर काम कराए गए किन्तु जैसे ही बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में काम कराने की बात आती है, वैसे ही रेल्वे के अधिकारियों के द्वारा रटा रटाया जवाब देना आरंभ कर दिया जाता है। रेल्वे के अधिकारियों के द्वारा ठेकेदार के द्वारा आत्महत्या, कोरोना कॉल, लाक डाऊन, नए ठेकेदार के द्वारा काम में आनाकानी के बहाने बनाए जाते हैं।


मजे की बात तो यह है कि ये सारे बहाने सिर्फ और सिर्फ बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से के लिए तैयार रखे रहते हैं। जब मण्डला संसदीय क्षेत्र या छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र की बात आती है तो न वहां कोरोना कॉल, न ही ठेकेदार के द्वारा अनाकानी, न ही लॉक डॉऊन की बात अधिकारियों के द्वारा कही जाती है। दोनों ही संसदीय क्षेत्र में अधिकारियों के द्वारा ठेकेदार की गुद्दी तानकर काम कराया जाता है।


रेल्वे के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिस ठेकेदार के द्वारा मण्डला संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में बेहतर परफार्मेंस दिया गया, वही ठेकेदार अब बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में काम करने से क्यों कतरा रहा है यह शोध का ही विषय माना जा सकता है। सूत्रों ने इस बात के संकेत भी दिए कि बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में ठेकेदार किसी दबाव के चलते काम करने में संभवतः अपने आप को असमर्थ ही महसूस करता दिख रहा है।


देखा जाए तो देश में आज भी रेल का सफर अपेक्षाकृत सुविधा जनक और सस्ता माना जाता है। जिले में परिवहन के क्षेत्र की लाईफ लाईन मानी जाने वाली रेल गाड़ी के बंद होने से अब यात्री बस संचालकों की मनमानी चरम पर है। आलम यह है कि ग्रामीण अंचलों में मनमाना किराया देने पर मजबूर हैं यात्री।


रेल्वे के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि रेल्वे के अधिकारियों के द्वारा बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में काम मंथर गति से होने के पीछे नया बहाना इजाद किया गया है कि ठेकेदार काम करने में आनाकानी कर रहा है।


यहां उल्लेखनीय होगा कि जिस ठेकेदार के पास भोमा से सिवनी (बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले का हिस्सा) का काम है वही ठेकेदार भोमा से पलारी, कान्हीवाड़ा होकर केवलारी तक का काम कर रहा था। मण्डला संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में तो ठेकेदार के द्वारा समय सीमा में पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर दिया जाता है पर जब बालाघाट संसदीय ़क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से की बारी आती है तब वह काम करने में आनाकानी करता प्रतीत होता है।


यहां यह बात भी उल्लेखनीय होगी कि 2020 में बालाघाट के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन के द्वारा भोमा से सिवनी होकर चौरई तक के रेलखण्ड के लिए जून 2021 की समय सीमा तय की गई थी। इसके साथ ही रेल्वे बोर्ड के द्वारा काम पूरा किए जाने के लिए अगस्त 2021 की समय सीमा तय किए जाने के बाद भी काम अभी महज तीस फीसदी ही हुआ प्रतीत हो रहा है।

भोमा से सिवनी के बीच तीन किलोमीटर पटरी नहीं बिछ पाई है। एक पुल का तकनीकि परीक्षण चल रहा है। सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन के द्वारा हमसे (रेल्वे से) पूछकर ही समय सीमा तय की गई थी, तय समय सीमा अगस्त की थी, उन्होंने जून की तय की थी। नई समय सीमा दिसंबर तक की है। यह सही है कि अभी बहुत काम बाकी है। दरअसल, ठेकेदार के द्वारा काम में विलंब किया जा रहा है। ठेकेदार को पत्र जारी किया गया है।
मनीष लावणकर,
डिप्टी एस.ई, रेल्वे,
नैनपुर
(क्रमशः जारी)