युद्ध स्तर पर भी हो काम तो कम से कम 18 माह लगेंगे भोमा, सिवनी चौरई रेलखण्ड पूरा करने में!

भोमा, सिवनी कर्राबोह के मामले में जिला कांग्रेस अध्यक्ष कब तोड़ेंगे अपना मौन!, पत्रकार वार्ता कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग करने से भी कतरा रहा विपक्ष!
(संजीव प्रताप सिंह)


सिवनी (साई)। मण्डला संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में तो रेलवे के अधिकारियों के द्वारा युद्ध स्तर पर काम कराया गया पर जैसे ही बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से की बारी आई अधिकारियों के द्वारा किसी अज्ञात कारणों से काम को बहुत ही धीमी गति से करवाना आरंभ कर दिया गया।


रेल्वे के निर्माण प्रभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि किसी अज्ञात दबाव के कारण रेलवे के निर्माण प्रभाग के अधिकारी बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में काम को बहुत ही धीमी गति से करा रहे हैं। रेलवे के अधिकारियों के पास इस बात का कोई ठोस कारण नहीं है जिसके आधार पर यह स्थापित किया जा सके कि भोमा से सिवनी होकर कर्राबोह (छिंदवाड़ा जिले में चौरई की ओर) तक का काम मंथर गति से क्यों चल रहा है।

कम से कम 18 माह की है कहानी!

नागपुर स्थित साऊथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान बताया कि डीआरएम नागपुर भी इस बात पर हैरान हैं कि आखिर भोमा से सिवनी होकर कर्राबोह तक का हिस्सा जो बालाघाट संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है के निर्माण में रेलवे के निर्माण प्रभाग को आखिर परेशानी क्या है!


सूत्रों ने बताया कि अगर अभी भी चौबीसों घंटे काम कराया जाए तब भी कम से कम 18 माह बाद ही नैनपुर से सिवनी होकर चौरई तक के रेल खण्ड का सीआरएस हो पाएगा। इसका मतलब साफ है कि सिवनी के नागरिकों को अभी डेढ़ साल तक (कम से कम मार्च 2023 तक) ब्राडगेज की सीटी का इंतजार करना पड़ सकता है।

नैनपुर भोमा हो जाएगा होली तक विद्युतीकृत

सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को आगे बताया कि इधर, मण्डला से नैनपुर होकर भोमा तक जो कि मण्डला संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है में पटरी डालने के बाद सीआरएस हो चुका है। इस रेलखण्ड में मण्डला संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में नैनुपर सीमा से केवलारी, पलारी, कान्हीवाड़ा होकर भोमा तक के रेलखण्ड के विद्युतीकरण का काम दीपावली तक पूरा किए जाने के स्पष्ट निर्देश मण्डला के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते के द्वारा दिए गए।


सूत्रों की मानें तो अधिकारियों के द्वारा जब इस काम को कम से कम एक साल की अवधि में पूरा किए जाने की बात कही गई तो फग्गन सिंह कुलस्ते के द्वारा 2022 की होली तक किसी भी कीमत पर काम पूरा करने का अल्टीमेटम दिया जाकर यह तक कह दिया गया कि अधिकारी अगर ठेकेदार से काम नहीं करा सकते हैं तो वे तबादले के लिए तैयार रहें। सांसद केे इस रूख को देखते हुए अधिकारियों ने काम को गति प्रदाय कर दी है और काम अगले साल होली के पहले पूरा होने की उम्मीद जाग गई है।


सूत्रों ने आगे बताया कि इधर, बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में भोमा से सिवनी होकर चौरई की सीमा तक के काम के बारे में अधिकारियों का भी स्पष्ट कहना है कि पूरा काम भगवान भरोसे ही है। भोमा से सिवनी के बीच ही पटरी अभी तक बिछ नहीं पाई हैं, तो विद्युतीकरण की बात तो दिल्ली दूर है की कहावत को चरितार्थ करती प्रतीत हो रही है।

सिवनी से कर्राबोह तक ऊग चुकी है लंबी घास!

सूत्रों ने बताया कि बालाघाट के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन एक बार सिवनी से कर्राबोह तक रेलवे ट्रेक के पास से निरीक्षण करें तो वे पाएंगे कि अधिकारी उन्हें भी किस तरह अंधेरे में रेख रहे हैं। अधिकारियों के द्वारा की जा रही गलत बयानी को सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन अपनी आखों से देख सकते हैं कि सिवनी से लखनवाड़ा के पुल होकर कर्राबोह तक के हिस्से में रेलवे के पुराने ट्रेक पर लंबी लंबी घास ऊग चुकी है जो इस बात की चुगली कर रही है कि सिवनी से लखनवाड़ा होकर कर्राबोह तक के हिस्से में अभी एक तसला मुरम भी नहीं डाली गई है तो ट्रेक बनाने की बात तो दूर की कोड़ी ही है।

पत्रकार वार्ता की मांग कर सकता है विपक्ष

सूत्रों का कहना है कि सत्तापक्ष तो इस मामले में पूरी तरह मौन ही दिख रहा है। सिवनी के भाजपा के विधायक दिनेश राय अवश्य ही कुछ दिन पूर्व रेल अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति को स्पष्ट करने की बात कहते नजर आ रहे थे, पर लगभग एक माह बीतने को आया है और वे भी रेलवे के अधिकारियों को एक साथ नहीं बिठा पाए हैं। इतना ही नहीं विपक्ष के नेताओं के द्वारा भी रेलवे के मौन पर रेल अधिकारियों से पत्रकार वार्ता कर स्थिति को स्पष्ट करने की मांग करता नहीं दिख रहा है ताकि जनता के बीच बनी भ्रम की स्थिति को दूर किया जा सके।