पश्चिम मध्य रेल में सवा चार करोड़ का घोटाला!

पश्चिम मध्य रेल के यांत्रिक विभाग में हो रहे बड़े-बड़े घोटाले
(सुमित खरे)


जबलपुर (साई)। एक तरफ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के द्वारा भारतीय रेल की दशा और दिशा सुधारने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम मध्य रेल में नित नए घोटाले सामने आते दिख रहे हैं।
पश्चिम मध्य रेल के महाप्रबंधक कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पश्चिम मध्य रेल के यांत्रिकी विभाग में हाल ही में लगभग सवा चार करोड़ रूपए का घोटाला सामने आया है। यह घोटाला यात्री रेल गाड़ियों की पानी की टंकी में पानी भरने का बताया जा रहा है।


सूत्रों ने आगे बताया कि पश्चिम मध्य रेल के यांत्रिकी विभाग के प्रमुख आर.एस. सक्सेना के अधीन काम करने वाला यांत्रिकी विभाग लंबे समय से चर्चाओं में है। इस विभाग में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार जमकर सामने आने के बाद भी किसी तरह की कार्यवाही न होना आश्चर्य का ही विषय माना जा रहा है।


सूत्रों ने बताया कि आर.एस. सक्सेना के द्वारा अपने अधीन अपने दो चहेते अधिकारियों को पदस्थ किया गया है। इसमें एक वरिष्ठ यांत्रिकी अधिकारी एस.के. सिंह की लगभग दस सालों से कटनी में तैनाती है, एवं दूसरे अधिकारी के द्वारा जो केंद्रीय जांच ब्यूरो अर्थात सीबीआई की एग्रीड लिस्ट में शुमार भोपाल मण्डल में यांत्रिकी विभाग में पदस्थ अधिकारी अजय श्रीवास्तव हैं।


सूत्रों की मानें तो इन दोनों ही अधिकारियों के द्वारा कथित तौर पर किए गए भ्रष्टाचार के मामले लगातार ही उजागर हो रहे हैं। इस मामले में पश्चिम मध्य रेलवे के सतर्कता विभाग के द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद भी यांत्रिकी विभाग के प्रमुख आर.एस. सक्सेना के द्वारा इन दोनों ही अधिकारियों को कथित तौर पर प्रश्रय दिए जाने के कारण सतर्कता विभाग भी इन दोनों के खिलाफ किसी तरह की कठोर कार्यवाही करने में अक्षम ही दिखाई दे रहा है।
पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक कार्यालय के विश्वस्त सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि हाल ही में एक और मामला प्रकाश में आया है जिसमें 04 करोड़ 20 लाख रूपए का घोटाला किए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इसके तहत भोपाल मंडल में पदस्थ अजय श्रीवास्तव की संलिप्तता इसमें बताई जा रही है।


सूत्रों ने बताया कि भोपाल मण्डल में यात्रिकी विभाग में पदस्थ अजय श्रीवास्तव के द्वारा एक निविदा के जरिए डायनामिक इंटरप्राईजेज नामक कंपनी को टेंडर दिया गया थ, जिसके जिम्मे यात्री रेलगाड़ियों के रेलवे स्टेशन पर पहुंचने पर उनकी बोगियों में शौचालय के ऊपर बनी पानी की टंकियों में पानी भरना था।
सूत्रों ने बताया कि निविदा एवं कार्यादेश की शर्तों के अनुसार डायनामिक इंटरप्राईजेज नामक कंपनी को अपने कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कर्मचारियों के खाते में किया जाना था, किन्तु कंपनी के द्वारा वेतन का भुगतान कर्मचारियों के खातों में नहीं किया जाकर नियमों की अनदेखी की गई।


सूत्रों की मानें तो यह मामला पश्चिम मध्य रेलवे के एक इंजीनियर के संज्ञान में आने के उपरांत उनके द्वारा आफिस नोट के जरिए इस मामले को वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किए जाने के बाद रेलवे के द्वारा डायनामिक इंटरप्राईजेज को किए गए पहले भुगतान में एक लाख रूपए का जुर्माना कंपनी पर लगाया।
सूत्रों ने यह भी बताया कि पहले महीने एक लाख रूपए जुर्माने के साथ ही कंपनी के द्वारा अपने कर्मचारियों को गणवेश में नहीं रखने पर कुछ जुर्माना किया गया। मजे की बात तो यह है कि हर महीने किए जाने वाले जुर्माने में कर्मचारियों के गणवेश में न होने का उल्लेख तो किया गया किन्तु कंपनी के द्वारा लगातार ही कर्मचारियों को नकद भुगतान किए जाने से होने वाली निविदा एवं कार्यादेश की शर्तों के उल्लंघन का जिक्र कभी नहीं किया गया।


सूत्रों ने यह भी बताया कि अगस्त 2019 से यह सिलसिला लगातार ही जारी है जो जून 2022 तक लगभग 35 माह से जारी है। इसके बाद भी डायनामिक इंटरप्राईजेज का बिल लगातार ही निकाला जा रहा है। हर माह लगभग 12 लाख रूपए के हिसाब से पूरा भुगतान अगर जोड़ा जाए तो 35 माह में लगभग 04 करोड़ 20 लाख रूपए का भुगतान रेलवे के अधिकारियों के द्वारा डायनामिक इंटरप्राईजेज को किया गया है।


सूत्रों ने कहा कि इसके स्थान पर होना यह चाहिए था कि कंपनी के द्वारा कर्मचारियों को नकद वेतन दिया गया था उसके एवज का भुगतान ही पास नहीं करना चाहिए था, एवं उसके उपरांत दूसरे माह भी इसी तरह की गलति किए जाने पर कंपनी को काली सूची में डाल दिया जाना चाहिए था। कमोबेश यही कदम कर्मचारियों के गणवेश में उपस्थित न होने के मामले में उठाया जाना चाहिए था, किन्तु अधिकारियों के द्वारा अपनी चहेती कंपनी डायनामिक इंटरप्राईजेज को लाभ पहुंचाने के लिए नियम कायदों को धता बताते हुए इस पूरे मामले में नियमों की अनदेखी करते हुए कंपनी को लगभग सवा चार करोड़ रूपए का भुगतान कर दिया गया।