बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में पटरी डालने में विलंब की समीक्षा आरंभ!

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की खबरों, वीडियोज के लिंक ट्वीट करने पर रेल मंत्री ने लिया संज्ञान, मण्डला से जबलपुर रेल का उद्घाटन होगा व्यापक पैमाने पर, इसलिए हो रहा विलंब!
(सुमित माहेश्वरी)


नई दिल्ली (साई)। मध्य प्रदेश में बालाघाट और मण्डला संसदीय क्षेत्र में रेल सुविधाओं का मामला अब रेल मंत्री के संज्ञान में आता दिख रहा है। मण्डला से नैनपुर होकर जबलपुर तक चलने वाली मैमू अथवा डैमू रेलगाड़ी में विलंब और बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में पटरी बिछाने के काम में अनावश्यक देरी का मामला अब उछलता हुआ दिख रहा है।
रेलवे बोर्ड के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मण्डला संसदीय क्षेत्र में मण्डला से नैनपुर होकर जबलपुर तक चलने वाली मैमू अथवा डैमू रेलगाड़ी में विलंब के पीछे इसका भव्य तरीके से उद्घाटन ही मुख्य कारण बनकर उभरता दिख रहा है।
सूत्रों ने बताया कि दरअसल, मण्डला संसदीय क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है और इस क्षेत्र को ब्राडगेज से जोड़े जाने का मामला साधारण नहीं माना जा सकता है। मण्डला के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का प्रयास है कि मण्डला से नैनपुर होकर जबलपुर जाने वाली रेलगाड़ी को स्वयं प्रधानमंत्री हरी झंडी दिखाएं।
सूत्रों ने बताया कि रेलवे बोर्ड को रेल मंत्री के द्वारा भी इस आशय के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल, केंद्र सरकार के द्वारा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के लिए दी गई सौगात को बहुत ही वृहद रूप में पेश किया जाना चाहा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस कार्यक्रम के लिए अपनी सहमति प्रदाय कर दी है। सूत्रों की मानें तो वृहद स्तर पर कार्यक्रम करवाने के लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है, संभवतः यही इस हिस्से में नई रेलगाड़ी चलने में विलंब का कारण है।

बालाघाट संसदीय क्षेत्र से नाराज दिख रहे प्रधानमंत्री!

इधर, प्रधानमंत्री कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में देश के पहले साऊॅड प्रूफ फोरलेन कारीडोर का उद्यघाटन चुपके चुपके किए जाने, मीडिया को इसकी जानकारी नहीं दिए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिलहाल भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी से कुछ नाराज दिख रहे हैं। सूत्रों का कहना था कि यह देश का पहला ऐसा कारीडोर है जिसकी पब्लिसिटी जमकर की जाकर इसका पालीटिकल माईलेज लिया जा सकता था। कम से कम बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन ही अपने संसदीय क्षेत्र के बालाघाट और सिवनी जिले के मीडिया पर्सन्स को लोकार्पण स्थल तक ले जा सकते थे, पर जब उन्हें यह बताया गया कि इस मामले में बालाघाट और सिवनी जिले के पत्रकारों को इसकी जानकारी नहीं दी गई तो नरेंद्र मोदी ने गहरी सांस लेते हुए कुछ विचार करना आरंभ कर दिया था।

भोमा, सिवनी से कर्राबोह के हिस्से में काम में विलंब की समीक्षा आरंभ

इधर, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को इस बात के संकेत दिए कि रोजाना ही अनेक ट्वीट जिनमें बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में अधिकारी वही, ठेकेदार वही होने के बाद भी काम मंथर गति से होने के संबंध में खबरें, लिंक आदि के ट्वीट प्रधानमंत्री कार्यालय, रेल मंत्री कार्यालय, रेल मंत्री, रेल राज्य मंत्रियों, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, रेलवे बोर्ड आदि को मिलने पर रेल मंत्री के इशारे पर बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में काम क्यों विलंब से किया जा रहा है इसकी समीक्षा आरंभ कर दी गई है। इसके बाद अगर अधिकारी दोषी पाए गए तो उन पर कठोर कार्यवाही की जा सकती है।