छत्तीसगढ़

बीसीसीएल धनबाद में ₹1,500 करोड़ का बड़ा घोटाला, कई अधिकारी जांच के घेरे में

(ब्यूरो कार्यालय)

धनबाद (साई)। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), धनबाद में करीब ₹1,500 करोड़ का एक बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोप है कि कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने एक बड़े ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुँचाया, जिससे कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। इस मामले में कोयला मंत्रालय और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है।

किन ठेकों पर है जांच?

जांच के दायरे में 2021 से 2025 के बीच दिए गए ठेके हैं। शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ मिली हैं। मामला आगे की कार्रवाई के लिए कोयला मंत्रालय और सीवीसी को भेज दिया गया है।

ताज़ा विवाद कुजामा (लोदना क्षेत्र), ईस्टर्न झरिया भावरा फोर ए पैच और एनटीएसटी प्रोजेक्ट से जुड़ा है। इन परियोजनाओं में ठेकों को गलत तरीके से बढ़ाया गया, जिससे कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा। जांचकर्ताओं को पता चला है कि इन ठेकों को तकनीकी और टेंडर समिति की बैठकों के बाद फंक्शनल डायरेक्टर की बैठक में मंजूरी दी गई थी।

तीन दर्जन से ज़्यादा अधिकारी घेरे में

इस घोटाले में करीब तीन दर्जन अधिकारी शामिल हैं, जिनमें बीसीसीएल के सीएमडी, एक फंक्शनल डायरेक्टर, कई महाप्रबंधक, टेंडर और तकनीकी समिति के सदस्य और नोडल अधिकारी शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों को 20 से 31 अगस्त के बीच अपना जवाब देने को कहा गया है।

जिन अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें जीएम धनराज अखरे, कुमार राजीव, मिथिलेश कुमार, एस.ए. तलमले, संजय कुमार अग्रवाल और दीपंकर मैथी शामिल हैं। उनसे कुजामा में प्रस्तावित माइन डेवलपर एवं ऑपरेटर (एमडीओ) परियोजना के बावजूद इतने बड़े बदलाव को मंजूरी देने का कारण पूछा गया है।

क्या हो सकती है कार्रवाई?

यदि जांच पैनल को अधिकारियों का जवाब संतोषजनक नहीं लगा, तो उन्हें पदावनति (demotion) या उससे भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस मामले में बीसीसीएल के एक पूर्व निदेशक, जो वर्तमान में किसी अन्य पीएसयू में सीएमडी हैं, और अनुबंध प्रबंधन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं।