इंडस्ट्रियल कारीडोर में बदलाव : कब तक सिवनी और नरसिंहपुर के साथ अन्याय होता रहेगा!

लिमटी की लालटेन 286

सिवनी, नरसिंहपुर के मुंह से छीना जा रहा निवाला! इस अन्याय के खिलाफ क्या आवाज बुलंद करेंगे दोनों सांसद!

(लिमटी खरे)

कुछ समय से औद्योगिक गलियारे जिसे अंग्रेजी में इंडस्ट्रियल कारीडोर कहा जाता है चर्चाओं में हैं। हाल ही में दिल्ली से नागपुर के बीच बनने वाला इंडस्ट्रियल कारीडोर चर्चाओं में है। वह इसलिए क्योंकि इस कारीडोर को पहले दिल्ली से झांसी, ग्वालियर होते हुए सागर नरसिंहपुर सिवनी होकर नागपुर ले जाया जा रहा था अब इसे सागर से  बीना, विदिशा, भोपाल, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल होते हुए नागपुर तक बनाए जाने का प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा केंद्र को भेजा गया बताया जा रहा है। कुल मिलाकर सिवनी और नरसिंहपुर जिले के मुंह से निवाला छीनने का प्रयास किया जा रहा है।

कहा जा रहा है कि हाल ही में प्रधानमंत्री गति शक्ति मिशन की बैठक में मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के द्वारा यह कहा गया कि इस कारीडोर के लिए तय किए गए रास्ते में पेंच व कान्हा (जबकि इसमें सिर्फ पेंच नेशनल पार्क का हिस्सा ही आ रहा है) के अलावा अनेक दुर्गम पहाड़ियां और नदियों के लंबे पाट (नदियों की चौड़ाई को पाट कहा जाता है) आ रहे हैं। इसके अलावा यहां जमीन अधिग्रहण में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस क्षेत्र में कोई भी इंडस्ट्रियल कारीडोर कारीडोर को विकसित नहीं किया जा सकता है इसलिए इसका रूट बदल दिया जाए।

पहले यह कारीडोर नई दिल्ली से आरंभ होकर होकर मथुरा, ग्वालियर, झांसी, ललितपुर, सागर, नरसिंहपुर, सिवनी होते हुए नागपुर जाना प्रस्तावित था, अब यह ललितपुर से बीना, गंजबासौदा, विदिशा, भोपाल, नर्मदापुरम, इटारसी, बैतूल, मुलताई, पांढुरना, काटोल से होकर नागपुर पहुंचेगा।

मजे की बात तो यह भी है कि नया प्रस्तावित कारीडोर राष्ट्रीय राजमार्ग 44 एवं 46 से होकर गुजरेगा जहां सरकार के द्वारा प्रस्ताव दिए जाने के पहले ही 20 हजार हेक्टेयर जमीन चिन्हित भी की जा चुकी है। इस करीडोर के नए मार्ग में बीना में ढाई हजार हेक्टेयर जमीन चिन्हित की जा चुकी है इसके अलावा रायसेन जिले के मण्डीदीप औद्योगिक क्षेत्र को इसमें शामिल किया जाना प्रस्तावित है।

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यक्ष प्रश्न यही खड़ा हुआ है कि आखिर कारीडोर का रास्ता बदलने के पहले ही सरकार के द्वारा जमीन का अधिग्रहण किया जाना सरकार की मंशा को क्या दर्शाने के लिए पर्याप्त नहीं है। नए मार्ग में बीना, भोपाल जैसे क्षेत्र आएंगे जिनके आसपास पहले से ही औद्योगिक संपन्नता है। मण्डीदीप को बहुत बड़ा औद्योगिक क्षेत्र माना जा सकता है।

पुराने मार्ग में पड़ने वाले नरसिंहपुर और सिवनी जिले वैसे भी पिछड़े जिलों की फेहरिस्त में शामिल हैं। होशंगाबाद संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है नरसिंहपुर तो बालाघाट संसदीय क्षेत्र का हिस्सा सिवनी जिला है। इस लिहाज से होशंगाबाद के सांसद उदय प्रताप सिंह और बालाघाट के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को इसका पुरजोर विरोध करना चाहिए।

माना कि यह भाजपा की सरकार की योजना है और दोनों ही सांसद भाजपा के हैं, पर उनके पास विरोध का पर्याप्त आधार है। वह यह कि दिल्ली से नागपुर इंडस्ट्रियल कारीडोर को अगर सागर से नरसिंहपुर सिवनी के बजाए बीना, भोपाल, होशंगाबाद, बैतूल होकर नागपुर ले जाया जाता है तो सड़क या रेल मार्ग से इसकी दूरी में इजाफा होने की संभावना अधिक है। जबकि सागर से नरसिंहपुर होकर सिवनी से नागपुर की दूरी महज 300 किलोमीटर ही है जो भोपाल होकर नागपुर जाने पर इससे दोगुनी हो जाएगी।

उल्लेखनीय होगा कि देश में 11 राष्ट्रीय गलियारे बन रहे हैं। इन नेशनल कारीडोर में दिल्ली नागपुर की परियोजना को सबसे ज्यादा अहम माना जा सकता है। केंद्र सरकार के नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत देश में 11 नेशनल कॉरिडोर बना रहा है। इसमें दिल्ली-नागपुर कॉरिडोर देश के हृदय प्रदेश के लिए अहम माना जा सकता है क्योंकि लगभग 1100 किलो मीटर  लंबे इस कॉरिडोर का 70 फीसदी हिस्सा मध्य प्रदेश से होकर गुजरेगा। इसके निर्माण हेतु एशियन डेव्हलपमेंट बैंक के द्वारा दो हजार करोड़ रूपए का कर्ज दिया गया है।

कहा जा रहा है कि उत्तर दक्षिण फोरलेन गलियारे के साथ ही इस औद्योगिक गलियारे का निर्माण कराया जा रहा था, जिसे मध्य प्रदेश की सरकार के द्वारा दिए गए प्रस्ताव के बाद अब इसका रूट बदला जा सकता है। दिल्ली नागपुर औद्योगिक गलियारे जिसे डीएनआईसी भी कहा जा रहा है को एनएचएआई के द्वारा उत्तर दक्षिण गलियारे के तहत विकसित किया जा रहा था, जिसके तहत मौजूदा फोरलेन गलियारे को इसके लिए समर्पित किया जा सकता था।

वर्तमान में जो औद्योगिक गलियारे प्रस्तावित हैं, उनमें दिल्ली मुंबई डीएमआईसी, अमृतसर कोलकता एकेआईसी, चेन्नई बेंग्लुरू सीबीआईसी, इस सीबीआईसी का विस्तार कोच्ची तक, विशाखापट्टनम चेन्नई वीसीआईसी, कोयंबटूर ईस्ट कोस्ट ईसीआईसी, हैदराबाद नागपुर एचएनआईसी, हैदराबाद वारंगल एचडब्लूआईसी, हैदराबाद बेंग्लुरू एचबीआईसी, बेंग्लुरू मुंबई बीएमआईसी और दिल्ली नागपुर डीएनआईसी शामिल हैं।

दिल्ली नागपुर औद्योगिक कारीडोर बनाने के पीछे सरकार की मंशा यही दिख रही है कि इसमें पड़ने वाले क्षेत्रों की वर्तमान आर्थिक और रोजगार क्षमता को बढ़ना, विशेष रूप से विनिर्माण, कृषि प्रसंस्करण, सेवाओं और निर्यात के लिए उन्मुख इकाइयों में निवेश को प्रोत्साहित करना और उच्च मानक बुनियादी ढांचे के निर्माण के माध्यम से क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा देना होगा है।

इसके अलावा एक सक्षम व्यवसाय और समर्थक वातावरण बनाना, डीएनआईसी को चरणबद्ध तरीके से राष्ट्रीय राजमार्ग एवं एन-एस डीएफसी के दोनों ओर विकसित करने का प्रस्ताव है। डीएनआईसी का दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों में प्रभाव क्षेत्र होगा।

इसके अलावा औद्योगिक गलियारों के गठन के पीछे सरकार की मंशा रेल और सड़क मार्ग पर उच्च गति का परिवहन नेटवर्क स्थापित करना, अत्याधुनिक कार्गो के अनुकूल उपकरणों के साथ पोर्ट का निर्माण, अध्याधुनिक हवाई अड्डे, विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) एवं औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण, लाजिस्टिक पार्क एवं परिवहन केंद्र का निर्माण, खाद्यान केंद्रित औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए नालेज पार्क की स्थापना, पूरक बुनियादी ढांचे अर्थात रियल एस्टेट को बढ़ावा देना एवं शहरीकरण अर्थात नई टाऊनशिप का निर्माण कराना आदि शामिल हैं।

अब इन परिस्थितियों में यही कहा जा सकता है कि नरसिंहपुर और सिवनी जिले के मुंह से निवाला छीना जा रहा है। इसके पहले जब उत्तर दक्षिण गलियारे में फोरलेन का निर्माण कराया जा रहा था उस समय वन क्षेत्र का अडंगा सिवनी जिले से होकर गुजरने वाले फोरलेन मार्ग पर लगा और बहुत मुश्किल से इस अड़ंगे को दूर किया जा सका। अब इंडस्ट्रियल कारीडोर को सिवनी और नरसिंहपुर जिले से छीनकर ललितपुर से बीना, भोपाल के रास्ते नागपुर ले जाने का ताना बाना बुना जा रहा है। इसके लिए होशंगाबाद के सांसद उदय प्रताप सिंह और बालाघाट के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को आगे आना चाहिए और जिस जनता के द्वारा उन्हें जनादेश देकर संसद की सीढ़ियां चढ़ने के योग्य बनाया उसका सम्मान इन्हें करना चाहिए . . .!

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(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)

(साई फीचर्स)