शुक्र है इंसान बना

शुक्र है , मैं कुछ बनने से पहले इंसान बना फिर कुछ और… ! कुछ लोग, चिकित्सक,वैज्ञानिक,शिक्षक और भी जाने क्या-क्या बन जाते हैं

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गांवों में बदहाल पुस्तकालयों के बीच आशा की नई किरण

(राष्ट्रीय पुस्तकालय सप्ताह विशेष 14-20 नवंबर 2021) (डॉ. प्रितम भि. गेडाम) हमारे देश में दशकों से “गांव वहा पुस्तकालय” की संकल्पना का सपना आज

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‘संत नामदेव’, अमृत का निरंतर बहता झरना

(हेमेन्द्र क्षीरसागर) संत नामदेव का महाराष्ट्र में वही स्थान है, जो भक्त कबीरजी अथवा सूरदास का उत्तरी भारत में है। उनका सारा जीवन मधुर

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‘झण्डा ऊंचा रहे हमारा’: गणेश शंकर विद्यार्थी

(हेमेन्द्र क्षीरसागर) अपनी बेबाकी और अलग अंदाज से दूसरों के मुंह पर ताला लगाना एक बेहद मुश्किल काम होता है। कलम की ताकत हमेशा

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राजमाता ने जनसेवा से कभी मुख नहीं मोड़ा

(हेमेन्द्र क्षीरसागर) राजमाता विजया राजे सिंधिया त्याग एवं समर्पण की प्रति मूर्ति थी। उन्होंने राजसी ठाठ-बाट का मोह त्यागकर जनसेवा को अपनाया तथा सत्ता

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आधुनिक जीवनशैली पहुंचा रही हृदय को आघात

(डॉ. प्रितम भि. गेडाम) (विश्व हृदय दिवस – 29 सितंबर 2021) आज के आधुनिक जीवनशैली ने मनुष्य का जीवन चक्र ही बिगाड़ दिया है जिसका

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तो हो जाए एक एक समोसा…

(संजीव शर्मा) ‘समोसा’ सुनते ही मुंह में पानी आ जाना स्वाभाविक है। यह तिकोना, मोटा और भूरा सा व्यंजन अपनी कद काठी के कारण

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गौरी भाऊ के तौर पर पिछड़ा वर्ग को मिला नया स्वर

(हेमेन्द्र क्षीरसागर) कृषकों, पिछड़ों, मजदूरों और आमजनों की समस्याओं से अच्छी तरह वाकिफ आम आदमी की तरह सहज, सरल-शैली, व्यक्तित्व और जन-रागात्मकता से युक्त

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