ठण्डे बस्ते के हवाले हुई एमआर वन योजना!

मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव हो सकता था इस योजना से कम
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। भाजपा शासित नगर पालिका परिषद की बेढंगी चाल के चलते शहर की व्यवस्थाएं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं। बेतरतीब यातायात व्यवस्थाओं के बीच शहर में छिंदवाड़ा चौराहा से फोरलेन बायपास के बीच से मेजर रोड का प्रस्ताव चार साल बाद भी कहाँ अटका पड़ा है, इस बारे में शायद ही कोई जानता होगा।
ज्ञातव्य है कि साल 2018 में जनवरी माह में यह बात उभरकर सामने आयी थी कि तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार के द्वारा नगर पालिका से बुनियादी ढांचा (बेसिक इंफ्रास्ट्रॅक्चर) मद में नये निर्माण के लिये प्रस्ताव माँगे गये थे। इस दौरान ही भाजपा नीत नगर पालिका परिषद के द्वारा पाँच करोड़ रुपए की लागत से पालिका के नये कार्यालय भवन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया था।
पालिका के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो कार्यालय भवन को राज्य सरकार के द्वारा बुनियादी ढांचे की श्रेणी में नहीं रखे जाने के कारण यह प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया था। सूत्रों ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को भले ही यह बात न पता हो कि बुनियादी ढांचे की मद में किन बातों को शामिल किया जा सकता है पर अधिकारियों को तो यह पता होना चाहिये था कि बुनियादी ढांचे में क्या – क्या शामिल किया जा सकता है, इसके बाद भी अधिकारियों के द्वारा कार्यालय भवन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया था।
इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि सिवनी में ज्यारत नाका से छिंदवाड़ा नाका के मार्ग (आधी अधूरी मॉडल रोड के हिस्से) पर यातायात के दबाव को कम करने के लिये 2013 में मेजर रोड के दो प्रस्ताव बनाये गये थे। शहर सुधार न्यास के तहत आधी अधूरी पड़ी मॉडल रोड के दोनों ओर दो मेजर रोड का प्रावधान किया गया था।
सूत्रों ने बताया कि इसमें से एक को छिंदवाड़ा नाका के पास से एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम के पीछे, परतापुर के पास से होते हुए लूघरवाड़ा को जोड़ने तथा दूसरे को कटंगी नाका से रेलवे पटरी के पास बरघाट नाका होते हुए लूघरवाड़ा पहुँचने के लिये बनाया गया था। सूत्रों ने बताया कि इन प्रस्तावों की वैधता एक साल में ही समाप्त इसलिये हो गयी थी क्योंकि भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के द्वारा इन दोनों ही प्रस्तावों पर आगे पहल ही नहीं की गयी थी।
सूत्रों ने बताया कि इसके बाद पूर्व विधायक नरेश दिवाकर की पहल पर छिंदवाड़ा चौराहा से छिंदवाड़ा रोड पर किसी स्थान से परतापुर, भैरोगंज होते हुए लूघरवाड़ा तक दो हिस्सों में 65 करोड़ रुपए की लागत वाला मेजर रोड वन का प्रस्ताव बनाकर राज्य शासन को भेजा गया था।
सूत्रों ने कहा कि चार साल बीतने के बाद भी तत्कालीन विधायकों और सांसदों के द्वारा किसी तरह की पहल नहीं किये जाने के कारण यह प्रस्ताव नगरीय कल्याण विभाग के मुख्यालय में किसी कोने में पड़ा हो तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये।