तो हो जाए एक एक समोसा…

(संजीव शर्मा) ‘समोसा’ सुनते ही मुंह में पानी आ जाना स्वाभाविक है। यह तिकोना, मोटा और भूरा सा व्यंजन अपनी कद काठी के कारण

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गौरी भाऊ के तौर पर पिछड़ा वर्ग को मिला नया स्वर

(हेमेन्द्र क्षीरसागर) कृषकों, पिछड़ों, मजदूरों और आमजनों की समस्याओं से अच्छी तरह वाकिफ आम आदमी की तरह सहज, सरल-शैली, व्यक्तित्व और जन-रागात्मकता से युक्त

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दधिचि राष्ट्र सेवक भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष वैभव पंवार

(हेमेन्द्र क्षीरसागर) सादगी, सरलता, राजनीतिक पृष्ठभूमि और आंकाओं के बिना हर मुकाम मुकम्मल करना आसान नहीं होता, लेकिन अपने जुनून के पक्के एक फक्कड़

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भारतवर्ष सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि यह कर्मभूमि है

( हेमेंद्र क्षीरसागर) अखंड भारत, श्रेष्ठ भारत, सर्वश्रेष्ठ भारत हम सबकी अभिकल्पना है। सारगर्भित, अखण्ड भारत महज सपना नहीं, श्रद्धा, तपश्या, निष्ठा और जीता-जागता

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पुस्तकालयों में अमूल्य धरोहर की बर्बादी और उपेक्षा

(डॉ. प्रितम भि. गेडाम) समाज में बौद्धिक, शैक्षिक और मानवीय सर्वांगीण विकास के लिए पुस्तकालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनका महत्व कभी भी कम

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