पानी के अमानक पाऊच बिक रहे जिले में

न एक्सपायरी न मेन्यूफेक्चरिंग डेट का पता!
(संजीव प्रताप सिंह)
सिवनी (साई)। गर्मी के मौसम में शीलत जल की खपत बढ़ने का सीधा फायदा अमानक पाऊच बेचने वालों को होता है। जिले भर में बिक रहे पानी के पाऊचों में अधिकांश में न तो निर्माण तिथि का पता है और न ही अवसान तिथि का। यहाँ तक कि अनेक पाऊच पर से तो निमार्ता का नाम और पता ही गायब है।
गर्मी आते ही मनुष्य सहित पशु पक्षियों में पानी की तलब बढ़ जाती है। इस दौरान लगातार प्यास लगती रहती है। ऐसे मौसम में पसीना ज्यादा ही आता है और ज्यादा पानी पीना सेहत के लिये अच्छा भी होता है। लेकिन जरा सम्हलकर, कहीं ऐसा न हो कि आपकी सेहत को सुधारने वाला यही पानी सेहत सुधारने की बजाय आपको अस्पताल पहुँचा दे।
दरअसल सिवनी सहित मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में गर्मी के दिन आते ही पाऊच वाले पानी की माँग बढ़ जाती है। लोग कई बार अपनी सुविधा के लिये पानी की पूरी बोतल खरीदने की बजाय एक या दो रुपये में मिलने वाले इन पाऊच को खरीद लेते हैं, लेकिन अगर आप भी प्यास बुझाने के लिये पाऊच वाला पानी पीते हैं, तो बस कुछ सावधानियां बरतिये और सेहतमंद रहिये।
जी हाँ, क्या आप जानते हैं कि कई दुकानों पर मिलने वाले पाऊच का पानी आपकी सेहत बिगाड़ सकता है? यदि नहीं, तो हम आपको बताते हैं कि कैसे और किन चीजों का आप ख्याल रखेंगे तो आपके स्वास्थ्य पर विपरित असर नहीं पड़ेगा।
ऐसे पहचानें अमानक पाऊच : पानी के वे पाऊच जिनमें आईएसआई मार्का नहीं है, कंपनी का पता व फोन नंबर नहीं है साथ ही पाऊच की निर्माण तिथि व एक्सपायरी तिथि भी नदारद है, ऐसे पाऊच जिनमें यह सब न हों उन्हें देखते ही समझ जायें कि इनमें अमानक पानी हो सकता है।
इस तरह के पाऊच का पानी नहीं पीकर आप अपने स्वास्थ्य को दुरूस्त रख सकते हैं। जानकार बताते हैं गर्मी के मौसम में जब भी बाहर जायें खूब पानी पीकर निकलें, ताकि प्यास न के बराबर लगे और जहाँ तक हो सके अपने घरों से ही पानी साथ लेकर चलें।
इसके बाद भी यदि कभी पानी नहीं होने पर प्यास लगे और पाऊच लेकर पानी पीना ही पड़े तो कम से कम पाऊच का पूरा निरीक्षण कर लें, वही पाऊच लें जो आईएसआई से मान्यता प्राप्त हो और जिस पर सारी जानकारियां उपलब्ध हों।
जागरूकता की कमी : पानी की बिक्री और इसमें होने वाले मुनाफे को देखते हुए प्रदेश के अधिकांश जिलों में कुकुरमुत्ते की तरह पानी के पाऊच बनने वाली कई नकली कंपनियां भी अस्तित्व में आ जातीं हैं। सूत्रों के अनुसार इनमें से कई कंपनियां तो गलत तरीकों का प्रयोग करती हैं और जागरूकता की कमी होने के चलते उपभोक्ता इन कंपनियों के द्वारा निर्मित पानी को उचित मानते हुए उपयोग में भी ले लेते हैं।
वहीं बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैण्डर्स) से जूड़े सूत्रों के अनुसार यदि कोई शिकायत करता है, तभी बीआईएस विभाग इस संबंध में कार्यवाही करता है, बाकी बाजार में अमानक पानी बिक्री (पाऊच) के संबंध में कार्यवाही का अधिकार वहाँ के स्थानीय प्रशासन व खाद्य और औषधि विभाग के जिम्मे होता है।