आर्यन खान को ड्रग्‍स केस में जमानत मिली

(ब्‍यूरो कार्यालय)
मुंबई (साई्)। क्रूज ड्रग्स केस (Cruise drugs case) में आर्यन खान को आख‍िरकार जमानत म‍िल गई है। उनके साथ ही बॉम्‍बे हाई कोर्ट ने अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा को भी जमानत दे दी है। जस्‍ट‍िस नितिन साम्‍ब्रे की अदालत ने तीनों आरोपियों को तीन दिन की लगातार सुनवाई के बाद जमानत दे दी है।

ASG अनिल सिंंह ने NCB की तरफ से गुरुवार को जमानत का विरोध किया। लेकिन आर्यन के वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में उनके हर तर्क को काटा। हालांकि अभी ऑर्डर की कॉपी नहीं आई है। वह शुक्रवार को मिलेगी। वकील अनिल सिंह ने अपनी जिरह शुरू करते ही कहा कि आर्यन खान कई साल से ड्रग्‍स का सेवन कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि उन्‍होंने उस दिन पहली बार सेवन किया था। एनसीबी के पास इस बात के सबूत हैं कि आर्यन ड्रग्‍स का इंतजाम करते थे। वॉट्सऐप ASG ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आर्यन खान के पास ड्रग्‍स का ‘कॉन्‍शस पजेशन’ था, उन्‍हें अच्‍छी तरह से मालूम था कि उनके दोस्‍त अरबाज के पास चरस है और यह दोनों के लिए था। लेकिन कोर्ट ने उनके तर्क को नहीं माना। कॉन्‍शस पजेशन की बात को कोर्ट ने खारिज किया। साथ ही साजिश को लेकर भी तर्कों से अदालत संतुष्‍ट नहीं दिखा।

‘ड्रग्‍स का इंतजाम करते थे आर्यन खान, हमारे पास सबूत’
ASG अनिल सिंह: आर्यन खान ने पहली बार ड्रग्‍स नहीं ली है। कई साल से वह इसका सेवन करते आ रहे हैं। हमारे पास इस बात के सबूत हैं कि वह ड्रग्‍स उपलब्‍ध करवाते थे। हमने कॉन्‍शस पजेशन का तर्क दिया है। यदि दो व्यक्ति एक साथ हैं और एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के पास मौजूद नशीले पदार्थों के होनेऔर उपयोग के बारे में पता है, तो पहला व्यक्ति भी सचेत रूप से ड्रग्‍स के कब्‍जे की धारा लगेगी। आर्यन और अरबाज बचपन के दोस्त हैं। वो एकसाथ वहां पहुंचे थे। एक ही कमरे में रहने वाले थे। वे तर्क दे रहे हैं कि हमने सेवन के बारे में पता लगाने के लिए मेडिकल टेस्‍ट नहीं किया है। हम यहां सिर्फ ड्रग्‍स की बरामदगी के बारे में बहस कर रहे हैं। आर्यन खान के पास ड्रग्‍स का ‘कॉन्‍शस पजेशन’ था।

ASG अनिल सिंह: यह मामला ड्रग्‍स के कॉन्‍शस पजेशन और सेवन करने की योजना के बारे में है। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 29 यह नहीं कहती है कि व्यक्ति के पास ड्रग्‍स का कब्जा होना चाहिए। जब हम धारा 28 और 29 को लागू करते हैं तो कर्मश‍ियल मात्रा की बात शुरू हो जाती है। उन्होंने बड़ी मात्रा यानी कर्मश‍ियल मात्रा में ड्रग डील की कोश‍िश की है। एक ही दिन में सभी जगहों से आए सभी 8 लोगों के पास से कई नशीले पदार्थ पाए गए। आप ड्रग्‍स की मात्रा और उनके प्रकार देखें।

कोर्ट: तो आप कह रहे हैं कि ये आपस में जुड़े हुए हैं?
ASG अनिल सिंह: जब मैं साजिश की बात कहता हूं, तब मैं सभी के पास से बरामद ड्रग्‍स की बात करता हूं। वॉट्सऐप चैट पर विवाद नहीं किया जा सकता, क्‍योंकि हमारे पास 65B में बयान हैं। यह एक पार्टी थी। मेरे काबिल दोस्‍त कह रहे हैं कि हमने गांधी जयंती पर 2 अक्टूबर को क्यों गिरफ्तार किया है.. यह ड्राई डे है, तो हमें उन्हें छोड़ देना चाहिए था। (हंसते हुए)

‘क्रूज पर जितनी मात्रा में ड्रग्‍स थे, वह पर्सनल यूज नहीं हो सकते’
ASG: हमोर पास मुनमुन धमेचा, नुपुर और मोहकी के दो और पंचनामे हैं। ड्रग्‍स की जो मात्रा बरामद हुई है वो कर्मश‍ियल है। क्रूज पर कई तरह की दवाएं थीं। क्रूज दो दिनों का था। ऐसा नहीं हो सकता कि यह पर्सनल यूज के लिए हो, क्योंकि मात्रा अध‍िक थी और दवाएं भी कई। यही कारण है कि हमने धारा 28 और 29 लागू किया है। यह संयोग नहीं हो सकता है कि क्रूज पर 8 लोग, इतनी मात्रा में इतने तरह के ड्रग्‍स के साथ पाए गए।

कोर्ट: आप कर्मश‍ियल मात्रा के कारण धारा 37 को लागू कर रहे हैं?
ASG: हम 28 और 29 के कारण कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अरेस्‍ट मेमो में धारा 28 और 29 नहीं है। लेकिन गिरफ्तारी के चार घंटे बाद पहला रिमांड था। पहले रिमांड में भी धारा 28 और 29 है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने रिमांड देते वक्‍त धारा 28 और 29 पर विचार किया। धारा 37 की कठोरता सिर्फ 28 और 29 की वजह से है। उनका तर्क था कि उनके पास से ड्रग्‍स बरामद नहीं हुए। हो सकता है कि यह आपके पास से नहीं मिला हो, लेकिन फिर पंचनामा देखें। अरबाज के पास से मिला था। मैं अब पंचनामा पढ़ रहा हूं। यहां अरबाज ने अपने जूतों में से ड्रग्‍स निकाला है और एनसीबी अधिकारी को दिया है।

‘जमानत कोई नियम नहीं है, SC ने कहा है यह हत्‍या से बड़ा अपराध’
ASG: वो वहां कहते हैं कि वे एक “ब्‍लास्‍ट” करने के लिए अंदर जा रहे हैं। चरस को क्रूज यात्रा के सेवन के लिए ले जाया जा रहा था। वह अरबाज के पास था और यह आर्यन के सेवन के लिए भी था। यह उन दोनों के लिए था। दूसरे रिकॉर्ड्स में इसका विस्तार से वर्णन है। कृपया सेशंस कोर्ट की ऑर्डर कॉपी देखें। मैं आदेश का पैरा 25 पढ़ रहा हूं। अब मीलॉर्ड एक और ऑर्डर में देख सकते हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में कहा गया है कि एनडीपीएस के तहत जमानत पहली नजर में मामले की प्रकृति के आधार पर दी जा सकती है। लेकिन ‘जमानत कोई नियम नहीं है।’ सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि नशीली दवाओं का खतरा गैर इरादतन हत्या से ज्यादा जघन्य अपराध है और इससे सख्ती से निपटना होगा।

मुकुल रोहतगी : मेरे काबिल दोस्त धारीवाल के फैसले का आखिरी पैरा पढ़ रहे हैं।
कोर्ट: यह पैरा कैसे लागू होता है?
ASG: मेरे काबिल दोस्‍त, तूफान सिंह के मामले पर निर्भर थे, लेकिन यह जमानत के स्तर पर लागू नहीं होता है। मैं अब तूफान सिंह का फैसला पढ़ता हूं। अब देखिए साहिल शाह का फैसला। यह तूफान सिंह पर निर्भर नहीं है।

कोर्ट: लेकिन यह 438 स्टेज है।
ASG: दो फैसले हैं, लेकिन बाकी में जमानत है। लेकिन सवाल यह है कि तूफान सिंह किस स्तर पर आवेदन करेंगे। यह ट्रायल के लिए लागू नहीं होता है। मैं मद्रास हाईकोर्ट का फैसला पढ़ रहा हूं। जमानत और मुकदमा एक मामले के दो अलग-अलग चरण हैं। उन्होंने तूफान सिंह के मामले पर भरोसा किया है और यह कहा है।

‘जब दो बार कोर्ट ने रिमांड में भेजा, तब क्‍यों नहीं कहा कि गिरफ्तारी अवैध है’
ASG: मैं अब कॉन्‍शस पजेशन पर आदेश दिखा रहा हूं। रतन मलिक का फैसला देख‍िए। इस मामले में भी व्यक्ति के पास से ड्रग्‍स बरामद नहीं हुआ था। फिर भी वह व्यक्ति अपराध के लिए जवाबदेह हो सकता है। शौविक चक्रवर्ती का मामला देख‍िए। मैं यह दिखाने के लिए सारे फैसले पेश कर रहा हूं कि जमानत देने के मामलों में धारा 37 की कठोरता कैसे लागू होगी। अरेस्‍ट मेमो पर एक तर्क आगे बढ़ा रहा हूं, कृपया देखें। अरेस्‍ट मेमो में कर्मश‍ियल मात्रा का जिक्र है। साथ ही यह भी कि सेवन किया गया था। ऐसा नहीं है कि उन्हें धारा 28 और 29 की जानकारी नहीं थी। चार घंटे बाद रिमांड में इन्हें जोड़ा गया। वकील जागरूक थे।जबकि सीआरपीसी की धारा 50 के शब्दों में अंतर है। यह कहता है कि यह तत्काल होना चाहिए। उन्हें 4 घंटे के भीतर सूचित किया गया। क्या ऐसे में यह कहा जा सकता है कि उन्हें सूचित नहीं किया गया था।

ASG: अगर कोई खराबी है तो रिमांड ऑर्डर देते ही उसे ठीक कर दिया जाता है। मेरा तर्क है कि रिमांड के तीन आदेश हैं, जिन्हें चुनौती नहीं दी गई है। ऐसे में वो अभी नहीं कह सकते हैं कि गिरफ्तारी अवैध थी। उन्होंने अभी तक रिमांड ऑर्डर को चुनौती नहीं दी है। दो शर्तें हैं। एक यह है कि वे तर्क दे सकते हैं कि कोई सूचना नहीं मिली। लेकिन उन्हें अदालत को संतुष्ट करना होगा कि मजिस्ट्रेट ने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया है जिनके बारे में वो अब बात कर रहे हैं।

‘अरेस्‍ट मेमो और रिमांड अपील में 4 घंटे की देर, अरेस्‍ट अवैध नहीं’
ASG अनिल स‍िंह ने कोर्ट में मधु लिमये का सुप्रीम कोर्ट का फैसला दिखाया। बोले, ‘इन फैसलों में कहा गया है कि न्यायिक आदेश के जरिए रिमांड आदेश पारित किया गया है। मेरा तर्क है कि वह ड्रग्‍स उनके कब्‍जे में पाया गया था। वह ड्रग तस्करों से जुड़ा था। यह कर्मश‍ियल मात्रा थी। इसलिए हमने 28 और 29 की धारा लगाई है। अरेस्‍ट मेमो और रिमांड में सिर्फ 4 घंटे की देरी हुई है। वे इस परेशानी को जानते हैं। इसलिए यह अवैध गिरफ्तारी नहीं हो सकती। साजिश साबित करना मुश्किल है। साजिशकर्ता ही जानता है कि उन्होंने कैसे साजिश रची, मैं इसे अदालत के संज्ञान में छोड़ दूंगा।

‘हमारे पास कॉल रिकॉर्ड्स, ये इश्‍मीत को पहले से जानते थे’
ASG: मेरे जवाब के पैरा 4 में यह देखा जा सकता है कि सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना है, क्योंकि एक हलफनामा था जिसमें नाम और विवरण था। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि कोई छेड़छाड़ नहीं हुई थी। इसके अलावा वॉट्सऐप चैट भी हैं। साथ ही हमें कॉल डिटेल्‍स रिकॉर्ड भी मिला है, जिससे पता चलता है कि इनके पहले से ही आरोपी इश्मीत के साथ संबंध थे। वह ड्रग्स ले जा रही थी जो बलदेव और सौम्या के बयानों से पता चलता है। मैं वॉट्सऐप चैट्स को 65 B सर्टिफिकेट के साथ दिखाता हूं।

इसी के साथ ASG अनिल सिंह ने NCB की ओर से अपनी दलीलें खत्‍म की।

अब आर्यन के वकील मुकुल रोहतगी रोहतगी खड़े हुए और अपनी बात रख रहे हैं।

रोहतगी: आर्यन को नहीं पता था कि अरबाज क्या ले जा रहा था, मान लीजिए कि वह जानता थे .. लेकिन वे हमारे खिलाफ जो सबसे अधिक आरोप लगा सकते हैं वह सामूहिक रूप से कर्मश‍ियल मात्रा का है। इसे साजिश के साथ जोड़ा गया है। मेरे खिलाफ कोई 27ए नहीं लगाया गया है। आर्यन पर आरोप है कि उन्‍होंने 5-8 लोगों के साथ साजिश की, उन सभी के पास से कुल बरामदगी कर्मश‍ियल मात्रा में थी।

रोहतगी: जहाज पर 1300 लोग थे और आर्यन और अरबाज के बीच ही कनेक्शन था। जिस साजिश के खिलाफ आरोप लगाया गया है। यहां कोई साजिश नहीं थी, क्योंकि कोई किसी को नहीं जानता। ना ही मन का मिलन हुआ है। कोई चर्चा नहीं हुई कि वे मिलेंगे और ड्रग्‍स का सेवन करेंगे, यह साजिश है। यदि एक होटल में अलग-अलग कमरों में लोग हैं और वे स्‍मोक करते हैं तो होटल में सभी साजिश में शामिल हैं? इस मामले में इसे साजिश करार देने के लिए कोई सबूत नहीं हैं।

रोहतगी: आर्यन सिर्फ अरबाज को जानते थे, किसी और को नहीं जानते। यह सच है कि यह साबित करना मुश्किल है कि सब के मन पहले से मिले हुए थे। लेकिन फैक्‍ट्स की अनदेखी नहीं की जा सकती। मन का मिलन होना चाहिए। 6 ग्राम के लिए कॉन्‍शस पजेशन कैसे हो सकता है। उनका तर्क है कि संयोग नहीं होने के कारण यह एक साजिश है। साजिश का अनुमान से कोई लेना-देना नहीं है।

आर्यन के लिए दो दिन बहुत अहम
आर्यन खान (Aryan Khan bail hearing) की रिहाई के लिए गुरुवार और शुक्रवार का दिन बहुत अहम है। ऐसा इसलिए कि यदि इन दो दिनों में उन्‍हें जमानत नहीं मिलती है तो उनकी दिवाली जेल में ही मनेगी। आगे त्‍योहार की छुट्ट‍ियां हैं। 2 नवंबर को आर्यन के पिता शाहरुख खान का जन्‍मदिन है, जबकि 13 नवंबर को खुद आर्यन खान का भी बर्थडे है। यदि उन्‍हें इन दो दिनों में जमानत नहीं मिलती है, तो कोर्ट में अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी। बुधवार को कोर्ट में दोपहर बाद करीब 3:45 बजे सुनवाई शुरू हुई थी। 5:30 बजे तक कोर्ट की कार्यवाही चली थी। इसी तरह यदि गुरुवार को भी दो से ढाई घंटे में ASG अनिल सिंह अपनी दलील पूरी कर लेते हैं। उनकी दलीलों पर रोहतगी, देसाई और देशमुख भी जाहिर तौर पर बीच में कोर्ट की अनुमति से हस्‍तक्षेप करेंगे। कुल मिलाकर यदि यह पूरी प्रक्रिया समय रहते पूरी हो जाती है तो जस्‍ट‍िस साम्‍ब्रे गुरुवार को फैसला सुना सकते हैं।

हालांकि, बहुत संभव है कि जज इसके बाद समय के अभाव का हवाला देते हुए या पेश सबूतों और बाकी दस्‍तावेजों को पढ़ने के लिए वक्‍त लें। ऐसे में फैसला सुरक्ष‍ित रखा जा सकता है। अब यदि ऐसा होता है तो शुक्रवार को आर्यन, अरबाज और मुनमुन की जमानत पर फैसला आ सकता है। लेकिन यदि जस्‍ट‍िस साम्‍ब्रे ने इससे अध‍िक वक्‍त लिया तो तीनों आरोपी दिवाली तक जेल में ही रहेंगे।

छुट्ट‍ियों के बाद 15 नवबंर को खुलेगा कोर्ट
आर्यन खान 30 नवंबर तक न्‍यायिक हिरासत में हैं। यदि उन्‍हें जमानत नहीं मिलती है तो उनकी न्‍याय‍िक हिरासत बढ़ जाएगी। आगामी 30 और 31 अक्टूबर को कोर्ट की शनिवार-रविवार की छुट्टी है। इसके बाद 1 नवंबर से दिवाली की छुट्टियां शुरू हो रही है। इस कारण जहां बॉम्बे हाई कोर्ट 12 नवंबर तक बंद रहेगा। 13 और 14 नवंबर को कोर्ट की फिर से शनिवार-रविवार की छुट्टी रहेगी। इस तरह कोर्ट में अगली सुनवाई 15 नवंबर को हो पाएगी।

बुधवार को सुनवाई में क्या-क्या हुआ?
बीते दो दिनों कोर्ट की सुनवाई में जहां बुधवार को अमित देसाई ने अरबाज मर्चेंट के लिए अपनी दलीलें पेश कीं, वहीं मुनमुन धमेचा के वकील अली काशिफ खान ने अपनी दलीलें दीं। अमित देसाई ने कोर्ट में अपने मुवक्किल अरबाज की गिरफ्तारी को अवैध बताया और कहा कि अरेस्ट मेमो में सिर्फ ड्रग्स के सेवन की बात है और वहां कोई साजिश नहीं है तो फिर गिरफ्तारी क्यों की गई? अमित देसाई ने कोर्ट से यह भी कहा कि वह अरेस्‍ट मेमो और पंचनामा के आधार पर जमानत की मांग कर रहे हैं, जिसमें दर्ज आरोपों की अध‍िकतम सजा 1 साल है। देसाई ने कहा कि जमानत के बाद भी जांच चलती रहेगी, कोई उसे रोक नहीं रहा। उन्‍होंने कहा कि अरबाज ने ड्रग्‍स का सेवन किया था या नहीं, इसकी भी पुष्‍ट‍ि नहीं है क्‍यों‍कि कोई मेडिकल टेस्‍ट नहीं हुआ। वॉट्सऐप के चैट्स मान्‍य नहीं हैं, क्‍योंकि पंचनामा में फोन की जब्‍ती का ज‍िक्र नहीं है। ज‍िस 6 ग्राम चरस की बरामदगी बताई जा रही है, वह बहुत छोटी मात्रा है। ऐसे में तस्‍करी की धारा नहीं लागू होती साथ वहां जिनको भी हिरासत में लिया गया, उनमें आर्यन के अलावा किसी से अरबाज का कोई कनेक्‍शन नहीं है। लिहाजा, साजिश की बात बेबुनियाद है।

देशमुख बोले- सौम्‍या और बलदेव को क्‍यों नहीं किया अरेस्‍ट
वहीं मुनमुन धमेचा के वकील अली काश‍िफ खान देशमुख ने जिरह करते हुए कहा कि मुनमुन पर कोई आरोप लागू नहीं होता। उन पर सिर्फ सेवन का आरोप है, जबकि मेडिकल टेस्‍ट नहीं हुआ। एनसीबी ने जिस कमरे से मुनमुन धमेचा को हिरासत में लिया था, वहां सौम्‍या सिंह और बलदेव भी मौजूद थे। सौम्‍या के पास से एनसीबी को पेपर रोल भी मिला। लेकिन हिरासत में सिर्फ मुनमुन को लिया गया। उन्होंने कहा कि एनसीबी ने अगर उन्हें सिर्फ संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया था तो क्रूज पर मौजूद सभी 1300 लोगों को पकड़ना चाहिए था। और अगर सिर्फ बरादमगी के संदेह पर मुनमुन को हिरासत में लिया गया तो फिर सौम्या सिंह और बलदेव को किस आधार पर छोड़ दिया गया।

काशिफ खान ने एनसीबी के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया कि मुनमुन धमेचा ने ड्रग्स का सेवन किया था और इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया। इस पर खान ने कहा कि जब मेडिकल टेस्ट भी नहीं करवाया गया तो फिर किस आधार पर वो कह सकते हैं कि मुनमुन ने ड्रग्स का सेवन किया।

मुकुल रोहतगी ने आर्यन के लिए दीं ये दलीलें
आर्यन खान के वकील और पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि एनसीबी गुमराह करने की कोशिश कर रही है। रोहतगी ने कहा कि किसी की भी गिरफ्तारी और जमानत के अधिकार के बारे में सूचित किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, ‘मेरे पास वॉट्सऐप चैट्स नहीं हैं। मुद्दा यह है कि उनके पास चैट हैं, उनके पास कब्जा है और फिर भी वो मुझे यह नहीं बताकर गुमराह करना चाहते हैं कि क्या बरामद किया गया है। इस रिमांड को पढ़कर किसी को भी लगेगा कि बरामदगी का संबंध मुझसे या अरबाज से है। हालांकि आर्यन के पास से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है, अरबाज पर धारा ए, बी सी का आरोप लगाया गया है।’

इससे पहले मंगलवार यानी 26 अक्टूबर को जस्टिस नितिन साम्ब्रे की अदालत में हुई सुनवाई में मुकुल रोहतगी ने आर्यन की पैरवी करते हुए कई जोरदार दलीलें दी थीं। उन्होंने आर्यन की गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए जमानत देने की बात कही थी। मुकुल रोहतगी ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल आर्यन खान के पास से न तो ड्रग्स बरामद हुए और न ही क्रूज पर पकड़े जाने के दौरान उन्होंने ड्रग्स का कोई सेवन ही किया था। बावजूद इसके आर्यन को 23 दिनों से कैद में रखा गया है।

इंटरनैशनल ड्रग्स तस्करी के आरोप किए खारिज
मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में एनसीबी के आर्यन पर ‘इंटरनैशनल ड्रग्स तस्करी’ का हिस्सा होने के आरोपों को भी खारिज कर दिया था और कहा था कि ड्रग्स आर्यन के पास से नहीं, अरबाज के पास से मिला था। अरबाज, आर्यन के दोस्त हैं। लेकिन अरबाज कोई आर्यन के नौकर नहीं। अरबाज के पास क्या मिलता है और क्या नहीं, इससे आर्यन का कोई लेना-देना नहीं है। रोहतगी ने कहा था, ‘एनसीबी इसे कॉन्शस पजेशन बता रही है और कह रही है कि आर्यन को पता था कि अरबाज के जूतों में ड्रग्स है। यदि इसे कॉन्‍शस पजेशन मान भी लें तो भी वहां 6 ग्राम की मात्रा बरामद हुई है। इससे तस्‍करी कैसे हो सकती है। साजिश तो तब होती जब गिरफ्तार सभी 20 आरोपी एक-दूसरे को पहले से मिले हुए हों। यहां तो कोई किसी को जानता भी नहीं।’

इस कारण बुधवार के लिए टाली गई थी सुनवाई
मंगलवार की सुनवाई में मुकुल रोहतगी ने सबसे पहले आर्यन के लिए अपना पक्ष रखा था। इसके बाद अमित देसाई ने अरबाज मर्चेंट के लिए अपना पक्ष रखना शुरू किया, लेकिन देर हो जाने के कारण सुनवाई को बुधवार (27 अक्टूबर) तक के लिए टाल दिया गया था।

2 अक्टूबर से हिरासत में हैं आर्यन
बता दें कि आर्यन खान 2 अक्टूबर से हिरासत में हैं। उन्हें मुंबई से गोवा जा रही क्रूज से एनसीबी ने गिरफ्तार किया था। तब से शाहरुख खान के वकीलों ने आर्यन को जमानत दिलवाने की खूब कोशिशें की हैं। सेशंस कोर्ट ने आर्यन की जमानत याचिका दो बार रिजेक्ट कर दी। ऐसे में शाहरुख और आर्यन के साथ-साथ उनके वकीलों की उम्मीदें बॉम्बे हाई कोर्ट पर टिकी हैं।